RBI ने तरलता प्रबंधन हेतु ट्रेज़री बिल बोलियां अस्वीकार कीं
28 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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ट्रेज़री बिल — सरकार के अल्पकालिक ऋण साधन; 91, 182, 364 दिन की परिपक्वता; शून्य-कूपन।
क्या हुआ
RBI द्वारा तरलता-प्रबंधन हेतु ट्रेज़री बिल (T-Bill) बोलियाँ अस्वीकार करने की चर्चा हुई। ट्रेज़री बिल केंद्र सरकार द्वारा जारी अल्पकालिक (91, 182, 364 दिन) ऋण-प्रपत्र हैं, जिन्हें RBI नीलामी द्वारा जारी करता है। जब बैंकिंग प्रणाली में अत्यधिक तरलता (नकदी) हो या बोलियाँ अपेक्षित प्रतिफल (yield) से प्रतिकूल हों, तो RBI बोलियाँ अस्वीकार/आंशिक स्वीकार कर सकता है — यह उसके तरलता-समायोजन व ब्याज-दर प्रबंधन का एक उपकरण है। RBI मौद्रिक नीति, मुद्रास्फीति-नियंत्रण व बाज़ार-स्थिरता हेतु तरलता को संतुलित करता है (LAF, OMO, रेपो/रिवर्स रेपो के साथ)। यह मौद्रिक प्रबंधन व ऋण-बाज़ार से जुड़ा है। यह अर्थव्यवस्था से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1RBI ने तरलता-प्रबंधन हेतु T-Bill बोलियाँ अस्वीकार कीं।
- 2T-Bill — सरकार के अल्पकालिक ऋण-प्रपत्र।
- 391, 182, 364 दिन; RBI नीलामी जारी करता है।
- 4बोली अस्वीकार = ब्याज-दर/तरलता उपकरण।
- 5LAF, OMO, रेपो — मौद्रिक प्रबंधन।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
ट्रेज़री बिल, तरलता प्रबंधन व SLR अर्थव्यवस्था में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: T-Bill — सरकार के अल्पकालिक प्रपत्र (91/182/364 दिन); RBI नीलामी। बोली अस्वीकार = तरलता प्रबंधन उपकरण। LAF, OMO, रेपो।