होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक महत्व
16 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
क्या हुआ
होर्मुज जलडमरूमध्य एक संकरा जलमार्ग है जो अपने सबसे संकरे बिंदु पर लगभग 33 किमी चौड़ा है। यह उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान (मुसंदम प्रायद्वीप) के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है। इसे समुद्री चोकपॉइंट के रूप में वर्गीकृत किया गया है — एक संकरा मार्ग जो अंतर्राष्ट्रीय नौवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ऊर्जा महत्व: प्रतिदिन लगभग 20–21 मिलियन बैरल तेल (वैश्विक तेल खपत का लगभग 20%) इस जलडमरूमध्य से गुजरता है। विश्व की लगभग एक-तिहाई LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस), मुख्यतः कतर से, यहीं से होकर जाती है। सऊदी अरब, UAE, कुवैत, इराक और ईरान प्रमुख निर्यातक देश हैं।
अंतर्राष्ट्रीय कानून: UNCLOS (समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय) के तहत यह जलडमरूमध्य 'ट्रांजिट पैसेज' सिद्धांत के अंतर्गत आता है, जो सभी जहाजों को निर्बाध नौवहन का अधिकार देता है। ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल होने के बावजूद वे इसे कानूनी रूप से बंद नहीं कर सकते।
भू-राजनीतिक तनाव: ईरान ने 2011–12 और 2019–20 में इसे बंद करने की धमकी दी है। बहरीन स्थित अमेरिकी पांचवां बेड़ा इसे खुला रखने के लिए तैनात है। भारत अपनी 60% से अधिक कच्चे तेल की जरूरत खाड़ी देशों से पूरी करता है, इसलिए होर्मुज भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।