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📚 विश्व एवं भारत का भूगोल

प्राकृतिक आपदाएँ और आपदा प्रबंधन

Natural Disasters and Disaster Management

14 मिनटadvanced✓ अपडेटेड: जुलाई 2026· Geography of World and India

परिचय

भारत का भूगोल — भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय हिमालय पर्वतमाला से लेकर बाढ़-प्रवण गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदानों, चक्रवात-प्रवण तटरेखाओं, और पश्चिमी राजस्थान के शुष्क भूभाग तक — इसे विश्व के सर्वाधिक आपदा-प्रवण देशों में से एक बनाता है। भूकंप, बाढ़, चक्रवात, सूखा और भूस्खलन लगभग हर वर्ष जीवन और अवसंरचना को प्रभावित करते हैं। RPSC RAS प्रीलिम्स के लिए यह विषय भौतिक भूगोल (आपदाएँ कहाँ होती हैं) को शासन-व्यवस्था (आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, NDMA, राज्य/जिला प्राधिकरण, NDRF के माध्यम से भारत कैसे तैयार व प्रतिक्रियाशील है) से जोड़ता है, साथ ही राजस्थान में सूखे को राज्य की प्रमुख आपदा समझना भी आवश्यक है।

आपदा प्रबंधन की मुख्य अवधारणाएं

1. भूकंप और भूकंपीय क्षेत्रीकरण

भारत भारतीय-यूरेशियाई प्लेट सीमा पर स्थित है, जिससे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर तक फैला हिमालयी चाप अत्यधिक भूकंप-प्रवण है। BIS भारत को चार भूकंपीय क्षेत्रों — Zone II से Zone V — में बांटता है; Zone V सबसे गंभीर है: कश्मीर घाटी, हिमाचल/उत्तराखंड के भाग, पूर्वोत्तर, और गुजरात का कच्छ — जिसे 2001 के भुज भूकंप ने प्रमाणित किया। Zone IV में दिल्ली-NCR शामिल है; प्रायद्वीपीय भारत का अधिकांश भाग, जिसमें राजस्थान का बड़ा हिस्सा भी है, सुरक्षित Zone II-III में आता है।

2. बाढ़ और चक्रवात

क्षेत्रफल की दृष्टि से बाढ़ भारत की सबसे बार-बार आने वाली आपदा है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून से संचालित है; गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना तंत्र बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और विशेषकर असम में नियमित बाढ़ लाता है, जहां ब्रह्मपुत्र की बदलती धारा हर वर्ष तबाही मचाती है। भारत का लगभग आठवां हिस्सा बाढ़-प्रवण है। चक्रवात गर्म समुद्रों पर बनते हैं — बंगाल की खाड़ी अरब सागर से लगभग चार गुना अधिक चक्रवात उत्पन्न करती है, जिससे ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सर्वाधिक प्रभावित होते हैं।

3. सूखा और भूस्खलन

सूखा धीमी गति से विकसित होने वाली आपदा है जो कमजोर या विलंबित मानसून से जुड़ी है। पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू) में वार्षिक वर्षा 300 मिमी से भी कम और अनियमित होती है, जिससे कृषि व जल संकट बार-बार आते हैं; मराठवाड़ा और आंतरिक कर्नाटक समान वृष्टि-छाया क्षेत्र हैं। भूस्खलन हिमालय और पश्चिमी घाट की अस्थिर ढालों पर केंद्रित हैं, जहाँ भारी वर्षा, तीव्र ढाल और वनों की कटाई उत्तराखंड व केरल जैसे राज्यों में ढाल-विफलता को जन्म देती है।

4. संस्थागत ढांचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005

2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद संसद ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 पारित किया, जिसने भारत का पहला देशव्यापी, कानूनी रूप से समर्थित आपदा संस्थागत ढांचा बनाया। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला NDMA राष्ट्रीय नीति तय करता है; प्रत्येक राज्य में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाला SDMA और प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर के नेतृत्व वाला DDMA है। जमीनी प्रतिक्रिया राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) द्वारा दी जाती है, जो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (BSF, CRPF, ITBP, CISF, SSB) से गठित है और खोज, बचाव व राहत में प्रशिक्षित है; राज्य स्तर पर SDRF इकाइयां सहयोग करती हैं।

5. आपदा प्रबंधन चक्र और राजस्थान का सूखा-प्रोफाइल

आपदा प्रबंधन चक्र के चार चरण हैं: शमन (दीर्घकालिक जोखिम-न्यूनीकरण — निर्माण संहिताएं, तटबंध, वनरोपण), तैयारी (पूर्व-चेतावनी तंत्र, निकासी अभ्यास, राहत सामग्री का भंडारण), प्रतिक्रिया (आपदा के दौरान/बाद खोज, बचाव व राहत), और पुनर्प्राप्ति/पुनर्वास (आजीविका व अवसंरचना का पुनर्निर्माण)। राजस्थान के लिए भूकंप, बाढ़ या चक्रवात नहीं बल्कि सूखा ही सबसे प्रमुख आपदा है — राज्य का लगभग 60 प्रतिशत भाग शुष्क थार मरुस्थल में है। ब्रिटिश काल के अकाल संहिता राहत कार्यों को नियंत्रित करते थे; आज राहत कार्य राज्य के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मनरेगा, चारा व जल-टैंकर राहत शिविरों, तथा इंदिरा गांधी नहर जैसे मरुस्थलीकरण-नियंत्रण उपायों पर निर्भर हैं।

