तमिलनाडु चुनाव: पार्टियों के वादों के बावजूद किसान कृषि के भविष्य को लेकर चिंतित
14 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
क्या हुआ
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दलों ने कृषि क्षेत्र के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है, जिनमें ऋण माफी, इनपुट सब्सिडी, फसल बीमा और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी शामिल हैं। इसके बावजूद, जमीनी स्तर के किसान कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर संशय में हैं। एक प्रमुख संरचनात्मक समस्या पीढ़ीगत बदलाव है — किसान परिवारों के युवा सदस्य रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे खेती बुजुर्ग किसानों पर निर्भर होती जा रही है। तमिलनाडु की कृषि अनियमित मानसून, घटते भूजल स्तर (विशेषकर कावेरी बेसिन में), बढ़ती लागत और खंडित जोत जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। किसानों का कहना है कि योजनाएं अस्थायी राहत देती हैं, लेकिन सिंचाई, उचित मूल्य और कोल्ड चेन जैसी बुनियादी समस्याएं अनसुलझी हैं। यह मुद्दा राजस्थान की कृषि संकट, ग्रामीण-शहरी पलायन, MSP नीति और PM-KISAN जैसे परीक्षा-प्रासंगिक विषयों से सीधे जुड़ता है।