परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) — REET नोट्स
परिसंचरण तंत्र REET Level 2 विज्ञान का महत्वपूर्ण टॉपिक है, जिसमें हृदय की संरचना, कपाट, रक्त वाहिकाओं के प्रकार और रक्त के घटक सबसे अधिक पूछे जाते हैं। यह पेज सिलेबस के अनुसार मानव परिसंचरण तंत्र को क्रमबद्ध व तुलनात्मक तरीके से समझाता है।
- REET 2024 में 0 प्रश्न
- कक्षा 9-10 स्तर की विषय-वस्तु
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
ईमानदारी से बताएं तो REET 2024 के पेपर में परिसंचरण तंत्र से सीधा कोई प्रश्न नहीं आया — यहाँ 2024 में शून्य (0) प्रश्न रहे। यह पेज पूरी तरह REET Level 2 (गणित-विज्ञान) के आधिकारिक सिलेबस की भाषा पर आधारित है। सिलेबस में 'जैव प्रक्रम' खंड होने से हृदय के कक्षों, कपाटों, रक्त वाहिकाओं के भेद और रक्त के घटकों पर सीधा तथ्यात्मक MCQ आने की संभावना बनी रहती है।
हृदय की संरचना
मानव हृदय चार कक्षों वाला एक पेशीय अंग है — दो ऊपरी कक्ष जिन्हें अलिंद (Atria, बायाँ व दायाँ अलिंद) कहते हैं, और दो निचले कक्ष जिन्हें निलय (Ventricles, बायाँ व दायाँ निलय) कहते हैं। हृदय के दायें व बायें भाग एक पट्टी (सेप्टम) द्वारा पूरी तरह अलग होते हैं, जिससे ऑक्सीजनयुक्त व ऑक्सीजनरहित रक्त आपस में नहीं मिल पाता। निलय की दीवारें अलिंद से अधिक मोटी होती हैं क्योंकि निलय को रक्त को पूरे शरीर या फेफड़ों तक पंप करना होता है, जिसके लिए अधिक बल चाहिए।
हृदय के कपाट (वाल्व) व उनका स्थान
| कपाट | स्थान | कार्य |
|---|---|---|
| त्रिवलनी कपाट (Tricuspid valve) | दायाँ अलिंद व दायाँ निलय के बीच | रक्त का पिछड़ना (backflow) रोकना |
| द्विवलनी/मिट्रल कपाट (Bicuspid/Mitral valve) | बायाँ अलिंद व बायाँ निलय के बीच | रक्त का पिछड़ना रोकना |
| अर्धचंद्राकार कपाट (Semilunar valves) | फुफ्फुसीय धमनी व महाधमनी के मुहाने पर | निलय से निकले रक्त को वापस लौटने से रोकना |
सभी कपाट रक्त को एक ही दिशा में बहने देते हैं, जिससे परिसंचरण की दक्षता बनी रहती है।
दोहरा परिसंचरण — फुफ्फुसीय व दैहिक परिसंचरण
मनुष्य में रक्त हृदय से होकर दो बार गुजरता है, इसलिए इसे दोहरा परिसंचरण (Double circulation) कहते हैं। फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary circulation) में दायाँ निलय ऑक्सीजनरहित रक्त को फुफ्फुसीय धमनी द्वारा फेफड़ों तक भेजता है, जहाँ यह ऑक्सीजनयुक्त होकर फुफ्फुसीय शिरा द्वारा बायें अलिंद में लौटता है। इसके बाद दैहिक परिसंचरण (Systemic circulation) में बायाँ निलय इस ऑक्सीजनयुक्त रक्त को महाधमनी (aorta) द्वारा पूरे शरीर में भेजता है, और शरीर से लौटा ऑक्सीजनरहित रक्त महाशिराओं द्वारा दायें अलिंद में आता है।
इस क्रम में एक अपवाद याद रखना जरूरी है — फुफ्फुसीय धमनी ऑक्सीजनरहित रक्त ले जाती है (जबकि सामान्यतः धमनियाँ ऑक्सीजनयुक्त रक्त ले जाती हैं), और फुफ्फुसीय शिरा ऑक्सीजनयुक्त रक्त लाती है (जबकि सामान्यतः शिराएँ ऑक्सीजनरहित रक्त लाती हैं)। यह REET में बार-बार पूछा जाने वाला बिंदु है।
रक्त वाहिकाओं के प्रकार
| वाहिका | दिशा | दीवार | कपाट |
|---|---|---|---|
| धमनी (Artery) | हृदय से अंगों की ओर रक्त ले जाती है | मोटी व लचीली | सामान्यतः नहीं (महाधमनी/फुफ्फुसीय धमनी पर अर्धचंद्राकार कपाट) |
| शिरा (Vein) | अंगों से हृदय की ओर रक्त लाती है | पतली | होते हैं (रक्त को पीछे बहने से रोकने के लिए) |
| केशिका (Capillary) | धमनी व शिरा को जोड़ती है | अत्यंत पतली (एक कोशिका मोटी) | नहीं |
| महाधमनी (Aorta) | शरीर की सबसे बड़ी धमनी, बायें निलय से निकलती है | सबसे मोटी | अर्धचंद्राकार कपाट इसके मुहाने पर |
केशिकाओं की पतली दीवार से ही ऊतकों व रक्त के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान संभव होता है।
रक्त के घटक व अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- प्लाज्मा
- रक्त का तरल भाग, जिसमें पोषक तत्व, हार्मोन व अपशिष्ट पदार्थ घुले रहते हैं
- लाल रक्त कणिकाएँ (RBC)
- हीमोग्लोबिन द्वारा ऑक्सीजन का परिवहन करती हैं; मानव में परिपक्व RBC में केंद्रक (नाभिक) नहीं होता
- श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC)
- शरीर को संक्रमण से बचाती हैं (प्रतिरक्षा), इनमें केंद्रक होता है
- प्लेटलेट्स
- रक्त का थक्का बनाने में सहायक
- हृदय गति नियंत्रक
- SA नोड (साइनो-एट्रियल नोड) हृदय की प्राकृतिक गति नियंत्रक (पेसमेकर) संरचना है
हृदय गति, नाड़ी दर व रक्त समूह
एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति की सामान्य विश्राम-अवस्था में हृदय गति लगभग 72 से 80 धड़कन प्रति मिनट होती है, जिसे कलाई या गर्दन पर उंगली रखकर नाड़ी (pulse) के रूप में महसूस किया जा सकता है। शारीरिक गतिविधि, तनाव व बुखार जैसी स्थितियों में यह दर अस्थायी रूप से बढ़ सकती है, जबकि नियमित व्यायाम से समय के साथ विश्राम-हृदय गति में सुधार हो सकता है।
रक्त समूह (Blood group) की खोज कार्ल लैंडस्टाइनर (Karl Landsteiner) ने की थी, जिन्होंने रक्त को ABO पद्धति के अनुसार A, B, AB व O — चार मुख्य समूहों में वर्गीकृत किया। रक्त समूहों की जानकारी रक्तदान व रक्त-आधान (blood transfusion) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि असंगत रक्त समूह मिलाने से शरीर में गंभीर प्रतिक्रिया हो सकती है।
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कक्षा गतिविधि
विद्यार्थियों को अपनी कलाई या गर्दन पर नाड़ी (pulse) महसूस करके आराम की अवस्था में व थोड़ा दौड़ने के बाद हृदय गति गिनवाएं और अंतर पर चर्चा करें।
शिक्षण सहायक सामग्री
हृदय का बड़ा लेबल किया चार्ट या मॉडल, जिसमें रक्त प्रवाह की दिशा तीरों से दिखाई गई हो, कक्षा 9-10 स्तर पर बहुत सहायक रहता है; उपलब्ध हो तो स्टेथोस्कोप से धड़कन सुनवाना भी प्रभावी है।
सामान्य गलतफहमी
विद्यार्थी अक्सर मान लेते हैं कि सभी धमनियाँ ऑक्सीजनयुक्त व सभी शिराएँ ऑक्सीजनरहित रक्त ले जाती हैं — फुफ्फुसीय धमनी व फुफ्फुसीय शिरा का अपवाद बार-बार दोहराकर स्पष्ट करें।
आकलन विचार
हृदय के अनलेबल आरेख में कक्षों व कपाटों को लेबल करवाएं तथा रक्त प्रवाह की दिशा तीरों से खींचने को कहें।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
फुफ्फुसीय अपवाद याद रखने का सरल तरीका — 'फुफ्फुसीय धमनी में अशुद्ध (deoxygenated), फुफ्फुसीय शिरा में शुद्ध (oxygenated)' — बाकी सभी जगह नियम उल्टा है (धमनी = शुद्ध, शिरा = अशुद्ध)। यही एक अपवाद REET में सबसे ज्यादा पूछा जाता है, इसे अलग से याद कर लें।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
मानव हृदय में कुल कितने कक्ष होते हैं?
- Aदो
- Bतीन
- Cचार
- Dछह
व्याख्या
मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं — दो अलिंद (ऊपरी कक्ष) व दो निलय (निचले कक्ष), जो सेप्टम द्वारा एक-दूसरे से अलग रहते हैं।
प्रश्न 2
शुद्ध (ऑक्सीजनयुक्त) रक्त को महाधमनी द्वारा पूरे शरीर में पंप करने का कार्य कौनसा कक्ष करता है?
- Aदायाँ अलिंद
- Bदायाँ निलय
- Cबायाँ अलिंद
- Dबायाँ निलय
व्याख्या
बायाँ निलय फेफड़ों से लौटे ऑक्सीजनयुक्त रक्त को महाधमनी (aorta) के माध्यम से पूरे शरीर में पंप करता है; इसकी दीवार सबसे मोटी होती है।
प्रश्न 3
फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary artery) में किस प्रकार का रक्त प्रवाहित होता है?
- Aऑक्सीजनयुक्त रक्त
- Bऑक्सीजनरहित रक्त
- Cकेवल प्लाज्मा
- Dकेवल प्लेटलेट्स
व्याख्या
फुफ्फुसीय धमनी दायें निलय से ऑक्सीजनरहित रक्त को फेफड़ों तक ले जाती है, जहाँ यह ऑक्सीजनयुक्त होता है — यह धमनियों में ऑक्सीजनयुक्त रक्त होने के सामान्य नियम का अपवाद है।
प्रश्न 4
रक्त का थक्का बनाने (clotting) में मुख्य भूमिका किसकी होती है?
- ARBC
- BWBC
- Cप्लेटलेट्स
- Dप्लाज्मा
व्याख्या
प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट्स) चोट लगने पर रक्त का थक्का बनाकर अतिरिक्त रक्तस्राव को रोकने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 5
बायें अलिंद व बायें निलय के बीच स्थित कपाट को क्या कहते हैं?
- Aत्रिवलनी कपाट (Tricuspid)
- Bद्विवलनी/मिट्रल कपाट (Bicuspid/Mitral)
- Cअर्धचंद्राकार कपाट
- Dफुफ्फुसीय कपाट
व्याख्या
द्विवलनी या मिट्रल कपाट बायें अलिंद व बायें निलय के बीच स्थित होता है और रक्त को निलय से अलिंद की ओर वापस बहने से रोकता है।
प्रश्न 6
निम्न में से किस रक्त वाहिका में कपाट (वाल्व) पाए जाते हैं ताकि रक्त पीछे न बहे?
- Aधमनी
- Bशिरा
- Cकेशिका
- Dमहाधमनी
व्याख्या
शिराओं में रक्त निम्न दाब पर बहता है, इसलिए उनमें कपाट होते हैं जो रक्त को हृदय की दिशा में ही बहने देते हैं और पीछे बहने से रोकते हैं।
प्रश्न 7
हृदय की प्राकृतिक गति नियंत्रक (पेसमेकर) संरचना कौनसी है?
- AAV नोड
- BSA नोड
- Cबायाँ निलय
- Dमिट्रल कपाट
व्याख्या
SA नोड (साइनो-एट्रियल नोड) दायें अलिंद में स्थित होता है और हृदय की धड़कन की लय को नियमित करता है, इसे प्राकृतिक पेसमेकर कहते हैं।
प्रश्न 8
एक शिक्षक विद्यार्थियों से आराम करते समय और दौड़ने के बाद अपनी नाड़ी दर गिनवाकर तुलना करवाता है। यह गतिविधि किस उद्देश्य के लिए उपयुक्त है?
- Aकेवल शारीरिक फिटनेस जांचना
- Bव्यायाम व हृदय गति के संबंध को प्रत्यक्ष अनुभव से समझाना
- Cसमय बर्बाद करना
- Dकेवल गणित अभ्यास
व्याख्या
प्रत्यक्ष अवलोकन व मापन गतिविधि विद्यार्थियों को व्यायाम के दौरान हृदय गति बढ़ने के संप्रत्यय को अनुभव द्वारा समझने में मदद करती है, जो केवल किताबी पठन से संभव नहीं।
प्रश्न 9
रक्त का कौनसा घटक शरीर को संक्रमण से बचाने (प्रतिरक्षा) का कार्य करता है?
- ARBC
- BWBC
- Cप्लेटलेट्स
- Dप्लाज्मा प्रोटीन केवल
व्याख्या
श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC) शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं और संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं व विषाणुओं से शरीर की रक्षा करती हैं।
प्रश्न 10
'दोहरा परिसंचरण' (Double circulation) का क्या अर्थ है?
- Aरक्त शरीर में दो बार जमा होता है
- Bएक हृदय-चक्र में रक्त हृदय से होकर दो बार गुजरता है (फुफ्फुसीय व दैहिक परिसंचरण)
- Cमनुष्य में दो हृदय होते हैं
- Dरक्त दिन में दो बार बदलता है
व्याख्या
मनुष्य में रक्त एक पूर्ण चक्र में हृदय से होकर दो बार गुजरता है — एक बार फेफड़ों की ओर (फुफ्फुसीय परिसंचरण) और एक बार शरीर की ओर (दैहिक परिसंचरण) — इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मानव हृदय में कितने कक्ष होते हैं?+
मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं — दो अलिंद (ऊपरी) व दो निलय (निचले)।
फुफ्फुसीय धमनी में किस प्रकार का रक्त होता है?+
फुफ्फुसीय धमनी में ऑक्सीजनरहित रक्त होता है, जो दायें निलय से फेफड़ों की ओर भेजा जाता है — यह धमनियों के सामान्य नियम का अपवाद है।
मानव हृदय की प्राकृतिक गति नियंत्रक संरचना कौनसी है?+
SA नोड (साइनो-एट्रियल नोड), जिसे प्राकृतिक पेसमेकर भी कहते हैं, हृदय की धड़कन की गति व लय को नियंत्रित करता है।
REET में परिसंचरण तंत्र से कितने प्रश्न पूछे गए?+
REET 2024 में इस टॉपिक से सीधा कोई प्रश्न नहीं पूछा गया था, पर 'जैव प्रक्रम' खंड का हिस्सा होने से यह आगामी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण बना रहता है।
RBC (लाल रक्त कणिका) में केंद्रक (नाभिक) होता है या नहीं?+
मनुष्य व अन्य स्तनधारियों की परिपक्व लाल रक्त कणिकाओं में केंद्रक नहीं होता, जिससे उनके अंदर अधिक हीमोग्लोबिन व ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता बढ़ जाती है।
रक्त समूहों (Blood groups) की खोज किसने की थी?+
रक्त समूहों (ABO पद्धति) की खोज वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाइनर ने की थी, जिन्होंने रक्त को A, B, AB व O — चार मुख्य समूहों में वर्गीकृत किया।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए