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राष्ट्रीय

उर्दू लेखिका जीलानी बानो को उनकी सामाजिक चेतना और अंतर्राष्ट्रीयता के लिए श्रद्धांजलि

18 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

क्या हुआ

जीलानी बानो (1936–2024) भारत की प्रमुख उर्दू कथा लेखिकाओं में से एक थीं, जो हैदराबाद में रहती थीं। हैदराबाद, तेलंगाना में आयोजित एक स्मृति कार्यक्रम में उनकी साहित्यिक विरासत को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि उनकी कहानियाँ गहरी सामाजिक चेतना और अंतर्राष्ट्रीयता की भावना को दर्शाती थीं। लेखिका वोल्गा और मेहक हैदराबादी ने उनकी रचनाओं के तेलुगु अनुवाद प्रस्तुत किए। बानो को 2012 में उर्दू साहित्य में योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 'आबरू' और 'बारिश-ए-संग' जैसी प्रसिद्ध रचनाएँ लिखीं, जिनमें महिला अधिकार, विभाजन की पीड़ा, सांप्रदायिक सद्भाव और स्वतंत्रता के बाद के भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को उकेरा गया। वे साहित्य अकादमी पुरस्कार की भी प्राप्तकर्ता थीं। उनकी रचनाओं का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ है। RAS परीक्षा की दृष्टि से वे भारतीय साहित्य, सांस्कृतिक विरासत और पुरस्कार अनुभागों में प्रासंगिक हैं।

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