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REET Mains · राजस्थान GK

राजस्थान के किसान आंदोलन — REET Mains नोट्स

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20वीं सदी की शुरुआत में राजस्थान की देशी रियासतों में भारी लगान, बेगार व मनमाने करों के विरुद्ध कई किसान आंदोलन हुए, जिनमें बिजोलिया आंदोलन सबसे लंबा व प्रभावशाली रहा। REET Mains में इन आंदोलनों के नेता, क्षेत्र व कालखंड से जुड़े तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • REET Mains राजस्थान GK
  • आधुनिक इतिहास — किसान आंदोलन
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Bijolia movement — general reference

REET Mains में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET Mains, जो RSSB द्वारा आयोजित एक मेरिट-आधारित भर्ती परीक्षा है और BSER की पात्रता परीक्षा REET से अलग है, के राजस्थान GK खंड में किसान आंदोलनों से जुड़े प्रश्न आमतौर पर 'आंदोलन-नेता' या 'आंदोलन-रियासत/क्षेत्र' सुमेलन के रूप में पूछे जाते हैं। इस टॉपिक पर अभी कोई आधिकारिक PYQ उपलब्ध नहीं है (0 प्रश्न), इसलिए यह पेज सुस्थापित ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है।

किसान आंदोलनों की पृष्ठभूमि

राजस्थान की देशी रियासतों में जागीरदारी व्यवस्था के अंतर्गत किसानों पर भारी लगान, लाग-बाग (अतिरिक्त कर) व बेगार (बिना पारिश्रमिक जबरन श्रम) का बोझ था। जागीरदार अपनी भूमि पर काम करने वाले किसानों से मनमाने ढंग से कर वसूलते थे, और इनकार करने पर भूमि से बेदखली या अन्य दंड की धमकी दी जाती थी।

20वीं सदी की शुरुआत से ही किसान इन शोषणकारी प्रथाओं के विरुद्ध संगठित होने लगे, और इन्हीं आंदोलनों ने आगे चलकर राजस्थान में जन-जागरण व प्रजामंडल आंदोलनों की ज़मीन भी तैयार की। इन आंदोलनों में किसान पंचायतों व सभाओं का गठन कर सामूहिक रूप से अपनी मांगें रखी गईं, जो उस दौर के लिए एक नई राजनीतिक चेतना का प्रतीक था।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंदोलन रियासती शासकों के विरुद्ध सीधे विद्रोह नहीं, बल्कि शोषणकारी जागीरदारी प्रथाओं में सुधार की मांग थे — अधिकांश आंदोलनों में सत्याग्रह व असहयोग जैसी अहिंसक पद्धतियाँ अपनाई गईं।

प्रमुख किसान आंदोलन — क्षेत्र, नेतृत्व व कालखंड

आंदोलनरियासत/क्षेत्रप्रमुख नेतृत्वकालखंड
बिजोलिया किसान आंदोलनमेवाड़ रियासत (वर्तमान भीलवाड़ा जिला)साधु सीतारामदास (प्रारंभिक), विजय सिंह पथिक (1916 से)1897–1941
बेगूं किसान आंदोलनमेवाड़ रियासत (चित्तौड़गढ़ क्षेत्र)विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी1921 से
मेवात किसान आंदोलनअलवर-भरतपुर क्षेत्र (मेवात)स्थानीय मेव किसान नेतृत्वलगभग 1920–1933
शेखावाटी व मारवाड़ किसान आंदोलनशेखावाटी व मारवाड़ क्षेत्रस्थानीय किसान सभाओं का नेतृत्व1920–30 का दशक

बिजोलिया आंदोलन — भारत के सबसे लंबे किसान आंदोलनों में एक

बिजोलिया आंदोलन 1897 में मेवाड़ रियासत के बिजोलिया ठिकाने (वर्तमान भीलवाड़ा जिला) में शुरू हुआ। प्रारंभिक चरण में साधु सीतारामदास ने किसानों को संगठित कर उनकी शिकायतें दरबार तक पहुँचाईं — उन्होंने गांव-गांव घूमकर किसानों में जागरूकता फैलाई व उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सचेत किया। 1916 के बाद विजय सिंह पथिक (मूल नाम भूप सिंह) के नेतृत्व में यह आंदोलन अधिक संगठित व व्यापक रूप ले सका, और लाग-बाग तथा बेगार-विरोधी मांगों के साथ 1941 तक चलता रहा — यह इसे भारत के सबसे लंबे चले किसान आंदोलनों में से एक बनाता है।

बेगूं आंदोलन 1921 में मेवाड़ रियासत के चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में विजय सिंह पथिक व रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में शुरू हुआ और लगान-विरोधी मांगों पर केंद्रित रहा।

प्रमुख शब्दावली

लाग-बाग
नियमित लगान के अतिरिक्त जागीरदारों द्वारा वसूले जाने वाले विविध व मनमाने कर।
बेगार
बिना किसी पारिश्रमिक के जागीरदार/शासक के लिए जबरन श्रम करवाने की प्रथा।
विजय सिंह पथिक
राजस्थान में किसान आंदोलन के अग्रणी नेता माने जाते हैं; बिजोलिया व बेगूं दोनों आंदोलनों से जुड़े रहे। उनका मूल नाम भूप सिंह था और स्वतंत्रता संग्राम की व्यापक गतिविधियों से भी उनका जुड़ाव रहा।
रामनारायण चौधरी
बेगूं किसान आंदोलन में विजय सिंह पथिक के साथ सह-नेतृत्वकर्ता रहे।
मीणा-भील जनजातीय असंतोष
किसान आंदोलनों के समानांतर राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों (जैसे भीलों में) भी रियासती करों व वन-अधिकारों को लेकर असंतोष व स्थानीय विरोध के स्वर उठते रहे।
किसान पंचायत
बिजोलिया आंदोलन में किसानों ने अपनी मांगें सामूहिक रूप से रखने हेतु 'किसान पंचायत' जैसे स्थानीय संगठनों का गठन किया, जो उस दौर के लिए एक नई संगठनात्मक पहल थी।
बेगूं किसान आंदोलन का वर्ष
बेगूं किसान आंदोलन 1921 में शुरू हुआ और मेवाड़ रियासत के चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में लगान-विरोधी मांगों पर केंद्रित रहा।

किसान आंदोलनों का व्यापक प्रभाव

बिजोलिया व बेगूं जैसे आंदोलनों की सफलता ने राजस्थान के अन्य क्षेत्रों — शेखावाटी, मेवात व मारवाड़ — के किसानों को भी संगठित होने के लिए प्रेरित किया। इन आंदोलनों में स्थानीय किसान सभाओं का गठन कर जागीरदारों के विरुद्ध सामूहिक असहयोग (जैसे 'नो-टैक्स' अभियान व भूमि खाली छोड़ना) की रणनीति अपनाई गई।

इन आंदोलनों का दीर्घकालिक प्रभाव यह रहा कि रियासती शासकों को किसानों की मांगों पर आंशिक रूप से समझौता करना पड़ा, और साथ ही इन्होंने राजस्थान में राष्ट्रीय आंदोलन व उत्तरदायी शासन की मांग को भी गति दी। किसान आंदोलनों में मिली संगठनात्मक सीख — जैसे पंचायतों व सभाओं के माध्यम से सामूहिक मांग रखना — आगे चलकर प्रजामंडल आंदोलनों की रणनीति में भी अपनाई गई।

इन आंदोलनों ने आम जनता में यह विश्वास भी पैदा किया कि संगठित व अहिंसक विरोध से सत्ता-प्रतिष्ठान पर दबाव बनाया जा सकता है, जो बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में भारत के व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन की भावना से भी मेल खाता था।

आज इतिहासकार बिजोलिया आंदोलन को भारत के कृषक-आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय मानते हैं, क्योंकि इसने दिखाया कि किस प्रकार लंबे समय तक चला व्यवस्थित जन-आंदोलन सामंती व्यवस्था को भी झुकने पर मजबूर कर सकता है। भावी शिक्षकों के लिए यह टॉपिक इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि सामाजिक अध्ययन के पाठ्यक्रम में आधुनिक भारत के जन-आंदोलनों की चर्चा करते समय राजस्थान के इन स्थानीय उदाहरणों से विद्यार्थियों को जोड़ा जा सकता है।

REET Mains में इसका महत्व

इस टॉपिक में सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य 'आंदोलन-नेता-रियासत' का सुमेलन है। बिजोलिया आंदोलन की अवधि (1897–1941) व इसमें साधु सीतारामदास व विजय सिंह पथिक दोनों की भूमिका को स्पष्ट रूप से याद रखना जरूरी है, क्योंकि परीक्षा में अक्सर इन दोनों नामों को भ्रमित किया जाता है। इसी तरह बेगूं आंदोलन में रामनारायण चौधरी की सह-भूमिका को भी ध्यान में रखें।

याद रखने की ट्रिक

याद रखें — 'बिजोलिया = बहुत लंबा' (1897–1941, सबसे लंबा किसान आंदोलन) और 'पथिक = दोनों में साथी' (बिजोलिया व बेगूं दोनों आंदोलनों से जुड़े)। यह दो लाइनें अधिकांश भ्रामक विकल्पों को छाँटने में मदद करती हैं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

बिजोलिया किसान आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ था?

  1. A1885
  2. B1897
  3. C1905
  4. D1921

व्याख्या

बिजोलिया किसान आंदोलन 1897 में मेवाड़ रियासत के बिजोलिया ठिकाने में शुरू हुआ और 1941 तक चला।

प्रश्न 2

बिजोलिया आंदोलन के प्रारंभिक नेतृत्वकर्ता के रूप में किसका नाम प्रमुखता से लिया जाता है?

  1. Aविजय सिंह पथिक
  2. Bसाधु सीतारामदास
  3. Cजयनारायण व्यास
  4. Dहीरालाल शास्त्री

व्याख्या

बिजोलिया आंदोलन के प्रारंभिक चरण में साधु सीतारामदास ने किसानों को संगठित करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी।

प्रश्न 3

विजय सिंह पथिक किन दो किसान आंदोलनों से मुख्य रूप से जुड़े रहे?

  1. Aबिजोलिया व बेगूं
  2. Bशेखावाटी व मेवात
  3. Cमारवाड़ व मेवात
  4. Dबेगूं व शेखावाटी

व्याख्या

विजय सिंह पथिक बिजोलिया आंदोलन (1916 से नेतृत्व) व बेगूं आंदोलन (1921 से) — दोनों से जुड़े रहे और उन्हें राजस्थान में किसान आंदोलन का अग्रणी नेता माना जाता है।

प्रश्न 4

बेगूं किसान आंदोलन किस रियासत के क्षेत्र में हुआ था?

  1. Aमारवाड़ रियासत
  2. Bबीकानेर रियासत
  3. Cमेवाड़ रियासत
  4. Dकोटा रियासत

व्याख्या

बेगूं किसान आंदोलन मेवाड़ रियासत के चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में 1921 से विजय सिंह पथिक व रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में चला।

प्रश्न 5

'लाग-बाग' शब्द का संबंध किससे है?

  1. Aबिना पारिश्रमिक जबरन श्रम से
  2. Bनियमित लगान के अतिरिक्त वसूले जाने वाले मनमाने करों से
  3. Cप्रजामंडल की सदस्यता से
  4. Dराजस्थानी साहित्य की एक विधा से

व्याख्या

लाग-बाग नियमित लगान के अतिरिक्त जागीरदारों द्वारा वसूले जाने वाले विविध व मनमाने करों को कहा जाता था, जो किसान आंदोलनों का एक प्रमुख कारण बने।

प्रश्न 6

बेगार प्रथा का सीधा अर्थ क्या है?

  1. Aबिना पारिश्रमिक के जबरन श्रम करवाना
  2. Bअतिरिक्त भूमि-कर वसूलना
  3. Cफसल का हिस्सा दान में देना
  4. Dपशुधन पर कर लगाना

व्याख्या

बेगार का अर्थ है बिना किसी पारिश्रमिक के जागीरदार/शासक के लिए जबरन श्रम करवाना — यह किसान आंदोलनों की प्रमुख मांगों में से एक के विरुद्ध था।

प्रश्न 7

मेवात किसान आंदोलन मुख्यतः किन दो क्षेत्रों से जुड़ा था?

  1. Aजोधपुर-बीकानेर
  2. Bअलवर-भरतपुर
  3. Cकोटा-बूंदी
  4. Dउदयपुर-डूंगरपुर

व्याख्या

मेवात किसान आंदोलन अलवर व भरतपुर रियासतों के मेवात क्षेत्र में लगभग 1920 के दशक में हुआ था।

प्रश्न 8

बिजोलिया आंदोलन को भारत के इतिहास में किस विशेषता के लिए जाना जाता है?

  1. Aसबसे छोटा किसान आंदोलन होने के लिए
  2. Bभारत के सबसे लंबे किसान आंदोलनों में से एक होने के लिए
  3. Cकेवल शहरी मजदूरों के आंदोलन के लिए
  4. Dप्रथम विश्व युद्ध से पूर्व समाप्त होने के लिए

व्याख्या

1897 से 1941 तक लगभग चार दशकों तक चला बिजोलिया आंदोलन भारत के सबसे लंबे चले किसान आंदोलनों में गिना जाता है।

प्रश्न 9

राजस्थान के किसान आंदोलनों की मुख्य मांगें किससे संबंधित थीं?

  1. Aउत्तरदायी शासन की स्थापना से
  2. Bलगान, लाग-बाग व बेगार जैसी शोषणकारी प्रथाओं को समाप्त करने से
  3. Cकेवल शिक्षा-सुधार से
  4. Dकेवल रेलवे विस्तार से

व्याख्या

किसान आंदोलनों की मुख्य मांगें मनमाने लगान, लाग-बाग व बेगार जैसी शोषणकारी प्रथाओं को समाप्त करने से संबंधित थीं, जबकि उत्तरदायी शासन की मांग मुख्यतः प्रजामंडल आंदोलनों से जुड़ी थी।

प्रश्न 10

बिजोलिया आंदोलन ने राजस्थान के आगामी किस आंदोलन की भूमि तैयार करने में मदद की?

  1. Aप्रजामंडल आंदोलन
  2. Bभूदान आंदोलन
  3. Cचिपको आंदोलन
  4. Dनमक सत्याग्रह

व्याख्या

बिजोलिया जैसे किसान आंदोलनों ने राजस्थान में जन-जागरण फैलाया, जिसने आगे चलकर उत्तरदायी शासन हेतु चले प्रजामंडल आंदोलनों को प्रेरित व संगठित करने में मदद की।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिजोलिया किसान आंदोलन किस रियासत में हुआ था?+

बिजोलिया किसान आंदोलन मेवाड़ रियासत के बिजोलिया ठिकाने में हुआ था, जो वर्तमान में भीलवाड़ा जिले में स्थित है।

बिजोलिया आंदोलन कब से कब तक चला?+

बिजोलिया आंदोलन 1897 में शुरू होकर 1941 तक चला — यह भारत के सबसे लंबे किसान आंदोलनों में से एक माना जाता है।

विजय सिंह पथिक को किस लिए जाना जाता है?+

विजय सिंह पथिक को राजस्थान में किसान आंदोलन के अग्रणी नेता के रूप में जाना जाता है; उन्होंने बिजोलिया (1916 से) व बेगूं (1921 से) दोनों आंदोलनों का नेतृत्व किया।

बेगार किसे कहते हैं?+

बेगार बिना किसी पारिश्रमिक के जागीरदार या शासक के लिए जबरन करवाए जाने वाले श्रम को कहते हैं, जो रियासती दौर में किसान-शोषण का प्रमुख कारण था।

राजस्थान के किसान आंदोलनों में सामान्यतः किस प्रकार की रणनीति अपनाई गई?+

अधिकांश किसान आंदोलनों में सत्याग्रह, असहयोग (जैसे कर न देना, भूमि खाली छोड़ना) व सामूहिक पंचायतों के माध्यम से मांग रखने जैसी अहिंसक रणनीतियाँ अपनाई गईं।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. Bijolia movement — general reference
  2. Sadhu Sitaram Das — general reference
  3. Vijay Singh Pathik — general reference
  4. Begun farmer's movement — general reference

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए