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📚 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

नाभिकीय विज्ञान: विखंडन, संलयन, रेडियोधर्मिता | RAS Notes

Nuclear Science: Fission, Fusion, Radioactivity | RAS Notes

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Science and Technology

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

नाभिकीय (Nuclear) विज्ञान आधुनिक भौतिकी की एक महत्वपूर्ण शाखा है जो परमाणु के नाभिक (nucleus) और उससे संबंधित घटनाओं का अध्ययन करती है। RPSC RAS परीक्षा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय के अंतर्गत रोजमर्रा की विज्ञान (Everyday Science) एक महत्वपूर्ण अध्याय है। नाभिकीय विज्ञान न केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारी दैनंदिन जीवन में बिजली उत्पादन, चिकित्सा, कृषि और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के इस विषय से RAS प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य विज्ञान खंड में प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

मुख्य अवधारणाएं

1. परमाणु संरचना और नाभिक

परमाणु की संरचना में एक केंद्रीय नाभिक होता है जो प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से मिलकर बना है। प्रोटॉन धनावेशित कण होते हैं जबकि न्यूट्रॉन विद्युत् रूप से तटस्थ होते हैं। नाभिक के चारों ओर विद्युत् ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं। परमाणु की सबसे बाहरी कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या तत्व की रासायनिक विशेषताओं को निर्धारित करती है। नाभिक का आकार परमाणु के कुल आकार का लगभग 10,000 गुना छोटा होता है, लेकिन इसमें परमाणु के 99.9% द्रव्यमान केंद्रित होता है।

2. रेडियोएक्टिविटी और क्षय

रेडियोएक्टिविटी वह प्रक्रिया है जिसमें अस्थिर नाभिक विकिरण उत्सर्जित करके अधिक स्थिर नाभिक में परिवर्तित होते हैं। इसमें तीन प्रमुख प्रकार के विकिरण निकलते हैं: अल्फा (α) कण, बीटा (β) कण और गामा (γ) किरणें। अल्फा विकिरण हीलियम नाभिक होते हैं, बीटा विकिरण इलेक्ट्रॉन होते हैं, और गामा किरणें विद्युत्-चुम्बकीय विकिरण होती हैं। रेडियोएक्टिविटी समय के साथ घातांकीय दर से घटती है जिसे अर्ध-आयु (half-life) से मापा जाता है।

विकिरणप्रकृतिआवेशभेदन-क्षमता
अल्फा (α)हीलियम नाभिक (2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन)धन (+2)सबसे कम; कागज़ से रुक जाता है
बीटा (β)इलेक्ट्रॉन (या पॉज़िट्रॉन)ऋण (−1)मध्यम; पतली एल्युमिनियम प्लेट से रुकता है
गामा (γ)विद्युत्-चुम्बकीय विकिरण (फोटॉन)कोई नहींसबसे अधिक; मोटी सीसे की परत से रुकता है

3. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)

नाभिकीय विखंडन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235) एक न्यूट्रॉन के द्वारा प्रहारित होने पर दो हल्के नाभिकों में विभाजित हो जाता है। इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है जिसे परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है। नाभिकीय विखंडन से उत्पन्न अतिरिक्त न्यूट्रॉन श्रृंखला प्रतिक्रिया (chain reaction) को आरंभ करते हैं जिसे नियंत्रित करना महत्वपूर्ण होता है।

4. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)

नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो हल्के नाभिक अत्यंत उच्च तापमान पर आपस में संयुक्त होकर एक भारी नाभिक बनाते हैं। यह प्रक्रिया सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। प्रति इकाई द्रव्यमान संलयन में विखंडन की तुलना में अधिक ऊर्जा मुक्त होती है (लगभग 3-4 गुना), जबकि प्रति अभिक्रिया विखंडन में अधिक ऊर्जा निकलती है (लगभग 200 MeV बनाम D-T संलयन में 17.6 MeV)। हाइड्रोजन बम इसी सिद्धांत पर कार्य करता है। वैज्ञानिकों का लक्ष्य नियंत्रित परमाणु संलयन को व्यावहारिक ऊर्जा स्रोत के रूप में विकसित करना है।

आधारनाभिकीय विखंडननाभिकीय संलयन
प्रक्रियाभारी नाभिक टूटकर हल्के नाभिक बनाता हैहल्के नाभिक जुड़कर भारी नाभिक बनाते हैं
ईंधन/उदाहरणयूरेनियम-235, प्लूटोनियम-239हाइड्रोजन के समस्थानिक (ड्यूटीरियम, ट्राइटियम)
आवश्यक शर्तन्यूट्रॉन द्वारा प्रहारअत्यंत उच्च ताप और दाब
अनुप्रयोगपरमाणु बिजलीघर, परमाणु बमसूर्य व तारों की ऊर्जा, हाइड्रोजन बम

5. मास-ऊर्जा तुल्यता और आइंस्टीन का सूत्र

अल्बर्ट आइंस्टीन का प्रसिद्ध सूत्र E=mc² नाभिकीय प्रतिक्रियाओं का वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है। इसके अनुसार, द्रव्यमान और ऊर्जा समतुल्य हैं तथा एक छोटे से द्रव्यमान में भारी मात्रा में ऊर्जा निहित होती है। नाभिकीय विखंडन और संलयन प्रक्रियाओं में द्रव्यमान की न्यून हानि से प्रचंड मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। यह सिद्धांत परमाणु बम, परमाणु ऊर्जा संयंत्र और अन्य अनुप्रयोगों का वैज्ञानिक आधार है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • रेडॉन गैस: रेडॉन (Rn) एक रेडियोएक्टिव गैस है जो भूमि में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
  • कार्बन डेटिंग: कार्बन-14 की रेडियोएक्टिविटी का उपयोग पुरातन वस्तुओं की आयु निर्धारित करने में किया जाता है।
  • अर्ध-आयु: यूरेनियम-238 की अर्ध-आयु लगभग 4.5 अरब वर्ष है, जो पृथ्वी की आयु के लगभग बराबर है।
  • नियंत्रक दंड: नाभिकीय संयंत्रों में कैडमियम या बोरॉन के दंड श्रृंखला प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
  • शीतलक: परमाणु संयंत्रों में पानी या तरल सोडियम शीतलक के रूप में कार्य करते हैं।
  • चिकित्सा अनुप्रयोग: कोबाल्ट-60 का उपयोग कैंसर के इलाज में, टेक्नीशियम-99m का उपयोग चिकित्सा इमेजिंग (चित्रण) में होता है।
  • खाद्य संरक्षण: विकिरण का उपयोग खाद्य पदार्थों को संरक्षित करने में किया जाता है।
भारत का त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम (होमी भाभा)
  1. चरण 1दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR): प्राकृतिक यूरेनियम ईंधन, प्लूटोनियम-239 उप-उत्पाद
  2. चरण 2फास्ट ब्रीडर रिएक्टर: प्लूटोनियम-239 ईंधन, थोरियम से यूरेनियम-233 का उत्पादन
  3. चरण 3थोरियम-यूरेनियम-233 आधारित रिएक्टर

राजस्थान विशेष

राजस्थान में नाभिकीय विज्ञान के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं। राजस्थान यूरेनियम के भंडार के लिए जाना जाता है, विशेषकर उदयपुर (उमरा) और डूंगरपुर जिलों में। राजस्थान परमाणु विद्युत परियोजना (RAPP/RAPS) रावतभाटा (चित्तौड़गढ़ जिला, कोटा के निकट) में स्थित है और इसका संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) करता है। यहां कई दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) स्थापित हैं जो देश को बिजली प्रदान करते हैं। राजस्थान के बाँसवाड़ा जिले में माही-बाँसवाड़ा परमाणु बिजली परियोजना प्रस्तावित है।

परीक्षा पैटर्न

प्रारंभिक परीक्षा: RAS प्रारंभिक परीक्षा में एक ही वस्तुनिष्ठ पेपर (सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान) होता है। नाभिकीय विज्ञान से प्रश्न रेडियोएक्टिविटी, परमाणु संरचना, परमाणु ऊर्जा और इसके अनुप्रयोगों पर केंद्रित हो सकते हैं। प्रश्नों में वैज्ञानिक तथ्य, परिभाषाएं और तुलनात्मक प्रश्न हो सकते हैं।

मुख्य परीक्षा: मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पत्रों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े विस्तृत प्रश्नों में नाभिकीय ऊर्जा के सिद्धांत, अनुप्रयोग और समकालीन महत्व को समझाने वाले प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

स्मरण युक्तियां

1. मुख्य शब्दावली: "अल्फा-बीटा-गामा" याद रखें जो विकिरण के तीन प्रकार हैं। भेदन-क्षमता का क्रम: अल्फा (सबसे कम), बीटा (मध्यम), गामा (सबसे अधिक)।

2. विखंडन बनाम संलयन: "विखंडन = विभाजन, संलयन = संयोजन" - विखंडन में भारी नाभिक टूटता है जबकि संलयन में हल्के नाभिक जुड़ते हैं।

3. E=mc² की महत्ता: याद रखें कि 'c' (प्रकाश की गति) इतनी बड़ी संख्या है कि थोड़े से द्रव्यमान (m) से विशाल ऊर्जा (E) निकलती है।

4. अनुप्रयोग स्मरण: परमाणु ऊर्जा - "बिजली, बम, चिकित्सा, कृषि" - इन चारों क्षेत्रों में याद रखें।

5. भारत में परमाणु संयंत्र: "तारापुर (महाराष्ट्र), रावतभाटा (राजस्थान), नरोरा (उत्तर प्रदेश), काकरापार (गुजरात), कैगा (कर्नाटक), कलपक्कम व कुडनकुलम (तमिलनाडु)" - ये भारत के प्रमुख परमाणु बिजली केंद्र हैं।

6. सुरक्षा पहलू: "विकिरण जोखिम + अपशिष्ट प्रबंधन + दुर्घटना नियंत्रण" - नाभिकीय ऊर्जा की चिंताओं को याद रखें।

7. तुलनात्मक तालिका: विखंडन और संलयन तथा अल्फा-बीटा-गामा की ऊपर दी गई तालिकाओं से दोहराएं।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •DNA की खोज 1953 में वॉटसन और क्रिक ने की; यह एक द्विकुण्डलित संरचना है।
  • •ISRO की स्थापना 1969 में हुई; चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की।
  • •भारत ने पहला परमाणु परीक्षण 1974 में 'स्माइलिंग बुद्धा' के नाम से पोखरण में किया।
  • •सुपर कंप्यूटर PARAM 8000 1991 में CDAC द्वारा विकसित किया गया — यह भारत का पहला स्वदेशी सुपर कंप्यूटर था।
  • •डेंगू एडीस मच्छर से फैलता है; वायरस DENV 1-4।
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आधिकारिक प्रश्नपत्रों के असली प्रश्न, उत्तर सहित।

  1. RAS 2016

    निम्नलिखित में से कौन भारतीय नौसेना की एक नाभिकीय शक्ति चालित पनडुब्बी है?

    1. (A) INS शिशुमार
    2. (B) INS शाल्की
    3. (C) INS चक्र
    4. (D) INS सिंधुवीर

    उत्तर: (C) INS चक्र

  2. RAS 2016

    राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लोकप्रियकरण हेतु सरकार ने राजस्थान में विज्ञान केंद्र एवं विज्ञान पार्क स्थापित किए हैं। उन सही स्थानों को पहचानिए जहां अब तक विज्ञान पार्क स्थापित किए गए हैं :

    1. (A) जयपुर, जोधपुर, कोटा
    2. (B) जयपुर, बीकानेर, झालरापाटन (झालावाड़)
    3. (C) जयपुर, नवलगढ़, झालरापाटन (झालावाड़)
    4. (D) जयपुर, नवलगढ़, कोटा

    उत्तर: (C) जयपुर, नवलगढ़, झालरापाटन (झालावाड़)