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राष्ट्रीय · अर्थव्यवस्था

ECMS हेतु सिक्स सिग्मा मानक

31 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

सिक्स सिग्मा — प्रति मिलियन अधिकतम 3.4 दोष (DPMO); ECMS परिव्यय ₹40,000 करोड़ (2026-27 बजट)।

क्या हुआ

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के लिए सिक्स सिग्मा (Six Sigma) मानकों की चर्चा हुई। ECMS भारत में इलेक्ट्रॉनिक घटकों (कैपेसिटर, रेसिस्टर, PCB आदि) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना है, जो आयात निर्भरता घटाती है। सिक्स सिग्मा एक गुणवत्ता प्रबंधन पद्धति है जो प्रक्रिया में दोषों को न्यूनतम (प्रति दस लाख में 3.4 दोष) करने पर केंद्रित है। उच्च गुणवत्ता मानक वैश्विक प्रतिस्पर्धा, निर्यात व विश्वसनीयता के लिए आवश्यक हैं। यह 'मेक इन इंडिया' व इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आत्मनिर्भरता से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1ECMS हेतु सिक्स सिग्मा मानक।
  2. 2ECMS — इलेक्ट्रॉनिक घटकों का घरेलू विनिर्माण।
  3. 3सिक्स सिग्मा — दोष न्यूनतम (3.4/दस लाख)।
  4. 4आयात निर्भरता में कमी; वैश्विक प्रतिस्पर्धा।
  5. 5मेक इन इंडिया; इलेक्ट्रॉनिक्स आत्मनिर्भरता।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

ECMS, सिक्स सिग्मा, PLI व सेमीकंडक्टर मिशन अर्थव्यवस्था में पूछे जाते हैं।

स्थायी GK: ECMS — इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना; MeitY। सिक्स सिग्मा — 3.4 दोष/दस लाख। मेक इन इंडिया; इलेक्ट्रॉनिक्स आत्मनिर्भरता।

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