उत्सर्जन (Excretion) — REET नोट्स
उत्सर्जन तंत्र REET Level 2 विज्ञान का महत्वपूर्ण जैव-प्रक्रम टॉपिक है, जिसमें वृक्क (किडनी), नेफ्रॉन व मूत्र निर्माण की प्रक्रिया सबसे अधिक पूछी जाती है। यह पेज सिलेबस के अनुसार मानव उत्सर्जन तंत्र, विभिन्न जीवों के उत्सर्जी उत्पादों और पादप उत्सर्जन को क्रमबद्ध रूप से समझाता है।
- REET 2024 में 0 प्रश्न
- कक्षा 9-10 स्तर की विषय-वस्तु
- 7 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
ईमानदारी से बताएं तो REET 2024 के पेपर में उत्सर्जन तंत्र से सीधा कोई प्रश्न नहीं आया — यहाँ 2024 में शून्य (0) प्रश्न रहे। यह पेज पूरी तरह REET Level 2 (गणित-विज्ञान) के आधिकारिक सिलेबस की भाषा पर आधारित है। सिलेबस में 'जैव प्रक्रम' खंड होने से नेफ्रॉन की संरचना, वृक्क के कार्य और उत्सर्जी उत्पाद (यूरिया/यूरिक एसिड/अमोनिया) जैसे सीधे तथ्यात्मक MCQ आने की संभावना बनी रहती है।
उत्सर्जन क्या है और क्यों जरूरी है
शरीर में होने वाली उपापचयी (metabolic) क्रियाओं के दौरान अनेक हानिकारक व अनावश्यक नाइट्रोजनी अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं, जैसे यूरिया, यूरिक एसिड व अमोनिया। इन अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन (Excretion) कहते हैं। यदि ये पदार्थ शरीर में जमा होते रहें, तो विषाक्तता (toxicity) हो सकती है, इसलिए उत्सर्जन तंत्र का स्वस्थ रहना जीवन के लिए आवश्यक है।
मानव उत्सर्जन तंत्र के अंग
मानव उत्सर्जन तंत्र में मुख्यतः चार भाग होते हैं — वृक्क (Kidney, एक जोड़ी यानी 2), मूत्रवाहिनी (Ureter, प्रत्येक वृक्क से एक-एक), मूत्राशय (Urinary bladder, जहाँ मूत्र अस्थायी रूप से जमा होता है) और मूत्रमार्ग (Urethra, जिससे मूत्र शरीर से बाहर निकलता है)। वृक्क की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई नेफ्रॉन (Nephron) कहलाती है, और प्रत्येक वृक्क में लाखों नेफ्रॉन होते हैं। हर नेफ्रॉन में बोमन संपुट (Bowman's capsule), केशिका-गुच्छ (glomerulus), समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT), हेनले लूप और दूरस्थ कुंडलित नलिका (DCT) जैसे भाग होते हैं।
मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
मूत्र निर्माण तीन चरणों में होता है। पहला, निस्यंदन (Filtration) — रक्त वृक्क के केशिका-गुच्छ (glomerulus) से गुजरते हुए बोमन संपुट में छनता है, जिसमें जल, ग्लूकोज़, लवण व नाइट्रोजनी अपशिष्ट छन जाते हैं। दूसरा, पुनरावशोषण (Reabsorption) — नलिकाओं (PCT व हेनले लूप) में शरीर के लिए उपयोगी पदार्थ जैसे ग्लूकोज़, जरूरी जल व लवण वापस रक्त में अवशोषित हो जाते हैं। तीसरा, स्रावण (Secretion) — कुछ अतिरिक्त अपशिष्ट पदार्थ नलिका में मिलाए जाते हैं। अंत में बचा हुआ तरल मूत्र संग्रहण नलिका से होते हुए मूत्रवाहिनी द्वारा मूत्राशय में जमा होता है और मूत्रमार्ग से शरीर से बाहर निकलता है।
उत्सर्जी उत्पाद के आधार पर जीवों के प्रकार
| वर्ग | मुख्य उत्सर्जी उत्पाद | उदाहरण |
|---|---|---|
| अमोनियाजनी (Ammonotelic) | अमोनिया (अत्यधिक जल की जरूरत) | अधिकांश जलीय जंतु, मछलियाँ |
| यूरियाजनी (Ureotelic) | यूरिया | मनुष्य व अधिकांश स्तनधारी |
| यूरिकाजनी (Uricotelic) | यूरिक एसिड (कम जल की जरूरत, अर्ध-ठोस) | पक्षी, सरीसृप, कीट |
उत्सर्जी उत्पाद का प्रकार जीव के जल संरक्षण की आवश्यकता से जुड़ा होता है।
अन्य उत्सर्जी अंग व महत्वपूर्ण तथ्य
- त्वचा
- पसीने के रूप में अतिरिक्त जल, लवण व कुछ यूरिया बाहर निकालती है
- फेफड़े
- श्वसन के दौरान बनी कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालते हैं
- डायलिसिस (Dialysis)
- वृक्क फेल होने की स्थिति में कृत्रिम रूप से रक्त शुद्ध करने की चिकित्सा विधि
- पौधों में उत्सर्जन
- रंध्रों से गैसें (O₂/CO₂), वाष्पोत्सर्जन से अतिरिक्त जल, और गोंद/रेजिन के रूप में या पत्तियाँ गिराकर अपशिष्ट का निपटान
वृक्क की स्थिति, संरचना व मूत्र की संरचना
मनुष्य के दोनों वृक्क उदर गुहा में, रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर, सेम के बीज (bean) के आकार के होते हैं। प्रत्येक वृक्क को वृक्क धमनी (renal artery) से अशुद्ध रक्त प्राप्त होता है, जो वृक्क में छनकर शुद्ध होता है और वृक्क शिरा (renal vein) से वापस शरीर के परिसंचरण तंत्र में लौट आता है। यह व्यवस्था दर्शाती है कि उत्सर्जन तंत्र व परिसंचरण तंत्र आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
अंतिम रूप से बनने वाले मूत्र में मुख्यतः लगभग 95% जल होता है, शेष भाग में यूरिया व अन्य नाइट्रोजनी अपशिष्ट, अतिरिक्त लवण तथा कुछ अन्य उपापचयी उत्पाद घुले रहते हैं। स्वस्थ व्यक्ति के मूत्र में सामान्यतः ग्लूकोज़ व प्रोटीन नहीं पाए जाते, क्योंकि ये उपयोगी पदार्थ पुनरावशोषण के दौरान वापस रक्त में अवशोषित हो जाते हैं — यदि मूत्र जांच में ग्लूकोज़ या प्रोटीन मिले, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
वृक्क शरीर के जल-संतुलन (water balance) व रक्त में लवणों की सही मात्रा बनाए रखने का कार्य भी करते हैं, इसलिए इन्हें केवल 'अपशिष्ट निकालने वाला अंग' नहीं, बल्कि शरीर के आंतरिक वातावरण को स्थिर रखने वाला एक महत्वपूर्ण नियामक अंग भी माना जाता है। पर्याप्त जल पीना व संतुलित आहार लेना वृक्कों को स्वस्थ रखने में सहायक है।
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कक्षा गतिविधि
व्यायाम या दौड़ने के बाद विद्यार्थियों को अपने पसीने का अवलोकन करवाएं और चर्चा करें कि यह भी उत्सर्जन का एक तरीका है; मिट्टी या कार्डबोर्ड से वृक्क व नेफ्रॉन का सरल मॉडल बनवाएं।
शिक्षण सहायक सामग्री
उत्सर्जन तंत्र का लेबल किया चार्ट व नेफ्रॉन की बढ़ी हुई आकृति का चित्र कक्षा में दिखाना कक्षा 9-10 स्तर पर उपयोगी है।
सामान्य गलतफहमी
विद्यार्थी अक्सर सोचते हैं कि मूत्र वृक्क में 'जमा' होता है, जबकि मूत्र वृक्क में बनता है और मूत्राशय में जमा होता है — इस भेद को स्पष्ट करना जरूरी है।
आकलन विचार
बिना लेबल का उत्सर्जन तंत्र आरेख देकर अंगों को क्रम में (वृक्क → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग) लेबल करवाएं और मूत्र-प्रवाह मार्ग लिखवाएं।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
मूत्र प्रवाह का क्रम याद रखने के लिए वाक्य बनाएं — 'किडनी बनाए, यूरेटर ले जाए, ब्लैडर जमा करे, यूरेथ्रा बाहर निकाले।' और वृक्क की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई हमेशा 'नेफ्रॉन' ही होती है — यह REET में बार-बार पूछा जाने वाला एक-शब्दीय उत्तर है, इसे रटकर रखें।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
वृक्क की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई क्या कहलाती है?
- Aन्यूरॉन
- Bनेफ्रॉन
- Cएल्वियोलस
- Dहेपेटोसाइट
व्याख्या
नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई है, जो निस्यंदन, पुनरावशोषण व स्रावण द्वारा मूत्र का निर्माण करती है।
प्रश्न 2
मनुष्य में उत्सर्जन का मुख्य नाइट्रोजनी उत्पाद क्या है?
- Aअमोनिया
- Bयूरिया
- Cयूरिक एसिड
- Dकार्बन डाइऑक्साइड
व्याख्या
मनुष्य व अधिकांश स्तनधारी यूरियाजनी (ureotelic) होते हैं, यानी वे अपना मुख्य नाइट्रोजनी अपशिष्ट यूरिया के रूप में उत्सर्जित करते हैं।
प्रश्न 3
पक्षियों व सरीसृपों में उत्सर्जी उत्पाद मुख्यतः किस रूप में होता है?
- Aअमोनिया
- Bयूरिया
- Cयूरिक एसिड
- Dजल
व्याख्या
पक्षी व सरीसृप यूरिकाजनी (uricotelic) होते हैं, वे यूरिक एसिड को अर्ध-ठोस रूप में उत्सर्जित करते हैं जिससे शरीर का जल कम खर्च होता है।
प्रश्न 4
रक्त का निस्यंदन (filtration) नेफ्रॉन के किस भाग में होता है?
- Aदूरस्थ कुंडलित नलिका (DCT)
- Bहेनले लूप
- Cबोमन संपुट व केशिका-गुच्छ (glomerulus)
- Dमूत्रवाहिनी
व्याख्या
रक्त सबसे पहले केशिका-गुच्छ (glomerulus) से गुजरते हुए बोमन संपुट में छनता है, जहाँ जल, लवण, ग्लूकोज़ व नाइट्रोजनी अपशिष्ट छन जाते हैं।
प्रश्न 5
मूत्र को वृक्क से मूत्राशय तक कौनसी संरचना ले जाती है?
- Aमूत्रमार्ग (Urethra)
- Bमूत्रवाहिनी (Ureter)
- Cवृक्क धमनी
- Dहेनले लूप
व्याख्या
प्रत्येक वृक्क से निकलने वाली मूत्रवाहिनी (Ureter) मूत्र को मूत्राशय तक ले जाती है, जबकि मूत्रमार्ग मूत्राशय से शरीर के बाहर तक मूत्र निकालता है।
प्रश्न 6
त्वचा उत्सर्जन तंत्र में किस रूप में सहायक अंग का कार्य करती है?
- Aयह यूरिक एसिड को ठोस रूप में निकालती है
- Bयह पसीने के रूप में जल, लवण व कुछ यूरिया निकालती है
- Cयह कार्बन डाइऑक्साइड का मुख्य उत्सर्जन अंग है
- Dयह मूत्र का भंडारण करती है
व्याख्या
त्वचा पसीने की ग्रंथियों द्वारा अतिरिक्त जल, लवण व थोड़ी मात्रा में यूरिया बाहर निकालकर उत्सर्जन में सहायक भूमिका निभाती है।
प्रश्न 7
वृक्क फेल होने की स्थिति में रक्त शुद्ध करने की कृत्रिम चिकित्सा विधि को क्या कहते हैं?
- Aएंजियोप्लास्टी
- Bडायलिसिस
- Cबायोप्सी
- Dकिमोथेरेपी
व्याख्या
डायलिसिस में मशीन की सहायता से रक्त को शरीर से बाहर ले जाकर छानकर अपशिष्ट पदार्थ हटाए जाते हैं, फिर शुद्ध रक्त वापस शरीर में भेजा जाता है।
प्रश्न 8
एक शिक्षक विद्यार्थियों से व्यायाम के बाद पसीने का अवलोकन करवाकर उसे उत्सर्जन से जोड़ता है। यह गतिविधि किस शिक्षण उद्देश्य को पूरा करती है?
- Aकेवल शारीरिक व्यायाम करवाना
- Bदैनिक जीवन के अनुभव को वैज्ञानिक संप्रत्यय से जोड़ना
- Cसमय बर्बाद करना
- Dकेवल परीक्षा तैयारी
व्याख्या
दैनिक जीवन के अनुभव (जैसे पसीना आना) को पाठ्य संप्रत्यय से जोड़ना सीखने को सार्थक व स्थायी बनाता है, यह रचनावादी (constructivist) शिक्षण की मूल विशेषता है।
प्रश्न 9
पौधे अतिरिक्त जल को मुख्यतः किस प्रक्रिया द्वारा बाहर निकालते हैं?
- Aप्रकाश संश्लेषण
- Bवाष्पोत्सर्जन (Transpiration)
- Cश्वसन
- Dपरागण
व्याख्या
पौधे रंध्रों के माध्यम से अतिरिक्त जल को वाष्प के रूप में वातावरण में छोड़ते हैं, इसे वाष्पोत्सर्जन (transpiration) कहते हैं, जो पादप उत्सर्जन का एक रूप भी है।
प्रश्न 10
मनुष्य के मूत्र निर्माण में 'पुनरावशोषण (Reabsorption)' का क्या कार्य है?
- Aअपशिष्ट पदार्थों को रक्त में वापस मिलाना
- Bउपयोगी पदार्थों जैसे ग्लूकोज़ व जल को वापस रक्त में अवशोषित करना
- Cमूत्र को मूत्राशय में जमा करना
- Dरक्त को केशिका-गुच्छ तक पहुँचाना
व्याख्या
पुनरावशोषण में नलिकाओं (PCT व हेनले लूप) से शरीर के लिए उपयोगी ग्लूकोज़, जरूरी जल व लवण वापस रक्त में अवशोषित हो जाते हैं, जिससे शरीर का पोषण बना रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वृक्क (किडनी) की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई क्या है?+
वृक्क की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई नेफ्रॉन (Nephron) है, जो मूत्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया संपन्न करती है।
मनुष्य में कितने वृक्क होते हैं?+
स्वस्थ मनुष्य में सामान्यतः दो वृक्क होते हैं, जो उदर गुहा में रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होते हैं।
पौधों में उत्सर्जन कैसे होता है?+
पौधे गैसीय अपशिष्ट रंध्रों से, अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन से, और कुछ ठोस अपशिष्ट गोंद/रेजिन के रूप में या पुरानी पत्तियाँ गिराकर निकालते हैं।
डायलिसिस क्या है?+
डायलिसिस वृक्क फेल होने की स्थिति में मशीन द्वारा कृत्रिम रूप से रक्त से अपशिष्ट पदार्थ छानकर शुद्ध करने की चिकित्सा प्रक्रिया है।
REET में उत्सर्जन तंत्र से कितने प्रश्न पूछे गए?+
REET 2024 में इस टॉपिक से सीधा कोई प्रश्न नहीं पूछा गया था, लेकिन 'जैव प्रक्रम' खंड का हिस्सा होने से यह आगामी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण बना रहता है।
मूत्र में सामान्यतः कितना जल होता है?+
स्वस्थ व्यक्ति के मूत्र में लगभग 95% जल होता है, शेष भाग में यूरिया, लवण व अन्य उपापचयी अपशिष्ट पदार्थ घुले रहते हैं।
वृक्क को अशुद्ध रक्त कहाँ से प्राप्त होता है और शुद्ध रक्त कहाँ जाता है?+
वृक्क को वृक्क धमनी (renal artery) से अशुद्ध रक्त प्राप्त होता है, और वहाँ छनकर शुद्ध हुआ रक्त वृक्क शिरा (renal vein) से वापस परिसंचरण तंत्र में चला जाता है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए