जैसलमेर के ऊँटपालक सुमेर सिंह भाटी को ओरण संरक्षण के लिए सम्मान
25 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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देगराय माता ओरण (जैसलमेर) के संरक्षक सुमेर सिंह भाटी रेंजलैंड अवॉर्ड्स 2026 के विजेताओं में शामिल हैं।
क्या हुआ
जैसलमेर के पास स्थित देगराय माता ओरण समुदाय द्वारा संरक्षित एक पवित्र चरागाह है, जो लगभग 10,000 हेक्टेयर में फैला है और लगभग 5,000 पशुपालक परिवार चराई के लिए इस पर निर्भर हैं। भाटी ने इसकी रक्षा के लिए लगभग 20 गाँवों में घर-घर जाकर समर्थन जुटाया। वे ओरण बचाओ पदयात्रा के प्रमुख चेहरे रहे, जो 21 जनवरी से 16 अप्रैल 2026 तक तनोट माता मंदिर से जयपुर तक लगभग 700 किमी की 85 दिन की यात्रा थी। इसकी माँग थी कि 'बंजर' दर्ज भूमि को फिर से ओरण के रूप में दर्ज किया जाए। इन ओरणों में गोडावण और कैराकल जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।
मुख्य तथ्य
- 1देगराय माता ओरण (जैसलमेर) लगभग 10,000 हेक्टेयर में फैला है
- 2ओरण बचाओ पदयात्रा: तनोट माता मंदिर से जयपुर, ~700 किमी, 85 दिन
- 3ओरण की देशी चारा घासें: सेवण और धामण
- 4इन ओरणों में गोडावण और कैराकल पाए जाते हैं
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
प्रारंभिक परीक्षा में पश्चिमी राजस्थान के ओरण, ओरण बचाओ पदयात्रा का मार्ग या 2026 के अंतरराष्ट्रीय वर्ष पर प्रश्न आ सकता है।
स्थायी GK: ओरण स्थानीय देवी-देवताओं को समर्पित पवित्र वन-क्षेत्र हैं, जहाँ पशु चराई की अनुमति है पर पेड़ काटना वर्जित है; संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को अंतरराष्ट्रीय चरागाह एवं पशुपालक वर्ष घोषित किया है।