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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट में याचिका: जबरन धर्मांतरण को 'आतंकवादी कृत्य' घोषित करने की मांग

17 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

क्या हुआ

अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय, जो संवैधानिक मामलों में कई जनहित याचिकाएं दायर करने के लिए जाने जाते हैं, ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जबरन, धोखाधड़ीपूर्ण और छलपूर्वक धर्मांतरण को भारतीय कानून के तहत 'आतंकवादी कृत्य' घोषित करने की मांग की है। यह याचिका टीसीएस नासिक मामले से जुड़ी है, जिसमें कथित संगठित धर्मांतरण गतिविधियों का खुलासा हुआ था। याचिका में कहा गया है कि ऐसे धर्मांतरण संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन करते हैं और संविधान की मूल संरचना — विशेषकर धर्मनिरपेक्षता और बंधुत्व — को कमजोर करते हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से संसद को एक व्यापक केंद्रीय धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की है। वर्तमान में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित कई राज्यों में अपने धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम हैं। यह याचिका अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और राज्य की धर्मांतरण नियंत्रण शक्ति के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 1977 में रेव. स्टेनिस्लॉस बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले में परखा था।

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