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राष्ट्रीय · अर्थव्यवस्था

आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और 'चाइना प्लस वन': भारत–चीन व्यापार के आँकड़े

23 सितंबर 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

2025-26: चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार; घाटा 112.16 अरब डॉलर, मुख्यतः औद्योगिक कच्चे माल व पुर्ज़ों के आयात से।

क्या हुआ

'चाइना प्लस वन' वह रणनीति है जिसमें कंपनियाँ किसी एक देश पर निर्भरता घटाने के लिए चीन के अलावा दूसरे देशों में उत्पादन या खरीद केंद्र बनाती हैं; नीति आयोग की अगस्त 2026 की रिपोर्ट भारत को ऐसे गंतव्य के रूप में देखती है। 2025-26 में चीन अमेरिका को पीछे छोड़ भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बना: आयात 131.63 अरब डॉलर, निर्यात 19.47 अरब डॉलर और घाटा 112.16 अरब डॉलर (2024-25 में 99.2 अरब डॉलर)। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार घाटा मुख्यतः कच्चे माल, मध्यवर्ती और पूंजीगत वस्तुओं के आयात से है। घरेलू विनिर्माण बढ़ाने हेतु 14 क्षेत्रों में 1.97 लाख करोड़ रुपये की PLI योजनाएँ चल रही हैं।

मुख्य तथ्य

  1. 12025-26 में भारत–चीन व्यापार 151.1 अरब डॉलर; चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ा
  2. 2चीन से आयात 131.63 अरब डॉलर, निर्यात 19.47 अरब डॉलर (36.66% वृद्धि)
  3. 3व्यापार घाटा 112.16 अरब डॉलर; 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर था
  4. 4PLI: 14 क्षेत्र, 1.97 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

प्रश्न में 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार, चीन से व्यापार घाटे का स्वरूप या PLI योजना के क्षेत्र पूछे जा सकते हैं।

स्थायी GK: उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ 14 प्रमुख क्षेत्रों (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ड्रोन, विशेष इस्पात) में घरेलू विनिर्माण और निर्यात बढ़ाने के लिए हैं; मार्च 2025 तक इनमें लगभग 1.76 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ।

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