RPSC RAS प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 दिसंबर 2004 की सुनामी के बाद बना और इसने NDMA, SDMA व DDMA की स्थापना की।
  • NDMA की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं; यह भारत का शीर्ष आपदा नीति-निर्माण निकाय है।
  • भारत का भूकंपीय वर्गीकरण (BIS, IS 1893) चार क्षेत्रों — Zone II (न्यूनतम) से Zone V (उच्चतम) — में बंटा है।
  • गुजरात का कच्छ हिमालय से बाहर होते हुए भी Zone V में है — 2001 के भुज भूकंप ने इसे प्रमाणित किया।
  • बंगाल की खाड़ी अरब सागर से लगभग चार गुना अधिक उष्णकटिबंधीय चक्रवात उत्पन्न करती है।
  • भारत का लगभग 12 प्रतिशत (लगभग आठवां हिस्सा) क्षेत्रफल बाढ़-प्रवण है, जो गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदानों में केंद्रित है।
  • पश्चिमी राजस्थान भारत का सर्वाधिक सूखा-प्रवण क्षेत्र है, जहां कई जिलों में वार्षिक वर्षा 300 मिमी से कम होती है।
  • आपदा प्रबंधन चक्र के चार चरण हैं — शमन, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्प्राप्ति/पुनर्वास।
  • NDRF केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से गठित एक विशेष आपदा-प्रतिक्रिया बल है।
  • DDMA का नेतृत्व जिला कलेक्टर/मजिस्ट्रेट करते हैं और यह जिला स्तर की आपदा प्रतिक्रिया का समन्वय करता है।

RPSC RAS प्रीलिम्स के लिए परीक्षा सुझाव

  • अधिनियम का वर्ष (2005) याद रखें और इसे स्पष्ट रूप से 2004 की सुनामी से जोड़ें।
  • NDMA-SDMA-DDMA पदानुक्रम और उनके अध्यक्षों (प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर) को याद रखें।
  • शमन (दीर्घकालिक जोखिम-न्यूनीकरण) को तैयारी (आपदा से ठीक पहले तत्परता) से भ्रमित न करें — यह अंतर बार-बार पूछा जाता है।
  • याद रखें कि बंगाल की खाड़ी में चक्रवात अरब सागर से लगभग 4:1 अधिक आते हैं; पूर्वी तटीय राज्यों को जानें।
  • राजस्थान के प्रश्नों में सूखे को प्राथमिकता दें, और सबसे प्रभावित पश्चिमी जिलों (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) को जानें।
  • भूकंपीय क्षेत्रों को क्षेत्रों से जोड़ें — पूर्वोत्तर, कश्मीर, कच्छ के लिए Zone V; अधिकांश प्रायद्वीपीय भारत के लिए Zone II-III।
  • NDMA (नीति-निर्माण निकाय) को NDRF (परिचालन प्रतिक्रिया बल) से अलग रखें।
  • हाल की आपदाओं के उदाहरणों से प्रतिक्रिया (तत्काल) और पुनर्प्राप्ति (दीर्घकालिक पुनर्निर्माण) में अंतर समझें।
🧠 स्मरण ट्रिक — आपदा प्रबंधन चक्र के 4 चरण

चारों चरणों को क्रम में याद रखने के लिए वाक्यांश याद करें: "My Plan Really Rebuilds" — मेरी योजना वास्तव में पुनर्निर्माण करती है। M = शमन (Mitigation, दीर्घकालिक जोखिम-न्यूनीकरण), P = तैयारी (Preparedness, आपदा से पहले तत्परता के उपाय), R = प्रतिक्रिया (Response, तत्काल बचाव व राहत), R = पुनर्प्राप्ति (Recovery, मध्यम अवधि में पुनर्निर्माण व पुनर्वास)। परीक्षा से पहले यह वाक्यांश दोहराएं — हर शब्द चक्र के एक चरण को सही क्रम में याद दिला देगा।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — शमन बनाम तैयारी

शमन और तैयारी दोनों ही आपदा-पूर्व चरण हैं, लेकिन दोनों एक जैसे नहीं हैं। शमन का अर्थ है आपदा की दीर्घकालिक गंभीरता या भविष्य के जोखिम को कम करना — भूकंप-रोधी भवन संहिताएं, नदी तटबंध, भूस्खलन-प्रवण ढालों पर वनरोपण — ऐसे कदम जो वर्षों पहले उठाए जाते हैं। तैयारी का अर्थ है किसी आसन्न या मौसमी आपदा के लिए तत्पर रहना — चक्रवात चेतावनी जारी करना, राहत सामग्री का भंडारण करना, निकासी अभ्यास चलाना — ऐसे कदम जो आपदा आने से ठीक पहले उठाए जाते हैं। संक्षेप में: शमन दीर्घकाल में जोखिम कम करता है; तैयारी निकट भविष्य में अपेक्षित आपदा के लिए लोगों और संसाधनों को तैयार करती है।

