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राष्ट्रीय · पर्यावरण

असम में शीतकालीन प्रवासी पक्षी

10 जनवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

शीतकालीन प्रवासी पक्षी — मध्य एशिया/साइबेरिया से असम की आर्द्रभूमियों में आते हैं।

क्या हुआ

असम में शीतकालीन प्रवासी पक्षियों की चर्चा हुई। सर्दियों में मध्य एशिया, साइबेरिया, मंगोलिया व तिब्बत के पक्षी ठंड व भोजन की तलाश में लंबी दूरी का प्रवास कर भारत की आर्द्रभूमियों (wetlands) में आते हैं। असम अपनी समृद्ध आर्द्रभूमियों, नदी-तंत्रों व राष्ट्रीय उद्यानों (काज़ीरंगा, माजुली, दीपोर बील — एक रामसर स्थल) के कारण इन प्रवासी पक्षियों (बार-हेडेड गूज़, बत्तखें, सारस, पेलिकन आदि) का एक प्रमुख शीतकालीन आश्रय है। प्रवासी पक्षी आर्द्रभूमि-पारिस्थितिकी के स्वास्थ्य के संकेतक हैं; इनका संरक्षण रामसर कन्वेंशन, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम व CMS से जुड़ा है। यह जैव विविधता, पारिस्थितिकी व आर्द्रभूमि-संरक्षण को रेखांकित करता है। यह पर्यावरण से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1असम में शीतकालीन प्रवासी पक्षी।
  2. 2मध्य एशिया, साइबेरिया, तिब्बत से लंबी दूरी प्रवास।
  3. 3असम — समृद्ध आर्द्रभूमियाँ; दीपोर बील (रामसर)।
  4. 4बार-हेडेड गूज़, बत्तखें, सारस, पेलिकन।
  5. 5रामसर कन्वेंशन; CMS; आर्द्रभूमि-संरक्षण संकेतक।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

प्रवासी पक्षी, आर्द्रभूमि व रामसर स्थल पर्यावरण में पूछे जाते हैं।

स्थायी GK: असम शीतकालीन प्रवासी पक्षी — मध्य एशिया/साइबेरिया से। दीपोर बील (रामसर स्थल); काज़ीरंगा। बार-हेडेड गूज़। रामसर कन्वेंशन; CMS; आर्द्रभूमि-संकेतक।

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