16 फरवरी 2026 · 16 February 2026विज्ञान
कैरालिटी-आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स
Chirality-based electronics
कैरालिटी — किसी अणु का अपने दर्पण-प्रतिबिंब पर अध्यारोपित न हो पाना ('बाएं/दाएं' हस्तता)।
मुख्य तथ्य
- •चिरैलिटी-आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स।
- •चिरैलिटी — दर्पण-प्रतिबिंब पर अध्यारोपित न होना।
- •चिरल अणुओं से इलेक्ट्रॉन स्पिन नियंत्रण (CISS)।
- •स्पिनट्रॉनिक्स; कम-ऊर्जा उपकरण; क्वांटम।
- •उन्नत पदार्थ-विज्ञान; अगली पीढ़ी की तकनीक।
'चिरैलिटी-आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स' (chirality-based electronics) की चर्चा हुई। 'चिरैलिटी' (हस्तीयता/chirality) किसी वस्तु का वह गुण है जिसमें वह अपने दर्पण-प्रतिबिंब पर अध्यारोपित (superimpose) नहीं हो सकती (जैसे बाएँ व दाएँ हाथ)। आणविक स्तर पर कुछ अणु 'चिरल' होते हैं। चिरैलिटी-आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स (जैसे 'चिरल-प्रेरित स्पिन चयनात्मकता' — CISS प्रभाव) इलेक्ट्रॉनों के 'स्पिन' को चिरल अणुओं के माध्यम से नियंत्रित करता है, जो स्पिनट्रॉनिक्स, अधिक कुशल/कम-ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, क्वांटम कंप्यूटिंग व आणविक इलेक्ट्रॉनिक्स में नई संभावनाएँ खोलता है। यह उन्नत पदार्थ-विज्ञान व अगली पीढ़ी की तकनीक का अग्रिम-क्षेत्र है। यह विज्ञान व प्रौद्योगिकी से जुड़ा है। यह विज्ञान से जुड़ा है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
कैरालिटी, स्पिनट्रॉनिक्स व उन्नत सामग्री विज्ञान में पूछे जाते हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
चिरैलिटी — दर्पण-प्रतिबिंब पर अध्यारोपित न होने का गुण (बाएँ/दाएँ हाथ)। CISS प्रभाव — इलेक्ट्रॉन स्पिन नियंत्रण। स्पिनट्रॉनिक्स; क्वांटम कंप्यूटिंग।
✨ RajAI— RAS Prelims Expert