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राष्ट्रीय · पर्यावरण

चावल उत्पादन में स्थिरता प्राप्त करना

6 जनवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

चावल — जल-गहन व मीथेन-उत्सर्जक फसल; सतत तकनीकें — DSR, AWD, SRI।

क्या हुआ

चावल उत्पादन में स्थिरता (sustainability) प्राप्त करने की चर्चा हुई। चावल भारत की प्रमुख खाद्य फसल व मुख्य आहार है, पर इसकी पारंपरिक खेती जल-गहन (1 किग्रा चावल हेतु ~3,000-5,000 लीटर पानी), मीथेन उत्सर्जन (जलमग्न खेतों से) व भूजल दोहन का कारण बनती है। सतत उपायों में शामिल हैं — चावल की प्रत्यक्ष बुवाई (DSR), 'अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राईंग' (AWD), सूक्ष्म सिंचाई, सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन (SRI), कम-अवधि/जलवायु-सहनशील किस्में व फसल विविधीकरण। यह जल सुरक्षा, जलवायु शमन (मीथेन), मृदा स्वास्थ्य व खाद्य सुरक्षा को संतुलित करता है। राजस्थान/पंजाब जैसे जल-दुर्लभ क्षेत्रों में यह विशेष रूप से प्रासंगिक है। यह सतत कृषि से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1चावल उत्पादन में स्थिरता।
  2. 2चावल — जल-गहन; मीथेन उत्सर्जन; भूजल दोहन।
  3. 3उपाय — DSR (प्रत्यक्ष बुवाई), AWD, SRI।
  4. 4जलवायु-सहनशील किस्में; फसल विविधीकरण।
  5. 5जल सुरक्षा व जलवायु शमन का संतुलन।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

चावल उत्पादन, DSR व मीथेन उत्सर्जन पर्यावरण/कृषि में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: चावल — जल-गहन; मीथेन उत्सर्जन। DSR (प्रत्यक्ष बुवाई); AWD; SRI। जलवायु-सहनशील किस्में। फसल विविधीकरण।

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