राजस्थानी भाषा एवं साहित्य
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राजस्थानी भाषा: हिंदी की सहोदर भाषा; कोई आधिकारिक दर्जा नहीं (संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं)।
- 2
प्रमुख बोलियाँ: मारवाड़ी (पश्चिम), मेवाड़ी (दक्षिण), ढूंढाड़ी (जयपुर), मेवाती (अलवर), हाड़ौती (कोटा)।
- 3
डिंगल: मध्यकालीन राजस्थानी साहित्य की भाषा; चारण कवियों की भाषा; वीर रस प्रधान।
- 4
पिंगल: ब्रज भाषा का मिश्रण; भाट कवियों की भाषा।
- 5
प्रमुख कवि: पृथ्वीराज राठौड़ ("वेलि क्रिसन रुकमणी री"), चंदबरदाई ("पृथ्वीराज रासो" — पिंगल शैली), मीराबाई (भक्ति)।
- 6
विजयदान देथा (बिज्जी): बोरुंदा (जोधपुर) के लोककथाकार; "बातां री फुलवारी" कहानी-संग्रह।
- 7
राजस्थान साहित्य अकादमी: 1958 में उदयपुर में स्थापित; हिंदी साहित्य के लिए पुरस्कार देती है।
- 8
लोक साहित्य: ढोला-मारू, उजली-जेठवा, मूमल जैसी प्रेम-कथाएं प्रसिद्ध।
- 9
कथावाचन: पड़ वाचन (फड़ चित्रकला के साथ कथा); भोपा जाति करती है।
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राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च पुरस्कार मीरा पुरस्कार है; राजस्थानी भाषा के लिए राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थानी भाषा को संविधान में क्या दर्जा मिला है?+
राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है, यानी इसे कोई आधिकारिक दर्जा नहीं मिला है।
विजयदान देथा किसलिए प्रसिद्ध हैं?+
बोरुंदा (जोधपुर) के विजयदान देथा (बिज्जी) राजस्थानी लोककथाओं को लिखित रूप देने के लिए प्रसिद्ध हैं; उनका "बातां री फुलवारी" कहानी-संग्रह बहुत प्रसिद्ध है।
डिंगल भाषा किसकी भाषा है?+
डिंगल मध्यकालीन राजस्थानी साहित्य और चारण कवियों की भाषा है, जिसमें वीर रस प्रधान है।