Diagram: the four-stage disaster management cycleDisaster Management CycleStage 1: Mitigation - long-term risk reduction before any disasterStage 1 label1. MitigationStage 2: Preparedness - readiness measures taken just before a hazard strikesStage 2 label2. PreparednessStage 3: Response - rescue and relief during and immediately after a disasterStage 3 label3. ResponseStage 4: Recovery - rebuilding and rehabilitation after a disasterStage 4 label4. RecoveryThe four stages repeat continuously; recovery feeds back into mitigationCenter labelDisasterCenter labelCycleMitigation leads into PreparednessPreparedness leads into ResponseResponse leads into RecoveryRecovery leads back into Mitigation, completing the cycle
📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. आपदा प्रबंधन अधिनियम कब बना, और इसे किस घटना ने प्रेरित किया?

✅ यह 2005 में, दिसंबर 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद बना; इसने NDMA तथा राज्य/जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की स्थापना की।

Q2. NDMA की अध्यक्षता कौन करता है?

✅ भारत के प्रधानमंत्री NDMA की अध्यक्षता करते हैं, जो देश का शीर्ष आपदा नीति-निर्माण निकाय है।

Q3. किस भूकंपीय क्षेत्र में सर्वाधिक जोखिम है, और हिमालय से बाहर कौन सा क्षेत्र इसमें शामिल है?

✅ Zone V में सर्वाधिक जोखिम है; हिमालय व पूर्वोत्तर के अलावा गुजरात का कच्छ भी Zone V में है, जैसा 2001 के भुज भूकंप ने प्रमाणित किया।

Q4. भारत का पूर्वी तट पश्चिमी तट से अधिक चक्रवात-प्रवण क्यों है?

✅ बंगाल की खाड़ी अरब सागर से लगभग चार गुना अधिक चक्रवात उत्पन्न करती है, जिससे ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पश्चिमी तट से कहीं अधिक प्रभावित होते हैं।

Q5. सूखे को राजस्थान की प्रमुख प्राकृतिक आपदा क्यों माना जाता है?

✅ राजस्थान का लगभग 60 प्रतिशत भाग शुष्क थार मरुस्थल में है, जहां वर्षा अल्प व अनियमित होती है (पश्चिम में अक्सर वार्षिक 300 मिमी से कम), जिससे दीर्घकालिक सूखा राज्य की सबसे प्रमुख व बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदा बन जाता है।

सारांश

भारत की आपदा-प्रोफाइल उसके भूगोल से आकार लेती है: हिमालयी टक्कर विवर्तनिकी भूकंप उत्पन्न करती है, मानसूनी जल-विज्ञान गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदानों में बाढ़ लाता है, बंगाल की खाड़ी का गर्म जल पूर्वी तट पर चक्रवात उत्पन्न करता है, मानसून की विफलता पश्चिमी राजस्थान में दीर्घकालिक सूखा उत्पन्न करती है, और हिमालय व पश्चिमी घाट की तीव्र, वर्षा-सिक्त ढालें भूस्खलन को जन्म देती हैं। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के बाद से भारत ने NDMA, SDMA, DDMA और NDRF की एक स्तरीकृत संस्थागत व्यवस्था बनाई है, जो शमन-तैयारी-प्रतिक्रिया-पुनर्प्राप्ति चक्र पर आधारित है। RPSC RAS प्रीलिम्स के लिए, अभ्यर्थियों को प्रत्येक आपदा के भौगोलिक कारणों और उसे प्रबंधित करने वाली कानूनी-संस्थागत व्यवस्था दोनों को समझना चाहिए, विशेष रूप से राजस्थान की सूखे व मरुस्थलीकरण के प्रति संवेदनशीलता पर ध्यान देते हुए।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • थार मरुस्थल विश्व का 9वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है; यह राजस्थान के पश्चिमी भाग में है।
  • चंबल नदी राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी है; यह यमुना में मिलती है।
  • भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून में केरल पहुंचता है; यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से आता है।
  • कर्क रेखा (23.5°N) राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से गुजरती है।
  • मकराना (नागौर) का सफेद संगमरमर ताजमहल में प्रयुक्त।
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5 में से 0 हल किए
1

राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी कौन-सी है?

2

भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील कौन-सी है?

3

जयसमंद झील किस नदी पर बाँध बनाकर बनाई गई थी?

4

राजस्थान में सर्वाधिक धूल भरी आँधियाँ किस जिले में दर्ज की जाती हैं?

5

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार गंभीर अकाल (सूखा) घोषित करने के लिए वर्षा में कितनी कमी आवश्यक मानी जाती है?

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