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REET Mains · राजस्थान GK

प्रजामंडल आंदोलन — REET Mains नोट्स

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प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान की देशी रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना हेतु चला आंदोलन था, जिसने आगे चलकर स्वतंत्र राजस्थान के प्रारंभिक राजनीतिक नेतृत्व को जन्म दिया। REET Mains में रियासत-प्रजामंडल-नेता व स्थापना वर्ष के सुमेलन नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

  • REET Mains राजस्थान GK
  • आधुनिक इतिहास — रियासतकालीन राजनीति
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Hiralal Shastri — general reference

REET Mains में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET Mains, RSSB द्वारा आयोजित मेरिट-आधारित भर्ती परीक्षा है और यह BSER की पात्रता परीक्षा REET से भिन्न है। इसके राजस्थान GK खंड में प्रजामंडल आंदोलन से जुड़े प्रश्न मुख्यतः 'रियासत-प्रजामंडल-नेता-स्थापना वर्ष' सुमेलन पर केंद्रित रहते हैं। इस टॉपिक पर अभी कोई आधिकारिक PYQ उपलब्ध नहीं है (0 प्रश्न), अतः यह पेज मानक ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है।

प्रजामंडल आंदोलन क्या था?

प्रजामंडल राजस्थान की विभिन्न देशी रियासतों में गठित वे संगठन थे जिन्होंने रियासती शासकों से उत्तरदायी शासन (responsible government), नागरिक स्वतंत्रता व प्रशासनिक सुधार की मांग की। यह आंदोलन अखिल भारतीय स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (All India States' Peoples' Conference — जिसकी स्थापना 1927 में हुई थी) से प्रेरित व वैचारिक रूप से जुड़ा हुआ था, जिसकी अध्यक्षता 1939 के लुधियाना अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

उस दौर में राजस्थान लगभग बीस से अधिक छोटी-बड़ी देशी रियासतों में बँटा हुआ था, और हर रियासत में शासन व्यवस्था अलग-अलग थी। प्रजामंडल संगठनों ने पहली बार इन बिखरी हुई रियासतों की प्रजा को एक समान राजनीतिक उद्देश्य — उत्तरदायी व जन-केंद्रित शासन — के इर्द-गिर्द संगठित करने का प्रयास किया।

प्रजामंडल आंदोलन की एक विशेषता यह रही कि इसने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के व्यापक स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरणा तो ली, परन्तु रियासती दौर की विशिष्ट परिस्थितियों (जैसे रियासती शासकों की निरंकुश सत्ता) के अनुरूप अपनी अलग रणनीति भी अपनाई। दोनों आंदोलन उत्तरदायी व जन-केंद्रित शासन की मांग करते थे तथा अधिकांशतः सत्याग्रह, सभाओं व प्रेस जैसे अहिंसक माध्यमों का उपयोग करते थे, यद्यपि प्रजामंडल विशेष रूप से रियासती शासकों के विरुद्ध केंद्रित था। प्रत्येक रियासत का प्रजामंडल स्थानीय परिस्थितियों — जैसे शासक का रवैया, प्रशासनिक ढांचा व स्थानीय नेतृत्व की उपलब्धता — के अनुसार अलग गति से विकसित हुआ, इसी कारण अलग-अलग रियासतों में इनकी स्थापना के वर्षों में भी अंतर देखा जाता है।

प्रमुख रियासतों के प्रजामंडल — स्थापना व नेतृत्व

रियासतस्थापना वर्ष (लगभग)प्रमुख नेतृत्व
जयपुर प्रजामंडल1931हीरालाल शास्त्री (प्रमुख नेतृत्व), जमनालाल बजाज (प्रारंभिक सहयोग)
मारवाड़ (जोधपुर) प्रजामंडल1934जयनारायण व्यास
बीकानेर प्रजामंडल1936मघाराम वैद्य, रघुवरदयाल गोयल
मेवाड़ (उदयपुर) प्रजामंडल1938माणिक्य लाल वर्मा, बलवंत सिंह मेहता
कोटा राज्य प्रजामंडल1939नयनूराम शर्मा, अभिन्न हरि

स्थापना वर्ष कई सन्दर्भ-स्रोतों में समान रूप से बढ़ते क्रम में दर्ज हैं — जयपुर सबसे पहला व कोटा सबसे बाद का प्रजामंडल माना जाता है। इनके अतिरिक्त अलवर, भरतपुर व करौली जैसी छोटी रियासतों में भी बाद के वर्षों में प्रजामंडल संगठन बने, यद्यपि उनकी स्थापना-तिथियों व नेतृत्व पर सन्दर्भ-स्रोतों में मतभेद है।

प्रमुख तथ्य

अखिल भारतीय स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (AISPC)
स्थापना 1927 में हुई; रियासतों में उत्तरदायी शासन हेतु समन्वयकारी अखिल भारतीय मंच था। 1939 के लुधियाना अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू इसके अध्यक्ष बने, जिससे रियासती जन-आंदोलनों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता व नेतृत्व-समर्थन मिला।
हीरालाल शास्त्री
जयपुर प्रजामंडल के प्रमुख नेता; मार्च 1948 में जयपुर रियासत में उत्तरदायी सरकार बनने पर प्रधानमंत्री बने, और 1949 में एकीकृत राजस्थान राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बने।
जयनारायण व्यास
मारवाड़ (जोधपुर) प्रजामंडल के प्रमुख नेता; स्वतंत्रता के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे।
माणिक्य लाल वर्मा
मेवाड़ प्रजामंडल के प्रमुख नेता; उन्होंने बिजोलिया किसान आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।
बलवंत सिंह मेहता
मेवाड़ प्रजामंडल के सह-नेता; स्वतंत्रता के बाद पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रहे।
मघाराम वैद्य व रघुवरदयाल गोयल
बीकानेर प्रजामंडल के प्रमुख नेता, जिन्होंने बीकानेर रियासत में उत्तरदायी शासन की मांग को संगठित रूप दिया।
नयनूराम शर्मा व अभिन्न हरि
कोटा राज्य प्रजामंडल (स्थापना 1939) के प्रमुख नेता, जिन्होंने हाड़ौती क्षेत्र में उत्तरदायी शासन की मांग को गति दी।

प्रजामंडलों के सामने आई चुनौतियाँ

अधिकांश रियासती शासकों ने प्रारंभ में प्रजामंडल संगठनों को असंतोष व विद्रोह के रूप में देखा और कई बार इन पर प्रतिबंध भी लगाया गया। कई प्रजामंडल नेताओं को जेल भेजा गया व सभाओं पर पाबंदी लगाई गई, फिर भी यह आंदोलन धीरे-धीरे मजबूत होता गया और अंततः रियासतों में सीमित प्रशासनिक सुधार स्वीकार किए गए।

1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद जब रियासतों का भारतीय संघ में विलय व एकीकरण हुआ, तो प्रजामंडल आंदोलन की मांगें काफी हद तक पूरी हुईं और लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था स्थापित हो सकी। राजस्थान का एकीकरण भी कई चरणों में हुआ, जिसमें प्रजामंडल नेताओं ने रियासतों को एक राज्य में मिलाने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई।

उद्देश्य व स्वतंत्रता-पश्चात भूमिका

प्रजामंडलों की मुख्य मांगें उत्तरदायी शासन, प्रेस व सभा की स्वतंत्रता, तथा प्रजा पर से मनमाने करों को हटाना थीं — ये मांगें बिजोलिया जैसे पूर्ववर्ती किसान आंदोलनों की भावना से भी जुड़ी थीं। कई प्रजामंडल नेताओं ने पहले किसान आंदोलनों में भी भाग लिया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रियासती दौर के जन-आंदोलन आपस में वैचारिक रूप से जुड़े हुए थे।

स्वतंत्रता के बाद इन्हीं प्रजामंडल नेताओं में से कई रियासतों के एकीकरण के बाद बने राजस्थान राज्य के प्रारंभिक मुख्यमंत्री व मंत्री बने — उदाहरण के लिए हीरालाल शास्त्री एकीकृत राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री (1949) बने, जबकि जयनारायण व्यास व माणिक्य लाल वर्मा जैसे नेता भी आगे चलकर राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। इस प्रकार प्रजामंडल आंदोलन न केवल रियासती दौर का जन-आंदोलन था, बल्कि स्वतंत्र राजस्थान के राजनीतिक नेतृत्व की नर्सरी भी साबित हुआ। भावी शिक्षकों के लिए यह इतिहास इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि यह दर्शाता है कि किस प्रकार स्थानीय जन-आंदोलनों से निकला नेतृत्व आगे चलकर राज्य-निर्माण व लोकतांत्रिक संस्थाओं के विकास में योगदान दे सकता है।

REET Mains में इसका महत्व

इस टॉपिक में रियासत-प्रजामंडल-नेता के सुमेलन के साथ-साथ स्थापना वर्षों का बढ़ता क्रम भी पूछा जा सकता है। सबसे आम गलती यह होती है कि उम्मीदवार किसी नेता को गलत रियासत से जोड़ देते हैं (जैसे जयनारायण व्यास को मारवाड़ की बजाय किसी और रियासत से) — इसलिए हर नेता को केवल एक ही रियासत से जोड़कर याद रखें।

याद रखने की ट्रिक

स्थापना-वर्षों का बढ़ता क्रम याद रखें — 'जयपुर(1931) → मारवाड़(1934) → बीकानेर(1936) → मेवाड़(1938) → कोटा(1939)' — यानी 'ज-म-बी-मे-को' क्रम में हर रियासत में 2-3 वर्ष का अंतर है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

राजस्थान का पहला प्रजामंडल किस रियासत में स्थापित हुआ था?

  1. Aमारवाड़
  2. Bजयपुर
  3. Cबीकानेर
  4. Dमेवाड़

व्याख्या

जयपुर प्रजामंडल 1931 में स्थापित हुआ और इसे राजस्थान का पहला प्रजामंडल माना जाता है।

प्रश्न 2

मारवाड़ (जोधपुर) प्रजामंडल के प्रमुख नेता कौन थे?

  1. Aहीरालाल शास्त्री
  2. Bमाणिक्य लाल वर्मा
  3. Cजयनारायण व्यास
  4. Dनयनूराम शर्मा

व्याख्या

जयनारायण व्यास मारवाड़ (जोधपुर) प्रजामंडल के प्रमुख नेता थे और स्वतंत्रता के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे।

प्रश्न 3

हीरालाल शास्त्री एकीकृत राजस्थान राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री कब बने?

  1. A1947
  2. B1948
  3. C1949
  4. D1951

व्याख्या

जयपुर प्रजामंडल के नेता हीरालाल शास्त्री 1949 में एकीकृत राजस्थान राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बने।

प्रश्न 4

मेवाड़ (उदयपुर) प्रजामंडल का नेतृत्व मुख्यतः किन्होंने किया?

  1. Aमाणिक्य लाल वर्मा व बलवंत सिंह मेहता
  2. Bजयनारायण व्यास व मघाराम वैद्य
  3. Cनयनूराम शर्मा व अभिन्न हरि
  4. Dहीरालाल शास्त्री व जमनालाल बजाज

व्याख्या

मेवाड़ (उदयपुर) प्रजामंडल का नेतृत्व मुख्यतः माणिक्य लाल वर्मा व बलवंत सिंह मेहता ने किया।

प्रश्न 5

अखिल भारतीय स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (AISPC) की स्थापना किस वर्ष हुई?

  1. A1920
  2. B1927
  3. C1931
  4. D1939

व्याख्या

AISPC की स्थापना 1927 में हुई थी; इसकी अध्यक्षता 1939 के लुधियाना अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

प्रश्न 6

कोटा राज्य प्रजामंडल की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

  1. A1931
  2. B1934
  3. C1938
  4. D1939

व्याख्या

कोटा राज्य प्रजामंडल 1939 में स्थापित हुआ था और नयनूराम शर्मा व अभिन्न हरि इसके प्रमुख नेता रहे।

प्रश्न 7

बीकानेर प्रजामंडल के प्रमुख नेताओं में किसका नाम आता है?

  1. Aमघाराम वैद्य
  2. Bजयनारायण व्यास
  3. Cबलवंत सिंह मेहता
  4. Dनयनूराम शर्मा

व्याख्या

बीकानेर प्रजामंडल (स्थापना 1936) के प्रमुख नेताओं में मघाराम वैद्य व रघुवरदयाल गोयल का नाम आता है।

प्रश्न 8

प्रजामंडल आंदोलन मुख्यतः किस अखिल भारतीय संगठन से वैचारिक रूप से जुड़ा था?

  1. Aभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस केवल
  2. Bअखिल भारतीय स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (AISPC)
  3. Cमुस्लिम लीग
  4. Dगदर पार्टी

व्याख्या

प्रजामंडल आंदोलन अखिल भारतीय स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (AISPC) से प्रेरित व वैचारिक रूप से जुड़ा हुआ था, जो देशी रियासतों में उत्तरदायी शासन की मांग करता था।

प्रश्न 9

प्रजामंडलों की स्थापना-वर्षों का सही बढ़ता क्रम कौन-सा है?

  1. Aजयपुर → मारवाड़ → बीकानेर → मेवाड़ → कोटा
  2. Bकोटा → मेवाड़ → बीकानेर → मारवाड़ → जयपुर
  3. Cमारवाड़ → जयपुर → मेवाड़ → बीकानेर → कोटा
  4. Dबीकानेर → जयपुर → कोटा → मारवाड़ → मेवाड़

व्याख्या

मानक सन्दर्भों के अनुसार स्थापना का बढ़ता क्रम है: जयपुर (1931) → मारवाड़ (1934) → बीकानेर (1936) → मेवाड़ (1938) → कोटा (1939)।

प्रश्न 10

प्रजामंडल आंदोलन की प्रमुख मांगों में क्या शामिल नहीं था?

  1. Aउत्तरदायी शासन की स्थापना
  2. Bप्रेस व सभा की स्वतंत्रता
  3. Cमनमाने करों को समाप्त करना
  4. Dरियासतों का ब्रिटिश शासन में विलय

व्याख्या

प्रजामंडल उत्तरदायी शासन, नागरिक स्वतंत्रता व कर-सुधार की मांग करते थे, न कि रियासतों को ब्रिटिश शासन में मिलाने की — यह मांग उनके उद्देश्य के विपरीत थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान का पहला प्रजामंडल कौन-सा माना जाता है?+

जयपुर प्रजामंडल (1931 में स्थापित) को राजस्थान का पहला प्रजामंडल माना जाता है।

प्रजामंडल आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?+

प्रजामंडल आंदोलन का मुख्य उद्देश्य देशी रियासतों में उत्तरदायी शासन, नागरिक स्वतंत्रता व प्रशासनिक सुधार की स्थापना करना था।

हीरालाल शास्त्री कौन थे?+

हीरालाल शास्त्री जयपुर प्रजामंडल के प्रमुख नेता थे, जो बाद में जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री (1948) व एकीकृत राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री (1949) बने।

अखिल भारतीय स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (AISPC) की स्थापना कब हुई?+

AISPC की स्थापना 1927 में हुई थी और यह देशी रियासतों में उत्तरदायी शासन हेतु समन्वयकारी अखिल भारतीय मंच था।

मेवाड़ प्रजामंडल के प्रमुख नेता कौन थे?+

मेवाड़ (उदयपुर) प्रजामंडल के प्रमुख नेता माणिक्य लाल वर्मा व बलवंत सिंह मेहता थे; इसकी स्थापना 1938 में हुई थी।

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आधिकारिक स्रोत

  1. Hiralal Shastri — general reference

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए