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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

सेंसरशिप व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में संतुलन

6 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

सेंसरशिप — अनुच्छेद 19(2) के 'उचित प्रतिबंधों' से बंधी; धारा 69A सरकार को ब्लॉक का अधिकार।

क्या हुआ

सेंसरशिप व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर बहस चर्चा में रही। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) वाक् व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, किंतु अनुच्छेद 19(2) के तहत राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता, न्यायालय अवमानना, मानहानि आदि आधार पर 'उचित प्रतिबंध' लगाए जा सकते हैं। डिजिटल युग में OTT, सोशल मीडिया व AI-जनित सामग्री ने इस संतुलन को जटिल बनाया है। न्यायपालिका प्रायः प्रतिबंधों की 'आनुपातिकता' की जाँच करती है। लोकतंत्र में स्वतंत्र अभिव्यक्ति आवश्यक है, पर निरंकुश नहीं।

मुख्य तथ्य

  1. 1सेंसरशिप बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संतुलन।
  2. 2अनुच्छेद 19(1)(a) — वाक् स्वतंत्रता।
  3. 3अनुच्छेद 19(2) — 8 आधारों पर उचित प्रतिबंध।
  4. 4डिजिटल युग — OTT, सोशल मीडिया, AI सामग्री।
  5. 5आनुपातिकता का सिद्धांत; शेरिया सिंघल वाद।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

अनुच्छेद 19(2), धारा 69A/79, श्रेया सिंघल व आनुपातिकता परीक्षण राजव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: अनुच्छेद 19(1)(a) — वाक् स्वतंत्रता; 19(2) — उचित प्रतिबंध। आनुपातिकता का सिद्धांत। IT नियम 2021 (OTT/सोशल मीडिया)। शेरिया बनाम भारत संघ (धारा 66A रद्द)।

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