राजस्थान की झीलें: रेगिस्तानी राज्य में खारा और मीठा पानी
राजस्थान की झीलें दो भिन्न वर्गों में बँटी हैं। शुष्क उत्तर-पश्चिम में — जो कभी प्राचीन टेथिस सागर से ढका क्षेत्र था — अधिकांश झीलें खारे पानी की हैं, जिनकी लवणता का कारण नदियों द्वारा लाए गए नमक-कण और झील तल के नीचे मौजूद खनिज-युक्त चट्टानों से केशाकर्षण द्वारा ऊपर आने वाला नमक, दोनों हैं। अरावली के पूर्व में, जहाँ वर्षा अधिक होती है, अधिकांश झीलें मीठे पानी की हैं, जिनमें से कई सदियों पहले मेवाड़ के शासकों द्वारा जलाशय, अकाल-राहत कार्य या राजसी विश्राम-स्थल के रूप में बनवाई गई थीं।
प्रमुख खारे पानी की झीलें
जयपुर, अजमेर व डीडवाना-कुचामन जिलों में फैली सांभर झील सबसे उल्लेखनीय है — यह भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील है और चिल्का के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील, जो भारत के कुल नमक उत्पादन का लगभग 8.7% देती है और हर सर्दी में रूस व मध्य एशिया से आने वाले फ्लेमिंगो पक्षियों को आकर्षित करती है। इसकी लवणता के दो स्रोत हैं — सहायक नदियों द्वारा लाया गया नमक, और झील तल के नीचे की नमकीन चट्टानों से केशाकर्षण द्वारा ऊपर आने वाला नमक। अन्य उल्लेखनीय खारी झीलों में डीडवाना शामिल है, जिसका नमक अधिक सल्फेट-अंश के कारण सामान्यतः खाने योग्य नहीं माना जाता; बालोतरा की पचपदरा झील, जहाँ परंपरागत रूप से खारवाल समुदाय नमक बनाता है; और बीकानेर की लूणकरणसर झील।
मेवाड़ की मीठे पानी की झीलें
उदयपुर की अधिकांश झीलें वहाँ के महाराणाओं की सुनियोजित इंजीनियरिंग का परिणाम हैं। 14वीं सदी के अंत में बनी पिछोला झील में जगमंदिर व जगनिवास द्वीप-महल स्थित हैं (जगनिवास आज लेक पैलेस होटल है), और यहीं युवा शहजादा खुर्रम — आगे चलकर सम्राट शाहजहाँ — ने अपने पिता जहाँगीर के विरुद्ध विद्रोह के दिनों में शरण ली थी। 1888 में पुनर्निर्मित फतहसागर एक नहर से पिछोला से जुड़ी है और इसके एक द्वीप पर सौर वेधशाला स्थित है। महाराणा उदयसिंह द्वारा 16वीं सदी के मध्य में बनवाई गई उदयसागर झील में आयड़ नदी गिरती है, जो आगे बेड़च नदी कहलाती है।
क्षेत्र की अन्य प्रमुख झीलों में: गोमती नदी पर बाँध बनाकर 1680 के दशक में निर्मित जयसमंद झील एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम मीठे पानी की झीलों में से एक है, जिसमें सात द्वीप हैं जहाँ भील व मीणा समुदाय बसे हैं। महाराणा राजसिंह द्वारा 1662 में अकाल-राहत कार्य के रूप में शुरू की गई राजसमंद झील के दक्षिणी पाल (नौचौकी की पाल) पर संस्कृत में उत्कीर्ण राजप्रशस्ति मेवाड़ के इतिहास का विवरण देती है। अजमेर की आनासागर झील, जिसे 1137 में अर्णोराज (पृथ्वीराज चौहान के दादा) ने बनवाया था, बाद में मुगलकाल में इसके तट पर बाग व बारादरी जुड़ीं। और अरावली की ऊँचाई पर स्थित माउंट आबू की नक्की झील राजस्थान की सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित झील है, जिसके नाम के पीछे एक लोककथा जुड़ी है।
वाक्य याद रखें: "साँप डीज़ल पहन लूटा"
- साँप (सां) → सांभर झील
- डीज़ल (डी) → डीडवाना झील
- पहन (प) → पचपदरा झील
- लूटा (लू) → लूणकरणसर झील
ध्यान दें: ये चारों उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्र (जयपुर-अजमेर-डीडवाना-कुचामन, बालोतरा, बीकानेर) की प्रमुख खारे पानी की झीलें हैं।
त्वरित तथ्य
- राजस्थान में दो तरह की झीलें हैं: खारे पानी की (अधिकांशतः उत्तर-पश्चिम) और मीठे पानी की (अधिकांशतः अरावली के पूर्व)।
- सांभर भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील है, जो देश के लगभग 8.7% नमक का उत्पादन करती है।
- उदयपुर के निकट जयसमंद झील एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम मीठे पानी की झीलों में से एक है।
- माउंट आबू की नक्की झील राजस्थान की सबसे ऊँची झील है।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •थार मरुस्थल विश्व का 9वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है; यह राजस्थान के पश्चिमी भाग में है।
- •चंबल नदी राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी है; यह यमुना में मिलती है।
- •भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून में केरल पहुंचता है; यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से आता है।
- •कर्क रेखा (23.5°N) राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से गुजरती है।
- •मकराना (नागौर) का सफेद संगमरमर ताजमहल में प्रयुक्त।