पारस्परिक व्यापार पर समझौते
26 फरवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
पारस्परिक व्यापार — दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे की वस्तुओं पर समान/परस्पर रियायतें या शुल्क।
क्या हुआ
पारस्परिक व्यापार (reciprocal trade) समझौतों की चर्चा हुई। पारस्परिक व्यापार का अर्थ है दो देशों द्वारा एक-दूसरे को समान/तुलनीय व्यापार रियायतें (टैरिफ में कमी, बाज़ार पहुँच) देना। 'पारस्परिक टैरिफ' की अवधारणा (जैसे अमेरिका द्वारा प्रस्तावित) कहती है कि कोई देश उतना ही शुल्क लगाएगा जितना उस पर लगाया जाता है। यह वैश्विक व्यापार तनाव, संरक्षणवाद व WTO के 'सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र' (MFN) सिद्धांत से जुड़ा है। भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौतों (FTA/CEPA) व निष्पक्ष, संतुलित व्यापार की वकालत करता है, अपने किसानों, MSME व रणनीतिक क्षेत्रों के हितों की रक्षा करते हुए।
मुख्य तथ्य
- 1पारस्परिक व्यापार समझौते।
- 2समान/तुलनीय व्यापार रियायतें।
- 3'पारस्परिक टैरिफ' — बराबर शुल्क।
- 4WTO का MFN सिद्धांत; संरक्षणवाद।
- 5भारत — FTA/CEPA व संतुलित व्यापार।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
पारस्परिक टैरिफ, FTA व व्यापार वार्ता अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: पारस्परिक टैरिफ — बराबर शुल्क। WTO — MFN सिद्धांत। FTA/CEPA। संरक्षणवाद बनाम मुक्त व्यापार। भारत — संतुलित व्यापार।