मुख्य सामग्री पर जाएं
📚 भारतीय इतिहास

अंतरिक्ष दौड़ व ISRO: स्पूतनिक से अपोलो-11 तक | RAS नोट्स

Space Race & ISRO: Sputnik to Apollo 11 | RAS Notes

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Indian History

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

अंतरिक्ष दौड़ विश्व इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शीत युद्ध अवधि में घटित हुआ। यह दौड़ मुख्यतः संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी श्रेष्ठता स्थापित करने के लिए थी। RPSC RAS परीक्षा की दृष्टि से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को समझने में सहायता करता है। आधुनिक भारत के संदर्भ में, अंतरिक्ष अनुसंधान ने भारत को एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

मुख्य अवधारणाएं

शीत युद्ध और अंतरिक्ष दौड़ का संबंध

अंतरिक्ष दौड़ शीत युद्ध का एक महत्वपूर्ण घटक था। द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद, अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैचारिक टकराव में तीव्रता आई। दोनों महाशक्तियां अपनी वैज्ञानिक और सैन्य श्रेष्ठता प्रदर्शित करना चाहती थीं। सोवियत संघ (तत्कालीन नेता निकिता ख्रुश्चेव) ने 4 अक्टूबर 1957 को पहला कृत्रिम उपग्रह स्पूतनिक-1 अंतरिक्ष में भेजा, जिससे अंतरिक्ष दौड़ की शुरुआत हुई। यह घटना पश्चिमी देशों के लिए एक सदमे के समान थी।

सोवियत संघ की उपलब्धियां

सोवियत संघ ने अंतरिक्ष अनुसंधान में अग्रणी भूमिका निभाई। 1957 में स्पूतनिक-1 के प्रक्षेपण के बाद, 12 अप्रैल 1961 को यूरी गैगारिन (वोस्तोक-1) मानव के रूप में पहली बार अंतरिक्ष में गए। वे पृथ्वी के चारों ओर एक कक्षा में घूमने वाले पहले मनुष्य थे। इस उपलब्धि ने सोवियत संघ को विश्व के नेतृत्व में आगे ला दिया। सर्गेई कोरोलेव सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम के मुख्य मस्तिष्क थे। जून 1963 में वलेंटीना तेरेशकोवा पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बनीं।

अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रतिक्रिया

सोवियत संघ की सफलता से अमेरिका ने तुरंत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में निवेश बढ़ाया। राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने मई 1961 में घोषणा की कि अमेरिका दशक के अंत तक मनुष्य को चंद्रमा पर पहुंचाएगा। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) को इस कार्य के लिए जिम्मेदारी दी गई। बहुत से वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत से यह असंभव काम संभव हुआ। अपोलो-11 मिशन में 20 जुलाई 1969 को नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर पहुंचने वाले पहले मनुष्य बने; उनके साथ बज़ एल्ड्रिन ने भी चंद्र सतह पर कदम रखा।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की भूमिका

स्वतंत्रता के बाद भारत ने अपने अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम की स्थापना की। 1962 में INCOSPAR (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति) बनी और 1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना की गई। डॉ. विक्रम साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक माने जाते हैं। वे मानते थे कि अंतरिक्ष तकनीकी का उपयोग विकासशील देशों के लिए करना चाहिए। 19 अप्रैल 1975 को भारत ने अपना पहला कृत्रिम उपग्रह आर्यभट्ट प्रक्षेपित किया; इसे सोवियत संघ के प्रक्षेपण यान से छोड़ा गया था। इसके प्रयोग एक्स-रे खगोल विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान और सौर भौतिकी से जुड़े थे।

बाद में 3 अप्रैल 1984 को राकेश शर्मा सोवियत यान सोयुज़ टी-11 से अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय बने। चंद्रयान-1 (2008) और मंगलयान (प्रक्षेपण 2013; सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में प्रवेश) के बाद चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सॉफ्ट लैंडिंग की। 2 सितंबर 2023 को सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य-L1 प्रक्षेपित हुआ।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम — प्रमुख पड़ाव
  1. 1962INCOSPAR का गठन
  2. 1969इसरो की स्थापना
  3. 1975आर्यभट्ट — पहला भारतीय उपग्रह
  4. 1984राकेश शर्मा — अंतरिक्ष में पहले भारतीय
  5. 2008चंद्रयान-1
  6. 2013-14मंगलयान — प्रक्षेपण और मंगल कक्षा में प्रवेश
  7. 2023चंद्रयान-3 (23 अगस्त) और आदित्य-L1 (2 सितंबर)

अंतरिक्ष दौड़ के दीर्घकालीन प्रभाव

अंतरिक्ष दौड़ का विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा। इससे तकनीकी विकास में तेजी आई और कंप्यूटर, संचार प्रौद्योगिकी, सामग्री विज्ञान जैसे क्षेत्रों में क्रांति आई। अंतरिक्ष अनुसंधान से बहुत सी रोज़मर्रा की वस्तुएं विकसित हुईं जैसे उपग्रह-आधारित संचार, मौसम पूर्वानुमान और चिकित्सा उपकरण। यह दौड़ अंततः शीत युद्ध की समाप्ति के साथ धीमी पड़ गई और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग की शुरुआत हुई।

महत्वपूर्ण तथ्य

1957: सोवियत संघ द्वारा स्पूतनिक-1 का प्रक्षेपण - पहला कृत्रिम उपग्रह

1961: यूरी गैगारिन का अंतरिक्ष यात्रा - पहला मानव अंतरिक्ष में

1962: अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जॉन ग्लेन पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं

1969: अपोलो 11 मिशन - नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर पहुंचते हैं

1971: सोवियत संघ का साल्यूत-1 अंतरिक्ष स्टेशन - पहला अंतरिक्ष स्टेशन

1972: अपोलो 17 - चंद्रमा पर मानव मिशन की समाप्ति

1975: भारत द्वारा आर्यभट्ट उपग्रह का प्रक्षेपण

1981: स्पेस शटल कोलंबिया का पहला उड़ान

1986: सोवियत संघ द्वारा मीर अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल का प्रक्षेपण

1998: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) का निर्माण शुरू

उपलब्धिसोवियत संघअमेरिका
पहला उपग्रहस्पूतनिक-1 (1957)एक्सप्लोरर-1 (1958)
अंतरिक्ष में पहला मानवयूरी गैगारिन (12 अप्रैल 1961)एलन शेपर्ड (5 मई 1961, उप-कक्षीय); जॉन ग्लेन ने फरवरी 1962 में पृथ्वी की परिक्रमा की
पहली महिला अंतरिक्ष यात्रीवलेंटीना तेरेशकोवा (1963)सैली राइड (1983)
चंद्रमा पर मानव—अपोलो-11 (1969)
अंतरिक्ष स्टेशनसाल्यूत-1 (1971)स्काईलैब (1973)

राजस्थान विशेष

राजस्थान में अंतरिक्ष एवं खगोल अनुसंधान से जुड़ी दो प्रमुख वेधशालाएं भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL, अहमदाबाद) द्वारा संचालित हैं: माउंट आबू (गुरुशिखर) की अवरक्त (इन्फ्रारेड) वेधशाला, जहाँ 1.2 मीटर का अवरक्त टेलीस्कोप है, तथा उदयपुर सौर वेधशाला, जहाँ सूर्य का अध्ययन किया जाता है।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा में अंतरिक्ष दौड़ से संबंधित प्रश्न निम्नलिखित तरीकों से पूछे जा सकते हैं:

प्रश्न प्रकार 1: ऐतिहासिक तारीखें और घटनाएं - जैसे स्पूतनिक का प्रक्षेपण, पहला मानव अंतरिक्ष यात्रा, चंद्रमा पर पहला मानव।

प्रश्न प्रकार 2: महत्वपूर्ण व्यक्तित्व - यूरी गैगारिन, नील आर्मस्ट्रांग, विक्रम साराभाई, सर्गेई कोरोलेव।

प्रश्न प्रकार 3: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम - इसरो की स्थापना, पहला उपग्रह, मिशन और उद्देश्य।

प्रश्न प्रकार 4: शीत युद्ध का संबंध - अंतरिक्ष दौड़ अमेरिका और सोवियत संघ के बीच प्रतिद्वंद्विता का संदर्भ।

प्रश्न प्रकार 5: तुलनात्मक विश्लेषण - विभिन्न देशों के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की तुलना।

याद रखें
  • पहला उपग्रह: स्पूतनिक-1 (1957); अंतरिक्ष में पहला मानव: गैगारिन (1961); चंद्रमा पर पहला मानव: आर्मस्ट्रांग (1969)
  • पहला स्पेस स्टेशन: साल्यूत-1 (1971, सोवियत संघ)
  • भारत: इसरो की स्थापना 1969, पहला उपग्रह आर्यभट्ट 1975, पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा 1984
  • राजस्थान संबंध: माउंट आबू (गुरुशिखर) अवरक्त वेधशाला और उदयपुर सौर वेधशाला (PRL)

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •मोहनजोदड़ो का अर्थ है 'मृतकों का टीला'; यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित है।
  • •अशोक ने 261 ई.पू. कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाया और धम्म नीति अपनाई।
  • •कबीर दास ने निर्गुण भक्ति का प्रचार किया; उनके गुरु रामानंद थे।
  • •1857 की क्रांति का तात्कालिक कारण एनफील्ड राइफल की चर्बी वाली कारतूस थी।
  • •INC की स्थापना 1885 में ए.ओ. ह्यूम ने की; प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे।
इस टॉपिक को पूरा करने के बाद मार्क करें — सिलेबस प्रगति में जुड़ जाएगा।

✍️ 1 सवाल हल करें

पढ़ने के बाद खुद को परखें — सभी सवाल हल करके अपनी streak बढ़ाएं। 🔥

1 में से 0 हल किए
1

अंतरिक्ष में जाने वाला पहला इंसान कौन था:

अगला कदम
📝 RAS Prelims की तैयारी कर रहे हैं?
8 फ्री फुल-लेंथ मॉक टेस्ट — असली परीक्षा जैसा पैटर्न, नेगेटिव मार्किंग और डिटेल्ड एनालिसिस के साथ।
शुरू करें →

संबंधित गाइड

अगला कदम: आगे पढ़ें और अभ्यास करें

संबंधित समसामयिकी