भारत में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि
26 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
चीनी उत्पादन में गिरावट और आपूर्ति-मांग असंतुलन से भारत में कीमतें तेजी से बढ़ीं।
क्या हुआ
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है और सबसे बड़ा उपभोक्ता है। 2025-26 मौसम में प्रारंभिक उत्पादन अनुमान 343 लाख मीट्रिक टन था, लेकिन सरकार ने इसे घटाकर 306 लाख मीट्रिक टन कर दिया। महाराष्ट्र में अत्यधिक वर्षा, लाल सड़न और शीर्ष बेधक रोगों ने गन्ने की पैदावार को प्रभावित किया। दिवाली, ओणम और रक्षा बंधन से पहले त्योहारी मांग में वृद्धि हुई। विश्व बाजार में भी चीनी की कीमतें बढ़ी हैं—जून में 474 डॉलर प्रति टन से अगस्त में 552 डॉलर प्रति टन हो गई। सरकार ने 1 मिलियन टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात और 400 टन का स्टॉक सीमा निर्धारित किया है।
मुख्य तथ्य
- 12025-26 में उत्पादन अनुमान 343 लाख मीट्रिक टन से घटाकर 306 लाख मीट्रिक टन किया गया
- 2अगस्त में खुदरा कीमतें 40% बढ़ीं; विश्व कीमतें जून से अगस्त में 16% ऊपर गईं
- 3महाराष्ट्र में अत्यधिक वर्षा, लाल सड़न रोग और शीर्ष बेधक से नुकसान
- 4सरकार ने 1 मिलियन टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात और 400 टन स्टॉक सीमा लागू की
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
RAS परीक्षा में कृषि मूल्य निर्धारण, खाद्य सुरक्षा और व्यापार नीति का महत्व समझने के लिए महत्वपूर्ण।
स्थायी GK: भारत उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक चीनी का उत्पादन करता है, जिसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु आते हैं।