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REET Mains · शैक्षिक मनोविज्ञान

शैक्षिक मनोविज्ञान: Mains स्तर की गहन समझ

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REET Pre में पढ़ा गया बाल-विकास व शिक्षाशास्त्र (CDP) आधार भर है — REET Mains में मापन-मूल्यांकन, निर्देशन-परामर्श, समावेशी शिक्षा और सृजनात्मकता जैसे गहन विषयों पर व्यावहारिक समझ अपेक्षित होती है। यह पेज इन्हीं Mains-स्तरीय विषयों को स्पष्ट व लागू करने योग्य भाषा में समझाता है।

  • REET Mains स्तर टॉपिक
  • गहराई: उच्च — Mains-विशिष्ट
  • 14 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: RPWD Act 2016 — 21 disability categories overview

REET Mains में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

इस टॉपिक-सेट के लिए अभी तक कोई सत्यापित पिछले वर्ष का REET Mains प्रश्न उपलब्ध नहीं है, इसलिए हम ईमानदारी से बता रहे हैं कि यह पेज RSSB के पाठ्यक्रम व स्थापित शैक्षिक मनोविज्ञान सिद्धांतों पर आधारित है। REET Pre (BSER) में CDP खंड मुख्यतः बाल-विकास की अवस्थाओं व बुनियादी अधिगम-सिद्धांतों (पियाजे, वाइगोत्स्की, कोहलबर्ग आदि) पर केंद्रित रहता है, जबकि REET Mains (RSSB) में इसी नींव पर व्यावहारिक व अनुप्रयोग-आधारित प्रश्न पूछे जाने की प्रवृत्ति रहती है — जैसे किसी कक्षा-स्थिति में शिक्षक क्या करेगा, या मापन के किसी उपकरण की विश्वसनीयता कैसे जाँची जाएगी। इसलिए यह पेज बुनियादी सिद्धांतों को दोहराने की बजाय उनसे आगे के, Mains-विशिष्ट विषयों पर केंद्रित है।

मापन और मूल्यांकन (Measurement & Evaluation)

शिक्षा में 'मापन' (measurement) का अर्थ है किसी विशेषता (जैसे उपलब्धि, बुद्धि, अभिरुचि) को संख्यात्मक रूप में व्यक्त करना, जबकि 'मूल्यांकन' (evaluation) इससे आगे बढ़कर उस संख्यात्मक जानकारी की व्याख्या कर यह निर्णय लेना है कि छात्र किस स्तर पर है और आगे क्या किया जाना चाहिए — यानी मापन तथ्य देता है, मूल्यांकन निर्णय देता है। किसी भी अच्छे मापन-उपकरण (जैसे टेस्ट) में दो गुण अनिवार्य माने जाते हैं — वैधता (validity: उपकरण वही मापता है जो मापने के लिए बनाया गया) और विश्वसनीयता (reliability: बार-बार प्रयोग करने पर लगभग एक जैसा परिणाम देना)। किसी उपकरण का वैध होना आवश्यक रूप से विश्वसनीय होने का प्रमाण नहीं, परंतु विश्वसनीयता के बिना वैधता संभव नहीं — यह संबंध REET Mains में बार-बार पूछा जाने वाला एक अवधारणात्मक बिंदु है।

निरंतर एवं व्यापक मूल्यांकन (Continuous and Comprehensive Evaluation – CCE) की अवधारणा छात्र के शैक्षणिक (scholastic) व सह-शैक्षणिक (co-scholastic, जैसे व्यवहार, रुचि, सह-पाठ्यचर्या गतिविधियाँ) दोनों पक्षों को नियमित अंतराल पर आकलित करने पर बल देती है, न कि केवल वार्षिक परीक्षा पर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में भी समग्र प्रगति पत्र (holistic progress card) जैसी अवधारणा के माध्यम से बहु-आयामी, निरंतर मूल्यांकन पर ज़ोर दिया गया है, जो पारंपरिक केवल-अंक-आधारित मूल्यांकन से आगे की सोच है।

सृजनात्मकता (Creativity) — प्रमुख सिद्धांत

सिद्धांतकार/अवधारणामुख्य योगदान
जे. पी. गिलफोर्ड (J. P. Guilford)बुद्धि की संरचना (Structure of Intellect) मॉडल में 'अपसारी चिंतन' (divergent thinking) को सृजनात्मकता का केंद्रीय तत्व बताया — यानी एक समस्या के अनेक संभावित हल सोचने की क्षमता।
ई. पी. टोरेंस (E. P. Torrance)टोरेंस टेस्ट ऑफ क्रिएटिव थिंकिंग (TTCT) विकसित किया, जो चार आयामों — प्रवाह (fluency), लचीलापन (flexibility), मौलिकता (originality) और विस्तार (elaboration) — पर सृजनात्मकता मापता है।
सृजनात्मक प्रक्रिया के चरणतैयारी (preparation) → ऊष्मायन (incubation) → अंतर्दृष्टि (illumination) → सत्यापन (verification) — यह चार-चरणीय मॉडल सृजनात्मक समस्या-समाधान की प्रक्रिया को समझाता है।

अभिसारी चिंतन (convergent thinking, एक सही उत्तर तक पहुँचना) और अपसारी चिंतन (divergent thinking, अनेक संभावनाएँ खोजना) के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें — यह परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।

निर्देशन एवं परामर्श (Guidance and Counselling)

निर्देशन (guidance) एक व्यापक, निरंतर व सामान्यतः समूह-स्तरीय प्रक्रिया है जिसमें छात्र को शैक्षिक, व्यावसायिक व व्यक्तिगत निर्णय लेने में सहायता दी जाती है। परामर्श (counselling) इसका अधिक गहन, व्यक्ति-केंद्रित रूप है, जो सामान्यतः किसी विशिष्ट समस्या या भावनात्मक कठिनाई से जूझ रहे छात्र के साथ एक-से-एक (one-to-one) संवाद के माध्यम से किया जाता है। शैक्षिक निर्देशन (विषय-चयन, अध्ययन-आदतें), व्यावसायिक निर्देशन (करियर-चयन) और व्यक्तिगत निर्देशन (सामाजिक-भावनात्मक समायोजन) — ये तीन प्रमुख प्रकार माने जाते हैं। एक कक्षा-शिक्षक प्रायः प्रारंभिक स्तर पर निर्देशन की भूमिका निभाता है, जबकि गहन परामर्श के लिए प्रशिक्षित परामर्शदाता (counsellor) की आवश्यकता होती है — REET Mains में यह भेद स्पष्ट रूप से समझना ज़रूरी है।

समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN)

समावेशी शिक्षा (inclusive education) का सिद्धांत है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children With Special Needs – CWSN) को अलग विशेष विद्यालयों की बजाय सामान्य कक्षा में ही, आवश्यक सहयोग व अनुकूलन के साथ, पढ़ाया जाए। भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPWD Act), 2016 के अंतर्गत कुल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को कानूनी मान्यता दी गई है — जिसमें दृष्टि, श्रवण, चलन (locomotor), बौद्धिक व मानसिक दिव्यांगता सहित विशिष्ट अधिगम अक्षमता (specific learning disability) भी शामिल है। शिक्षक के लिए यह समझना ज़रूरी है कि 'दिव्यांगता' और 'अधिगम अक्षमता' (learning disability) एक जैसे नहीं हैं — अधिगम अक्षमता वाला बच्चा सामान्य या उससे अधिक बुद्धिलब्धि (IQ) रखते हुए भी किसी विशिष्ट कौशल (पढ़ना, लिखना या गणना) में कठिनाई महसूस कर सकता है।

तीन सामान्य अधिगम अक्षमताएँ हैं: डिस्लेक्सिया (dyslexia — पढ़ने में कठिनाई, जैसे अक्षरों को पहचानने या शब्दों को जोड़ने में समस्या), डिस्ग्राफिया (dysgraphia — लिखने में कठिनाई, जैसे अक्षरों की बनावट व क्रम में गड़बड़ी) और डिस्कैल्कुलिया (dyscalculia — गणितीय संक्रियाओं व संख्या-बोध में कठिनाई)। इन बच्चों के लिए सज़ा या आलोचना की बजाय अतिरिक्त समय, बहु-संवेदी (multi-sensory) शिक्षण विधियाँ व व्यक्तिगत ध्यान कारगर मानी जाती हैं।

क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research)

क्रियात्मक अनुसंधान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक स्वयं अपनी कक्षा की किसी व्यावहारिक समस्या (जैसे कुछ छात्रों का गणित में लगातार कमज़ोर प्रदर्शन) की पहचान कर, उसका कारण जाँचकर, एक समाधान लागू करता है, और फिर परिणाम का मूल्यांकन कर आवश्यकतानुसार समाधान में सुधार करता है। इसके सामान्य चरण हैं: समस्या की पहचान → कारणों का विश्लेषण → कार्य-योजना (action plan) बनाना → योजना का क्रियान्वयन → परिणामों का मूल्यांकन → आवश्यकतानुसार पुनः प्रयास। क्रियात्मक अनुसंधान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किसी बड़े, औपचारिक शोध-प्रबंध की तरह नहीं बल्कि शिक्षक के दैनिक कक्षा-अनुभव से सीधे जुड़ा, छोटे स्तर का व्यावहारिक अनुसंधान है — इसलिए इसे 'शिक्षक-शोधकर्ता' (teacher as researcher) की अवधारणा से भी जोड़ा जाता है।

REET Mains में इसका महत्व

ये सभी विषय — मापन-मूल्यांकन, निर्देशन-परामर्श, समावेशी शिक्षा व क्रियात्मक अनुसंधान — REET Mains में इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये सीधे भावी शिक्षक की दैनिक कक्षा-भूमिका से जुड़े हैं, न कि केवल सैद्धांतिक स्मरण से। परीक्षा में अक्सर इन्हें किसी काल्पनिक कक्षा-स्थिति (case-based question) के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जहाँ अभ्यर्थी को सबसे उपयुक्त शिक्षणशास्त्रीय प्रतिक्रिया चुननी होती है — इसलिए केवल परिभाषा रटने की बजाय, हर अवधारणा को 'कक्षा में इसका क्या अर्थ है' के दृष्टिकोण से समझना अधिक कारगर रहता है।

याद रखने की ट्रिक

'निर्देशन बड़ा, परामर्श गहरा' — निर्देशन (guidance) समूह-स्तरीय व व्यापक है, जबकि परामर्श (counselling) व्यक्ति-केंद्रित व गहन है। और तीन 'डिस' याद रखें: डिस्लेक्सिया = पढ़ना, डिस्ग्राफिया = लिखना (ग्राफ = लिखना), डिस्कैल्कुलिया = गणना (कैल्कुलेशन)। अक्षर क्रम 'ल-ग्रा-कै' से जोड़कर याद रखें — पढ़ना, लिखना, फिर गणना।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

मापन (measurement) और मूल्यांकन (evaluation) के बारे में कौन-सा कथन सही है?

  1. Aदोनों बिल्कुल समान हैं
  2. Bमापन संख्यात्मक तथ्य देता है, मूल्यांकन उस पर आधारित निर्णय देता है
  3. Cमूल्यांकन केवल मापन से पहले होता है
  4. Dमापन का शिक्षा में कोई उपयोग नहीं है

व्याख्या

मापन किसी विशेषता को संख्यात्मक रूप में व्यक्त करता है, जबकि मूल्यांकन उस जानकारी की व्याख्या कर निर्णय लेने की प्रक्रिया है — इस तरह मूल्यांकन मापन पर आधारित लेकिन उससे आगे की प्रक्रिया है।

प्रश्न 2

किसी टेस्ट के 'विश्वसनीयता' (reliability) गुण का क्या अर्थ है?

  1. Aटेस्ट सही चीज़ मापता है
  2. Bबार-बार प्रयोग करने पर टेस्ट लगभग एक जैसा परिणाम देता है
  3. Cटेस्ट बहुत महंगा है
  4. Dटेस्ट में बहुत सारे प्रश्न हैं

व्याख्या

विश्वसनीयता (reliability) का अर्थ है कि टेस्ट को बार-बार प्रयोग करने पर लगभग समान परिणाम मिलते हैं; यह वैधता (validity) से अलग गुण है।

प्रश्न 3

टोरेंस टेस्ट ऑफ क्रिएटिव थिंकिंग (TTCT) सृजनात्मकता को किन आयामों पर मापता है?

  1. Aकेवल बुद्धिलब्धि (IQ)
  2. Bप्रवाह, लचीलापन, मौलिकता और विस्तार
  3. Cकेवल स्मृति-क्षमता
  4. Dकेवल शारीरिक क्षमता

व्याख्या

टोरेंस टेस्ट ऑफ क्रिएटिव थिंकिंग सृजनात्मकता को चार आयामों — प्रवाह (fluency), लचीलापन (flexibility), मौलिकता (originality) और विस्तार (elaboration) — पर मापता है।

प्रश्न 4

अपसारी चिंतन (divergent thinking) किससे सबसे अधिक जुड़ा माना जाता है?

  1. Aएक ही सही उत्तर खोजने से
  2. Bकिसी समस्या के अनेक संभावित हल सोचने से
  3. Cकेवल तथ्य याद रखने से
  4. Dपरीक्षा में नकल करने से

व्याख्या

गिलफोर्ड के अनुसार अपसारी चिंतन (divergent thinking) — किसी समस्या के अनेक संभावित हल सोचने की क्षमता — सृजनात्मकता का केंद्रीय तत्व है।

प्रश्न 5

एक छात्र सामान्य बुद्धि रखता है परंतु शब्दों को पढ़ने व पहचानने में लगातार कठिनाई महसूस करता है। यह किस अधिगम अक्षमता का संकेत हो सकता है?

  1. Aडिस्कैल्कुलिया
  2. Bडिस्ग्राफिया
  3. Cडिस्लेक्सिया
  4. Dबौद्धिक दिव्यांगता

व्याख्या

डिस्लेक्सिया पढ़ने से संबंधित अधिगम अक्षमता है, जिसमें बच्चा सामान्य या उससे अधिक बुद्धिलब्धि रखते हुए भी शब्दों को पढ़ने-पहचानने में कठिनाई महसूस करता है।

प्रश्न 6

RPWD Act, 2016 के अंतर्गत भारत में कुल कितनी दिव्यांगताओं को कानूनी मान्यता प्राप्त है?

  1. A7
  2. B12
  3. C21
  4. D30

व्याख्या

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPWD Act), 2016 के अंतर्गत कुल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को कानूनी मान्यता दी गई है।

प्रश्न 7

क्रियात्मक अनुसंधान (action research) का सबसे पहला चरण क्या होता है?

  1. Aपरिणामों का मूल्यांकन
  2. Bसमस्या की पहचान
  3. Cकार्य-योजना का क्रियान्वयन
  4. Dअंतिम रिपोर्ट लिखना

व्याख्या

क्रियात्मक अनुसंधान का पहला चरण समस्या की पहचान है, इसके बाद कारणों का विश्लेषण, कार्य-योजना, क्रियान्वयन व मूल्यांकन के चरण आते हैं।

प्रश्न 8

एक शिक्षक पाता है कि कक्षा के कुछ छात्र गणित में लगातार कमज़ोर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस समस्या को हल करने के लिए सबसे उपयुक्त शिक्षणशास्त्रीय दृष्टिकोण क्या होगा?

  1. Aछात्रों को कमज़ोर घोषित कर आगे ध्यान न देना
  2. Bएक छोटा क्रियात्मक अनुसंधान करना — कारण जाँचना, समाधान लागू करना, फिर परिणाम देखना
  3. Cपूरी कक्षा को दंडित करना
  4. Dअभिभावकों को दोष देना और कुछ न करना

व्याख्या

ऐसी व्यावहारिक कक्षा-समस्याओं के लिए क्रियात्मक अनुसंधान की प्रक्रिया (कारण-विश्लेषण, समाधान-क्रियान्वयन, मूल्यांकन) सबसे उपयुक्त व सीधे लागू होने वाला दृष्टिकोण है।

प्रश्न 9

निरंतर एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) की अवधारणा किस पर बल देती है?

  1. Aकेवल वार्षिक परीक्षा के अंकों पर
  2. Bछात्र के शैक्षणिक व सह-शैक्षणिक दोनों पक्षों के नियमित मूल्यांकन पर
  3. Cकेवल खेल-कूद गतिविधियों पर
  4. Dकेवल लिखित परीक्षा पर

व्याख्या

CCE छात्र के शैक्षणिक (scholastic) व सह-शैक्षणिक (co-scholastic) दोनों पक्षों को नियमित अंतराल पर आकलित करने पर बल देती है, न कि केवल वार्षिक परीक्षा पर।

प्रश्न 10

अधिगम अक्षमता (learning disability) वाले बच्चे के बारे में कौन-सा कथन सही है?

  1. Aउसकी बुद्धिलब्धि (IQ) हमेशा औसत से कम होती है
  2. Bवह सामान्य या उससे अधिक बुद्धिलब्धि रखते हुए भी किसी विशिष्ट कौशल में कठिनाई महसूस कर सकता है
  3. Cउसे विद्यालय भेजना उचित नहीं है
  4. Dउसे अतिरिक्त समय या सहयोग की कोई ज़रूरत नहीं होती

व्याख्या

अधिगम अक्षमता वाला बच्चा सामान्य या उससे अधिक बुद्धिलब्धि रखते हुए भी पढ़ने, लिखने या गणना जैसे किसी विशिष्ट कौशल में कठिनाई महसूस कर सकता है और उसे अतिरिक्त समय व सहयोग से लाभ होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मापन (measurement) और मूल्यांकन (evaluation) में क्या अंतर है?+

मापन किसी विशेषता को संख्यात्मक रूप में व्यक्त करना है (जैसे टेस्ट में अंक), जबकि मूल्यांकन उस संख्यात्मक जानकारी की व्याख्या कर निर्णय लेना है (जैसे छात्र को अतिरिक्त सहयोग चाहिए या नहीं)।

निर्देशन और परामर्श में क्या अंतर है?+

निर्देशन एक व्यापक, सामान्यतः समूह-स्तरीय प्रक्रिया है, जबकि परामर्श अधिक गहन, व्यक्ति-केंद्रित प्रक्रिया है जो किसी विशिष्ट समस्या पर एक-से-एक संवाद से की जाती है।

RPWD Act 2016 के अंतर्गत कितने प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता दी गई है?+

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPWD Act), 2016 के अंतर्गत कुल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को कानूनी मान्यता दी गई है, जिसमें विशिष्ट अधिगम अक्षमता भी शामिल है।

डिस्लेक्सिया, डिस्ग्राफिया और डिस्कैल्कुलिया में क्या अंतर है?+

डिस्लेक्सिया पढ़ने में कठिनाई है, डिस्ग्राफिया लिखने में कठिनाई है, और डिस्कैल्कुलिया गणितीय संक्रियाओं में कठिनाई है — तीनों अलग-अलग विशिष्ट अधिगम अक्षमताएँ हैं।

क्रियात्मक अनुसंधान (action research) एक सामान्य शोध से किस प्रकार अलग है?+

क्रियात्मक अनुसंधान शिक्षक द्वारा अपनी ही कक्षा की व्यावहारिक समस्या पर किया गया छोटे स्तर का, तत्काल लागू होने वाला अनुसंधान है, जबकि सामान्य शोध अधिक औपचारिक व व्यापक स्तर पर होता है।

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आधिकारिक स्रोत

  1. RPWD Act 2016 — 21 disability categories overview
  2. Defining Dyslexia, Dysgraphia and Dyscalculia — ResearchGate

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए