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रिमोट सेंसिंग: उपग्रह, सेंसर, ISRO IRS | RAS नोट्स

Remote Sensing: Satellites, Sensors, ISRO IRS | RAS Notes

⏱ 15 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Geography of World and India

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) आधुनिक भूगोल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इसका शाब्दिक अर्थ है - दूर से सूचना प्राप्त करना। रिमोट सेंसिंग प्रौद्योगिकी से हम पृथ्वी की सतह की विभिन्न विशेषताओं की जानकारी बिना सीधे संपर्क के प्राप्त कर सकते हैं। यह कार्य उपग्रहों, विमानों और ड्रोन जैसे मानवरहित यानों द्वारा किया जाता है।

रिमोट सेंसिंग भूगोल के पाठ्यक्रम का हिस्सा है और RAS परीक्षा में इससे संबंधित प्रश्न बन सकते हैं। यह विषय संसाधनों की पहचान, आपदा प्रबंधन, कृषि विकास और शहरी नियोजन से जुड़ा हुआ है। राजस्थान की जलवायु, मिट्टी, वनस्पति और कृषि संबंधी अध्ययन में रिमोट सेंसिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्य अवधारणाएं

1. रिमोट सेंसिंग की परिभाषा एवं सिद्धांत

रिमोट सेंसिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें किसी वस्तु या क्षेत्र के बारे में सूचना प्राप्त की जाती है बिना उसके साथ सीधे संपर्क के। यह सूचना विद्युत चुंबकीय विकिरण (Electromagnetic Radiation) के माध्यम से प्राप्त होती है। रिमोट सेंसिंग का मूल सिद्धांत यह है कि प्रत्येक वस्तु अपनी विशेषता के अनुसार प्रकाश को परावर्तित और अवशोषित करती है। इन्हीं परावर्तित किरणों को संवेदनशील उपकरण (Sensors) द्वारा पकड़ा जाता है और डिजिटल रूप में परिवर्तित किया जाता है।

रिमोट सेंसिंग की प्रक्रिया
  1. ऊर्जा का स्रोतसूर्य (पैसिव) या सेंसर स्वयं (एक्टिव)
  2. वायुमंडल से गुजरनाविकिरण का अवशोषण व प्रकीर्णन
  3. लक्ष्य से अंतःक्रियावस्तु विकिरण को परावर्तित/अवशोषित करती है
  4. सेंसर द्वारा रिकॉर्डिंगउपग्रह या विमान पर लगा सेंसर
  5. डेटा प्रेषण व प्रोसेसिंगडिजिटल इमेज तैयार होती है
  6. विश्लेषण व उपयोगवर्गीकरण, व्याख्या, मानचित्रण

2. उपग्रह प्रणाली और सेंसर

रिमोट सेंसिंग में प्रयुक्त मुख्य उपग्रह आईआरएस (भारतीय दूर संवेदन उपग्रह), लैंडसैट, रडार उपग्रह और मौसम संबंधी उपग्रह हैं। भारत के अपने उपग्रह जैसे IRS-1A, IRS-1B, IRS-1C, IRS-1D, RESOURCESAT और CARTOSAT काफी प्रसिद्ध हैं। ये उपग्रह विभिन्न बैंडों में डेटा एकत्र करते हैं। सेंसर दो प्रकार के होते हैं - पैसिव सेंसर (जो सूर्य के विकिरण को मापते हैं) और एक्टिव सेंसर (जो स्वयं विकिरण भेजते हैं)।

उपग्रहवर्षप्रकारविशेषता
भास्कर-11979प्रायोगिकभारत का प्रायोगिक पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह
IRS-1A1988ऑप्टिकलभारत का पहला संचालन (ऑपरेशनल) रिमोट सेंसिंग उपग्रह
Resourcesat-1 (IRS-P6)2003ऑप्टिकलLISS-III, LISS-IV और AWiFS कैमरे; संसाधन सर्वेक्षण
Cartosat-12005ऑप्टिकल2.5 मी. विभेदन का पैनक्रोमैटिक चित्र; मानचित्रण
RISAT-12012रडार (SAR)C-बैंड SAR; बादल व रात में भी चित्रण
Cartosat-32019ऑप्टिकललगभग 25 सेमी विभेदन; अत्यधिक उच्च विभेदन वाला उपग्रह
EOS-04 (RISAT-1A)2022रडार (SAR)C-बैंड SAR; कृषि, वन, बाढ़ मानचित्रण
NISAR2025रडार (SAR)NASA-ISRO संयुक्त मिशन; L-बैंड व S-बैंड SAR; 747 किमी की सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा
आधारभू-स्थिर कक्षासूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा
ऊंचाईलगभग 36,000 किमी (35,786 किमी)कुछ सौ किमी (लगभग 500-900 किमी)
स्थितिभूमध्य रेखा के ऊपर, पृथ्वी के साथ घूमता हैध्रुवों के ऊपर से गुजरता है
कवरेजएक ही क्षेत्र पर लगातार नजरपूरी पृथ्वी की पट्टियों में छवि, नियत अंतराल पर पुनः दर्शन
उपयोगमौसम निगरानी, संचारसंसाधन सर्वेक्षण, मानचित्रण
उदाहरणINSAT/GSAT श्रृंखलाIRS, Resourcesat, Cartosat

3. स्पेक्ट्रल बैंड और विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम

विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम को विभिन्न तरंग दैर्ध्य के आधार पर बैंडों में विभाजित किया जाता है। दृश्य प्रकाश बैंड (Visible Light Band), अवरक्त बैंड (Infrared Band) और माइक्रोवेव बैंड (Microwave Band) मुख्य हैं। प्रत्येक बैंड का विशिष्ट अनुप्रयोग है। जल की पहचान के लिए नीले और हरे बैंड का, वनस्पति की पहचान के लिए निकट-अवरक्त (NIR) बैंड का, और थर्मल अनुप्रयोगों के लिए थर्मल इन्फ्रारेड बैंड का प्रयोग किया जाता है।

4. विभेदन क्षमता (Resolution) और डेटा विश्लेषण

उपग्रह सेंसर की विभेदन क्षमता (संकल्प) बहुत महत्वपूर्ण है। उच्च विभेदन का मतलब है कि छोटी वस्तुओं को विस्तार से देखा जा सकता है। स्थानिक विभेदन (Spatial Resolution), वर्णक्रमीय विभेदन (Spectral Resolution), कालिक विभेदन (Temporal Resolution) और रेडियोमेट्रिक विभेदन (Radiometric Resolution) - ये चार प्रकार के विभेदन हैं। डेटा विश्लेषण के लिए डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग, वर्गीकरण (Classification) और व्याख्या (Interpretation) की आवश्यकता होती है।

5. प्रमुख अनुप्रयोग और भूगोल में उपयोग

रिमोट सेंसिंग का प्रयोग कृषि निगरानी, वन संरक्षण, भूमि उपयोग मानचित्रण, जल संसाधन प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, शहरी विकास नियोजन, जलवायु अध्ययन और वन्यजीव संरक्षण में किया जाता है। भारत में खरीफ और रबी फसलों की निगरानी, पूर्वानुमान और उपज अनुमान के लिए रिमोट सेंसिंग का व्यापक प्रयोग किया जाता है। बाढ़, सूखा, भूस्खलन और अन्य आपदाओं की पूर्व चेतावनी देने में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • रिमोट सेंसिंग शब्द का पहली बार प्रयोग: 1960 में अमेरिका की भूगोलवेत्ता एवलिन प्रुइट (Evelyn Pruitt) द्वारा किया गया माना जाता है।
  • भारत का पहला उपग्रह: आर्यभट्ट (Aryabhata) 1975 में प्रक्षेपित किया गया था, जो एक प्रायोगिक उपग्रह था।
  • भारतीय दूर संवेदन कार्यक्रम: 1988 में IRS-1A का प्रक्षेपण किया गया, जो भारत का पहला संचालन (ऑपरेशनल) रिमोट सेंसिंग उपग्रह था। इससे पहले भास्कर-1 (1979) प्रायोगिक पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह था।
  • NDVI सूचकांक: Normalized Difference Vegetation Index वनस्पति के स्वास्थ्य और घनत्व को मापने के लिए प्रयुक्त होता है।
  • रडार तकनीक: बादलों से बाधित हुए बिना डेटा एकत्र करती है, इसलिए बादलों वाले और मानसून-प्रभावित क्षेत्रों में उपयोगी है।
  • जीआईएस (GIS): रिमोट सेंसिंग डेटा को स्थानिक विश्लेषण के लिए जियोग्राफिक इनफॉर्मेशन सिस्टम के साथ एकीकृत किया जाता है।
  • विभेदन का महत्व: 1 मीटर विभेदन वाले उपग्रह से 1 मीटर × 1 मीटर का क्षेत्र एक पिक्सल में दिखता है।

राजस्थान विशेष

राजस्थान के संदर्भ में रिमोट सेंसिंग का अत्यंत महत्वपूर्ण अनुप्रयोग है। राजस्थान का अधिकांश भाग रेगिस्तान क्षेत्र है, जहां भूजल संसाधनों की पहचान के लिए रिमोट सेंसिंग का व्यापक प्रयोग किया गया है। थार मरुस्थल में वनस्पति के प्रसार, मरु विस्तार और रेतीले टीलों (Sand Dunes) की गतिविधि का अध्ययन रिमोट सेंसिंग से ही संभव हुआ है।

राजस्थान में कृषि उत्पादन की निगरानी के लिए भी रिमोट सेंसिंग का प्रयोग किया जाता है। खरीफ और रबी फसलों का क्षेत्र निर्धारण, फसल के स्वास्थ्य और उपज पूर्वानुमान में यह तकनीक सहायक है। राजस्थान के शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि और भू-उपयोग परिवर्तन का अध्ययन भी उपग्रह चित्रों से किया जाता है। जयपुर, अलवर, भीलवाड़ा और अन्य शहरों के विस्तार को ट्रैक करने में यह प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण है।

राजस्थान में सूखा प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी, बाढ़ की चेतावनी, वन क्षेत्र की निगरानी और वनस्पति सूचकांक (Vegetation Index) के विश्लेषण में रिमोट सेंसिंग का महत्वपूर्ण योगदान है। इंदिरा गांधी नहर के प्रभाव क्षेत्र में भूमि उपयोग के परिवर्तन का अध्ययन भी रिमोट सेंसिंग द्वारा ही संभव हुआ है।

परीक्षा की तैयारी कैसे करें

  • बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ): RAS प्रारंभिक परीक्षा बहुविकल्पीय होती है। रिमोट सेंसिंग की परिभाषा, उपग्रहों के नाम, विभेदन के प्रकार, स्पेक्ट्रल बैंड और अनुप्रयोग इस विषय के मुख्य बिंदु हैं।
  • अनुप्रयोग आधारित तैयारी: कृषि निगरानी, आपदा प्रबंधन, भूमि उपयोग और जल संसाधन में रिमोट सेंसिंग की भूमिका समझें।
  • राजस्थान संबंधी तैयारी: राजस्थान में कृषि निगरानी, वन संसाधन प्रबंधन, मरुस्थल और शहरी विकास में रिमोट सेंसिंग की भूमिका पढ़ें।
  • अंतरिक्ष कार्यक्रम: ISRO के रिमोट सेंसिंग उपग्रहों (IRS, Resourcesat, Cartosat, RISAT, NISAR) के नाम और उपयोग याद रखें।

स्मरण युक्तियां

  • दृश्य प्रकाश के तीन प्राथमिक रंग-बैंड - Blue, Green, Red (RGB)। वनस्पति पहचान के लिए इनके साथ निकट-अवरक्त (NIR) बैंड जुड़ता है।
  • "NDVI का सूत्र" - (NIR - Red) / (NIR + Red) = वनस्पति सूचकांक। यह जितना अधिक होगा, वनस्पति उतनी अधिक स्वस्थ होगी।
  • "विभेदन याद रखने के लिए" - जितना छोटा विभेदन मान (जैसे 1 मी. बनाम 30 मी.), उतनी अधिक विस्तृत जानकारी (High Resolution = Small Value)।
  • "चार विभेदन" - स्थानिक, वर्णक्रमीय, कालिक और रेडियोमेट्रिक।
🧠 स्मरण ट्रिक — सक्रिय खुद रोशनी फेंकता है, निष्क्रिय सिर्फ देखता है

एक अंधेरे कमरे में दो फोटोग्राफर की कल्पना करें। एक फोटोग्राफर हर तस्वीर से पहले अपना फ्लैश जलाता है और फिर उससे टकराकर लौटने वाली रोशनी को कैमरे में कैद करता है — यही है एक्टिव (सक्रिय) रिमोट सेंसिंग, जिसका उपयोग RADAR, LIDAR और SAR जैसे सिस्टम करते हैं, जो स्वयं विद्युत चुंबकीय संकेत भेजते हैं और लौटने वाले संकेत को मापते हैं। दूसरा फोटोग्राफर कभी फ्लैश का उपयोग नहीं करता; वह केवल कमरे में पहले से मौजूद रोशनी को कैद करता है — यही है पैसिव (निष्क्रिय) रिमोट सेंसिंग, जिसका उपयोग Landsat, IRS और MODIS जैसे सेंसर करते हैं, जो केवल पृथ्वी की सतह से परावर्तित सूर्य के प्रकाश जैसे प्राकृतिक विकिरण को रिकॉर्ड करते हैं। याद रखने की तरकीब: यदि सेंसर स्वयं ऊर्जा भेजता है तो वह एक्टिव है; यदि वह केवल पहले से मौजूद ऊर्जा को ग्रहण करता है तो वह पैसिव है।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — एक्टिव बनाम पैसिव रिमोट सेंसिंग

एक आम भ्रम यह है कि "एक्टिव" का मतलब "ज्यादा शक्तिशाली" या "बेहतर" सेंसर समझ लिया जाता है, और "पैसिव" का मतलब सेंसर का "बंद" होना मान लिया जाता है। असली अंतर मापी जाने वाली ऊर्जा के स्रोत का है, सेंसर की गुणवत्ता का नहीं। एक्टिव रिमोट सेंसिंग सिस्टम — जैसे RADAR, LIDAR और SAR — स्वयं विद्युत चुंबकीय विकिरण उत्सर्जित करते हैं और फिर सतह से टकराकर लौटने वाले संकेत को मापते हैं; यही कारण है कि SAR बादलों के आर-पार और रात में भी सतह का चित्रण कर सकता है। दूसरी ओर, पैसिव रिमोट सेंसिंग सिस्टम — जैसे Landsat, IRS और MODIS — के पास अपना कोई ऊर्जा स्रोत नहीं होता; वे केवल पहले से मौजूद प्राकृतिक विकिरण को पहचानते हैं, मुख्यतः पृथ्वी की सतह से परावर्तित सूर्य के प्रकाश को, यही वजह है कि अधिकांश पैसिव ऑप्टिकल सेंसरों को उपयोगी चित्र लेने के लिए दिन के उजाले और अपेक्षाकृत साफ आसमान की आवश्यकता होती है।

Diagram comparing active and passive remote sensing Divider between active and passive sensing Earth's surface scanned by the active sensor Satellite carrying an active sensor Satellite antenna Active sensor emits its own signal toward Earth Emitted signal reaching the ground Signal reflects back to the active sensor Reflected signal returning to the satellite Active remote sensing labelActive Examples of active remote sensing systemsRADAR / LIDAR / SAR Earth's surface reflecting sunlight for the passive sensor Sun as the natural energy source for passive remote sensing Sunlight travels down to Earth's surface Sunlight reaching the ground Satellite carrying a passive sensor Satellite antenna Passive sensor receives sunlight reflected off Earth's surface Reflected sunlight reaching the satellite Passive remote sensing labelPassive Examples of passive remote sensing systemsLandsat / IRS / MODIS
📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. क्या Landsat का ऑप्टिकल सेंसर एक्टिव या पैसिव रिमोट सेंसिंग का उदाहरण है?

✅ पैसिव। Landsat के ऑप्टिकल सेंसर पृथ्वी की सतह से पहले से परावर्तित सूर्य के प्रकाश को पहचानते हैं — वे स्वयं कोई संकेत उत्सर्जित नहीं करते।

Q2. SAR (Synthetic Aperture Radar) रात में और बादलों के बीच भी उपयोगी चित्र क्यों ले सकता है, जबकि सामान्य ऑप्टिकल उपग्रह प्रायः नहीं ले पाते?

✅ SAR एक एक्टिव सिस्टम है: यह स्वयं माइक्रोवेव संकेत भेजता है और लौटने वाले संकेत को मापता है, इसलिए इसे सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती, और इसकी तरंग दैर्ध्य बादलों के आर-पार जा सकती है। इसके विपरीत, पैसिव ऑप्टिकल सेंसर परावर्तित सूर्य के प्रकाश पर निर्भर होते हैं, इसलिए अंधेरा और बादल उन्हें बाधित करते हैं।

Q3. SAR के अतिरिक्त दो एक्टिव रिमोट सेंसिंग सिस्टम के नाम बताइए।

✅ RADAR और LIDAR दो मुख्य उदाहरण हैं; SAR (Synthetic Aperture Radar) भी एक एक्टिव सिस्टम है जो हर मौसम में, दिन-रात सतह मानचित्रण के लिए बनाया गया है।

Q4. MODIS किस प्रकार का सेंसर है — एक्टिव या पैसिव?

✅ पैसिव। MODIS पृथ्वी की सतह से परावर्तित या उत्सर्जित प्राकृतिक विकिरण को पहचानता है, न कि स्वयं कोई ऊर्जा संकेत भेजता है, इसलिए यह Landsat और IRS ऑप्टिकल सेंसरों की तरह ही पैसिव श्रेणी में आता है।

Q5. एक पंक्ति में बताइए, एक्टिव और पैसिव रिमोट सेंसिंग सिस्टम में मूल अंतर क्या है?

✅ एक्टिव सिस्टम स्वयं विद्युत चुंबकीय विकिरण उत्सर्जित करते हैं और परावर्तित संकेत को मापते हैं, जबकि पैसिव सिस्टम बिना स्वयं कोई ऊर्जा भेजे केवल पहले से मौजूद प्राकृतिक विकिरण — आमतौर पर सूर्य का प्रकाश — को पहचानते हैं।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •थार मरुस्थल विश्व का 9वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है; यह राजस्थान के पश्चिमी भाग में है।
  • •चंबल नदी राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी है; यह यमुना में मिलती है।
  • •भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून में केरल पहुंचता है; यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से आता है।
  • •कर्क रेखा (23.5°N) राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से गुजरती है।
  • •मकराना (नागौर) का सफेद संगमरमर ताजमहल में प्रयुक्त।
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इस टॉपिक से जुड़े पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

आधिकारिक प्रश्नपत्रों के असली प्रश्न, उत्तर सहित।

  1. RAS 2021

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्थान के अधीन कार्यरत राज्य सुदूर संवेदन अनुप्रयोग केंद्र कहाँ स्थित है-

    1. (A) झालावाड़
    2. (B) अजमेर
    3. (C) जोधपुर
    4. (D) जयपुर

    उत्तर: (C) जोधपुर

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