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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला मंदिर प्रवेश मामले और आवश्यक धार्मिक प्रथा सिद्धांत की पुनः समीक्षा करेगा

17 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

क्या हुआ

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सबरीमाला मंदिर प्रवेश मामले की पुनः समीक्षा महत्वपूर्ण संवैधानिक निहितार्थ रखती है। सितंबर 2018 में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 बहुमत से फैसला सुनाया कि केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव निषेध), 17 (अस्पृश्यता उन्मूलन) और 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा एकमात्र असहमत न्यायाधीश थीं। पुनर्विचार याचिकाओं के बाद नौ न्यायाधीशों की बड़ी पीठ गठित की गई। प्रमुख विचाराधीन प्रश्न हैं: (1) आवश्यक धार्मिक प्रथा (ERP) सिद्धांत — न्यायालय तय करता है कि कौन सी प्रथाएं धर्म के लिए अनिवार्य हैं; (2) क्या अय्यप्पा भक्त अनुच्छेद 26 के तहत पृथक 'धार्मिक संप्रदाय' हैं; (3) व्यक्तिगत अधिकारों (अनुच्छेद 14, 15, 25) और सामूहिक अधिकारों (अनुच्छेद 26) के बीच संतुलन; (4) धार्मिक संस्थाओं में सामाजिक सुधार में राज्य की भूमिका। ERP सिद्धांत 1954 के श्री लक्ष्मींद्र तीर्थ स्वामियार मामले से उत्पन्न हुआ। यह मामला मस्जिद और पारसी अग्नि मंदिर प्रवेश विवादों से भी जुड़ा है।

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