राजस्थान की जनजातियाँ
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मीणा जनजाति: राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति (2011 जनगणना); जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली, उदयपुर क्षेत्र में; नाम "मीन" (मत्स्य) से जोड़ा जाता है।
- 2
भील जनजाति: दूसरी सबसे बड़ी जनजाति; उदयपुर, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़ में निवास; बेणेश्वर मेला प्रमुख।
- 3
गरासिया जनजाति: आबू रोड क्षेत्र में; "वालरा" कृषि प्रणाली (झूम खेती); "मोर बांधिया" विवाह प्रथा।
- 4
सहरिया जनजाति: बारां जिले की किशनगंज व शाहबाद तहसीलों में; राजस्थान की एकमात्र आदिम (विशेष रूप से कमज़ोर) जनजाति — PVTG।
- 5
कंजर जनजाति: कोटा, बूंदी, भीलवाड़ा क्षेत्र में; "हाकम राजा का प्याला" पीकर सौगंध लेने की प्रथा प्रसिद्ध।
- 6
घुमंतू समुदाय (अनुसूचित जनजाति सूची में नहीं): कालबेलिया (सपेरे; कालबेलिया नृत्य UNESCO सूची में, 2010), गाडिया लोहार (चित्तौड़ के पतन के बाद घर न बसाने की प्रतिज्ञा से जुड़ी परंपरा), बंजारा (नमक-अनाज के पारंपरिक व्यापारी)।
- 7
रेबारी (राईका): पश्चिमी राजस्थान का पशुपालक (ऊंट-भेड़) समुदाय — यह भी अनुसूचित जनजाति नहीं है।
- 8
अनुसूचित जनजाति की आबादी: राजस्थान में कुल जनसंख्या का लगभग 13.5% (2011)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति कौन सी है?+
2011 की जनगणना के अनुसार मीणा राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है; भील दूसरे स्थान पर है।
राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति (Primitive Tribal Group) कौन सी है?+
सहरिया जनजाति राजस्थान की एकमात्र आदिम (PVTG) जनजाति है, जो मुख्यतः बारां जिले की किशनगंज व शाहबाद तहसीलों में रहती है।
अनुसूचित जनजाति की राजस्थान में कितनी आबादी है?+
2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जनजाति राजस्थान की कुल जनसंख्या का लगभग 13.5% है।