सुप्रीम कोर्ट का पश्चिम बंगाल मतदाता सूची विलोपन पर फैसला: मतदान बनाम चुनाव लड़ने का अधिकार
14 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित एक महत्वपूर्ण चुनावी कानून मामले की सुनवाई की। मामले में आरोप था कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा SIR प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर नाम हटाने से वैध मतदाता — विशेषकर अल्पसंख्यक बहुल और विपक्षी क्षेत्रों में — मताधिकार से वंचित हो गए।
न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर स्पष्ट किया: भारत में मतदान का अधिकार संविधान के भाग III के तहत मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 द्वारा शासित एक वैधानिक अधिकार है। इसके विपरीत, चुनाव लड़ने के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक अधिकार माना है, हालांकि यह भी वैधानिक विनियमन के अधीन है।
पीठ ने परीक्षण किया कि क्या ECI ने नाम हटाने से पहले उचित प्रक्रिया — पर्याप्त नोटिस अवधि और आपत्ति का अवसर — का पालन किया। न्यायालय ने जोर दिया कि कोई भी विलोपन जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 22 के अनुरूप होना चाहिए। यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 324–329 (चुनाव), निर्वाचन आयोग की भूमिका और संघवाद की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।