लोक कला एवं संस्कृति
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घूमर नृत्य: राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध लोकनृत्य ("नृत्यों का सिरमौर"); भील जनजाति में उत्पन्न; महिलाओं द्वारा पारंपरिक पोशाक में गोलाकार नृत्य।
- 2
कालबेलिया नृत्य: सपेरा जाति का नृत्य; गुलाबो सपेरा ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई; UNESCO अमूर्त विरासत (2010)।
- 3
भवाई नृत्य: सिर पर कई मटके रखकर किया जाने वाला पेशेवर नृत्य; उदयपुर संभाग (मेवाड़) में प्रचलित।
- 4
तेरहताली नृत्य: 13 मंजीरे शरीर पर बाँधकर; महिलाएं बाबा रामदेव की भक्ति में करती हैं; कामड़ जाति।
- 5
मांड गायन: जैसलमेर-बाड़मेर का शास्त्रीय लोकगीत; गवरी देवी और अल्लाह जिलाई बाई प्रसिद्ध।
- 6
पट्टचित्र और फड़: फड़ चित्रकला में पाबूजी और देवनारायण की कथाएं; जोशी परिवार का पेशा।
- 7
ब्लू पॉटरी (जयपुर): फ़ारस से आई कला; जयपुर में सवाई राम सिंह II के समय फली-फूली; कृपाल सिंह शेखावत प्रसिद्ध कलाकार।
- 8
बगरू और सांगानेर प्रिंट: हाथ से बनाई वस्त्र छपाई; राज्य भर में प्रसिद्ध।
- 9
गोटा पट्टी कढ़ाई: जयपुर व आसपास की पारंपरिक कढ़ाई; लहरिया-ओढ़नी व पोशाकों पर।
- 10
पंचपीर: पाबूजी (कोलू), हड़बूजी, रामदेवजी (रामदेवरा), मांगलिया मेहाजी और गोगाजी (गोगामेड़ी)। अन्य प्रमुख लोक देवता: तेजाजी (परबतसर मेला), देवनारायणजी (आसींद)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
घूमर नृत्य की क्या विशेषता है?+
घूमर राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध लोकनृत्य है, जो भील जनजाति में उत्पन्न हुआ; महिलाएं पारंपरिक पोशाक में गोलाकार घूमते हुए यह नृत्य करती हैं। (राजस्थान से UNESCO अमूर्त विरासत सूची में कालबेलिया नृत्य है, घूमर नहीं।)
कालबेलिया नृत्य को अंतरराष्ट्रीय ख्याति किसने दिलाई?+
सपेरा जाति के कालबेलिया नृत्य को गुलाबो सपेरा ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई; यह 2010 में UNESCO अमूर्त विरासत बना।
राजस्थान के पंचपीर में कौन-कौन से लोक देवता शामिल हैं?+
पंचपीर में पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मांगलिया मेहाजी और गोगाजी शामिल हैं। तेजाजी और देवनारायणजी प्रमुख लोक देवता हैं, पर पंचपीर में नहीं गिने जाते।