'शांति' विधेयक 2025: परमाणु ऊर्जा में बड़ा सुधार
8 दिसंबर 2025 · Raj Study संपादकीय टीम
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दिसंबर 2025 में संसद में 'सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' यानी शांति विधेयक पेश किया गया, जो परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 और सिविल परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम 2010 की जगह लेगा।
क्या हुआ
विधेयक का मकसद अब तक सरकारी एकाधिकार वाले परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को भारतीय निजी कंपनियों के लिए सरकार के साथ संयुक्त उद्यम के जरिए खोलना है। यह परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को सांविधिक दर्जा देकर उसकी निगरानी क्षमता बढ़ाता है, और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए ऑपरेटर के 'राइट टू रिकोर्स' को हटाकर एक नई नो-फॉल्ट दायित्व व्यवस्था लागू करता है। शिकायत निवारण के लिए एक नई परिषद और दावा आयोग भी बनाए जाएंगे।
मुख्य तथ्य
- 1निजी कंपनियों को सरकार के साथ संयुक्त उद्यम के जरिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति; AERB को सांविधिक दर्जा देकर सुरक्षा निगरानी मजबूत की गई।
- 2दुर्घटना की स्थिति में ऑपरेटर के लिए क्षतिपूर्ति अनिवार्य (नो-फॉल्ट लायबिलिटी) — बड़े रिएक्टरों के लिए अधिकतम ₹3,000 करोड़ तक, उससे अधिक क्षति नए 'न्यूक्लियर लायबिलिटी फंड' से केंद्र वहन करेगा।
- 3भारत की कुल स्थापित परमाणु क्षमता 8,780 मेगावाट है (2024-25 में कुल बिजली उत्पादन का लगभग 3.1%); 'न्यूक्लियर एनर्जी मिशन' के तहत 2047 तक 100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य रखा गया है।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
RAS मुख्य परीक्षा GS-3 (ऊर्जा सुरक्षा) के लिए बेहद महत्वपूर्ण — परमाणु दायित्व कानून में बदलाव, निजीकरण और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर नीति पर विश्लेषणात्मक प्रश्न संभव।
स्थायी GK: भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र अब तक परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 के तहत पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था, जिसे रणनीतिक और सुरक्षा कारणों से निजी भागीदारी से बाहर रखा गया था।