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राष्ट्रीय · अर्थव्यवस्था

भारत के विद्युत वितरण क्षेत्र में सुधार

14 फरवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

विद्युत वितरण — DISCOMs की वित्तीय अक्षमता; उच्च AT&C (एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल) हानि।

क्या हुआ

भारत के विद्युत वितरण (power distribution) क्षेत्र के सुधार की चर्चा हुई। वितरण कंपनियाँ (DISCOMs) बिजली मूल्य शृंखला की सबसे कमज़ोर कड़ी हैं — उच्च समग्र तकनीकी व वाणिज्यिक (AT&C) हानियाँ (बिजली चोरी, बिलिंग अक्षमता), सब्सिडी बकाया व वित्तीय घाटा उनकी व्यवहार्यता को कमज़ोर करते हैं। सुधार — पुनर्निर्धारित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS), स्मार्ट मीटरिंग (प्रीपेड), फीडर पृथक्करण, घाटा-कमी, व निजी भागीदारी। स्वस्थ DISCOMs विश्वसनीय बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण व 'सबके लिए बिजली' के लिए आवश्यक हैं। बिजली समवर्ती सूची का विषय है। यह ऊर्जा सुरक्षा व आर्थिक वृद्धि से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1भारत के विद्युत वितरण क्षेत्र का सुधार।
  2. 2DISCOMs — मूल्य शृंखला की सबसे कमज़ोर कड़ी।
  3. 3उच्च AT&C हानियाँ; वित्तीय घाटा।
  4. 4सुधार — RDSS, स्मार्ट मीटरिंग, फीडर पृथक्करण।
  5. 5बिजली — समवर्ती सूची।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

DISCOMs, AT&C हानि व RDSS अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: DISCOMs — वितरण कंपनियाँ। AT&C हानियाँ। RDSS; स्मार्ट मीटरिंग। बिजली — समवर्ती सूची। UDAY (पूर्व सुधार)।

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