पवित्र उपवन (सेक्रेड ग्रोव)
6 फरवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
पवित्र उपवन — समुदायों द्वारा पवित्र मानकर संरक्षित वन; स्वस्थानी (इन-सीटू) संरक्षण।
क्या हुआ
पवित्र उपवन (sacred groves) चर्चा में रहे। पवित्र उपवन वनों के वे टुकड़े हैं जिन्हें स्थानीय समुदाय धार्मिक/सांस्कृतिक मान्यताओं के कारण पवित्र मानकर संरक्षित करते हैं — यहाँ पेड़ काटना/शिकार प्रायः वर्जित होता है। ये जैव विविधता के समृद्ध भंडार, दुर्लभ/स्थानिक प्रजातियों के आश्रय व पारंपरिक संरक्षण (समुदाय-आधारित) के उदाहरण हैं। भारत में इनके विभिन्न नाम हैं — राजस्थान में 'ओरण/केंकड़ी', मेघालय में 'लॉ किंतांग', केरल में 'कावु', महाराष्ट्र में 'देवराई'। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 2002 के तहत इन्हें 'सामुदायिक रिज़र्व' का दर्जा मिल सकता है। यह जैव विविधता संरक्षण व पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1पवित्र उपवन (sacred groves)।
- 2समुदाय द्वारा पवित्र मानकर संरक्षित वन।
- 3जैव विविधता व स्थानिक प्रजातियों के आश्रय।
- 4राजस्थान — ओरण; केरल — कावु; महाराष्ट्र — देवराई।
- 5सामुदायिक रिज़र्व दर्जा (WLPA 2002)।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
पवित्र उपवन, सामुदायिक संरक्षण व जैव विविधता पर्यावरण में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: पवित्र उपवन — समुदाय-संरक्षित पवित्र वन। राजस्थान — ओरण; केरल — कावु; मेघालय — लॉ किंतांग; महाराष्ट्र — देवराई। सामुदायिक रिज़र्व (WLPA 2002)।