13 जनवरी 2026 · 13 January 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण
घास के मैदानों का संरक्षण
Conservation of grasslands
घास के मैदान — महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र; अक्सर 'बंजर भूमि' मानकर उपेक्षित।
मुख्य तथ्य
- •घास के मैदानों का संरक्षण।
- •जैव विविधता — गोडावण, काला हिरण, भेड़िया, गिद्ध।
- •'बंजर भूमि' की गलत धारणा से उपेक्षा।
- •खतरे — गलत वनरोपण, अति-चराई, प्रोसोपिस।
- •राजस्थान — थार घास-मैदान, गोडावण, ओरण।
घास के मैदानों (grasslands) के संरक्षण की चर्चा हुई। घास के मैदान (सवाना, चरागाह, घास-भूमि) महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो अद्वितीय जैव विविधता (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड/गोडावण, काला हिरण, भेड़िया, गिद्ध), पशुधन चराई व कार्बन भंडारण का आधार हैं। भारत में इन्हें प्रायः 'बंजर भूमि' (wasteland) मानकर उपेक्षित किया जाता है — इन पर वनरोपण (गलत वृक्षारोपण), अतिक्रमण, अति-चराई व आक्रामक प्रजातियों (प्रोसोपिस) का दबाव है। संरक्षण उपाय — घास-मैदान को अलग पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में मान्यता, सामुदायिक प्रबंधन (ओरण/गौचर) व प्रजाति-संरक्षण। राजस्थान में थार के घास-मैदान, गोडावण व ओरण प्रासंगिक हैं। यह जैव विविधता संरक्षण से जुड़ा है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
घास के मैदान, GIB व चरागाह पारिस्थितिकी पर्यावरण में महत्वपूर्ण हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
घास के मैदान — सवाना/चरागाह; गोडावण, काला हिरण, भेड़िया। 'बंजर भूमि' की गलत धारणा। राजस्थान — थार, ओरण/गौचर। प्रोसोपिस खतरा।
✨ RajAI— RAS Prelims Expert