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राष्ट्रीय · अर्थव्यवस्था

कल्याण बनाम विकास

22 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

कल्याण — अल्पकालिक राहत (PDS, DBT); विकास — दीर्घकालिक क्षमता निर्माण (अमर्त्य सेन का क्षमता दृष्टिकोण)।

क्या हुआ

'कल्याण बनाम विकास' (welfare vs development) की बहस चर्चा में रही। कल्याणकारी व्यय (सब्सिडी, मुफ्त सुविधाएँ, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) गरीबी व असमानता को कम करता है, जबकि विकासात्मक/पूँजीगत व्यय (अवसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य) दीर्घकालिक वृद्धि व रोज़गार सृजित करता है। चुनौती सीमित राजकोषीय संसाधनों के बीच संतुलन बनाने की है — अत्यधिक 'रेवड़ी' (मुफ्त उपहार) राजकोषीय बोझ बढ़ा सकती है, जबकि कल्याण की उपेक्षा सामाजिक न्याय को कमज़ोर करती है। आदर्श दृष्टिकोण 'कल्याण को सशक्तीकरण' (सक्षम बनाने वाली योजनाएँ) में बदलना है। यह राज्य नीति के निदेशक तत्वों से भी जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1'कल्याण बनाम विकास' की बहस।
  2. 2कल्याण — गरीबी/असमानता घटाता है।
  3. 3विकास व्यय — दीर्घकालिक वृद्धि व रोज़गार।
  4. 4संतुलन — सीमित राजकोषीय संसाधन; रेवड़ी बहस।
  5. 5आदर्श — 'कल्याण को सशक्तीकरण' में बदलना।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

राजस्व बनाम पूंजीगत व्यय, FRBM व JAM अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: कल्याण व्यय — सब्सिडी, DBT; विकास व्यय — पूँजीगत/अवसंरचना। राजकोषीय घाटा; FRBM अधिनियम। DPSP — राज्य नीति के निदेशक तत्व। रेवड़ी बहस।

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