घास के मैदानों का परिचय
घास के मैदान विस्तृत पारिस्थितिक तंत्र हैं जो घास और शाकाहारी पौधों से प्रभुक्त होते हैं और जिनमें पेड़ों का न्यूनतम कवर होता है। ये प्राकृतिक परिदृश्य पृथ्वी की स्थलीय सतह के लगभग 26% को कवर करते हैं और जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। घास के मैदान मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों में विकसित होते हैं, आमतौर पर प्रति वर्ष 250-900 मिलीमीटर वर्षा होती है। ये जंगलों और रेगिस्तानों के बीच संक्रमण क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों की विशेषता आवधिक वनस्पति अग्नि, बड़े शाकाहारी जानवरों द्वारा चराई, और वनस्पति में मौसमी परिवर्तन हैं। घास के मैदान महत्वपूर्ण कृषि गतिविधियों, पशुधन पालन का समर्थन करते हैं और खुले वातावरण के अनुकूल विभिन्न पौधों और जानवरों की प्रजातियों का घर हैं।
घास के मैदानों की मुख्य अवधारणाएं
1. सवाना
सवाना उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय घास के मैदान हैं जिनमें बिखरे हुए पेड़ और झाड़ियां होती हैं। इन्हें वार्षिक 500-1500 मिलीमीटर वर्षा मिलती है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के हिस्सों में पाए जाते हैं। सवाना विभिन्न वन्यजीवन का समर्थन करते हैं जिनमें शेर, हाथी, जेब्रा और जिराफ शामिल हैं। वनस्पति गहरी जड़ों वाली घास और सूखा-प्रतिरोधी पेड़ों के साथ मौसमी सूखे के अनुकूल होती है।
2. स्टेप्पे
स्टेप्पे अर्ध-शुष्क घास के मैदान हैं जिनमें विरल वनस्पति होती है और ये समशीतोष्ण क्षेत्रों में स्थित हैं। इन्हें प्रति वर्ष 250-500 मिलीमीटर वर्षा मिलती है और ये मध्य एशिया, रूस और उत्तरी अमेरिका में पाए जाते हैं। स्टेप्पे अत्यधिक तापमान भिन्नता का अनुभव करते हैं और छोटी घास और सूखा-प्रतिरोधी पौधों से प्रभुक्त हैं। यूरेशियाई स्टेप्पे विश्व के सबसे बड़े निरंतर घास के मैदान पारिस्थितिक तंत्र में से एक है।
3. प्रेयरीज़
प्रेयरीज़ समशीतोष्ण घास के मैदान हैं जो मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका में पाए जाते हैं। ये लंबी, पोषक तत्वों से भरपूर घास की विशेषता रखते हैं और आवधिक वनस्पति अग्नि से प्रभावित होते हैं। इन्हें प्रति वर्ष 500-900 मिलीमीटर वर्षा मिलती है और गहरी, उपजाऊ मिट्टियां कृषि के लिए आदर्श हैं। भैंस, प्रेयरी कुत्ते और अनेक वाइल्डफ्लावर इन घास के मैदानों में पाई जाती हैं।
4. पम्पास
पम्पास दक्षिण अमेरिका में स्थित समशीतोष्ण घास के मैदान हैं, विशेषकर अर्जेंटीना, ब्राजील और उरुग्वे में। ये समतल भू-भाग की विशेषता रखते हैं और इनमें कोई पेड़ नहीं होते। इन्हें प्रति वर्ष 750-1200 मिलीमीटर वर्षा मिलती है। पम्पास की मिट्टियां अत्यंत उपजाऊ हैं, जो कृषि और पशुधन पालन के लिए आदर्श है।
5. वेल्ड्स
वेल्ड्स दक्षिणी अफ्रीका में पाई जाने वाली उपोष्णकटिबंधीय घास के मैदान हैं। ये लहरदार भू-भाग और बिखरी हुई वनस्पति की विशेषता रखते हैं। इन्हें 500-1000 मिलीमीटर वार्षिक वर्षा मिलती है। वेल्ड्स विभिन्न वन्यजीवन और चरवाहा गतिविधियों का समर्थन करते हैं।
घास के मैदानों के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य
- घास के मैदान पृथ्वी की स्थलीय सतह के लगभग 26% को कवर करते हैं और लगभग 1 बिलियन लोगों का समर्थन करते हैं
- सेरेंगेटी अफ्रीका में अपनी वार्षिक वनस्पति प्रवास के लिए प्रसिद्ध है जिसमें 1.5 मिलियन जानवर शामिल होते हैं
- अफ्रीकी सवाना घास के मैदान "बिग फाइव" वन्यजीवन का घर हैं: शेर, हाथी, भैंस, तेंदुए और गैंडे
- घास के मैदान अपनी मिट्टियों में महत्वपूर्ण मात्रा में कार्बन संचित करते हैं और जलवायु विनियमन के लिए महत्वपूर्ण हैं
- उत्तरी अमेरिका के महान मैदानों में कभी 30-60 मिलियन भैंस होते थे, मानव शिकार से पहले
- प्राकृतिक वनस्पति अग्नि बीज अंकुरण को बढ़ावा देती है और वुडी पौधों के आक्रमण को रोकती है
- भारत के घास के मैदानों में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, हेमिस राष्ट्रीय उद्यान और हिमालय में विभिन्न अल्पाइन घास के मैदान शामिल हैं
- घास के मैदान की मिट्टियां पृथ्वी पर सबसे उपजाऊ हैं, घास के विघटन से जैविक पदार्थ के संचय के कारण
- अत्यधिक चराई और अस्थिर भूमि उपयोग प्रथाएं वैश्विक घास के मैदानों के 30% को खतरे में डालती हैं
- घास के मैदान अफ्रीकी बड़े शाकाहारियों के लगभग 80% और कई स्थानिक पौधों की प्रजातियों का समर्थन करते हैं
भारतीय भूगोल में घास के मैदान
भारत में उष्णकटिबंधीय सवाना से लेकर अल्पाइन घास के मैदान तक विविध घास के मैदान पारिस्थितिक तंत्र हैं। दक्कन पठार प्राकृतिक घास के मैदानों का समर्थन करता है, जबकि हिमालयी क्षेत्र महत्वपूर्ण अल्पाइन घास के मैदान युक्त हैं। असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान भारतीय गैंडों के लिए प्रसिद्ध एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। तराई क्षेत्र बाघ, जंगली हाथी और गैंडे की आबादी का समर्थन करने वाली घास के मैदान युक्त हैं।
परीक्षा के टिप्स
- पाँच प्रमुख घास के मैदान प्रकारों को उनके स्थान, वर्षा और विशेषताओं के साथ याद करें
- घास के मैदानों को जलवायु क्षेत्रों से जोड़ें - वर्षा और वनस्पति प्रकार के बीच संबंध को समझें
- प्रत्येक घास के मैदान प्रकार से जुड़ी वन्यजीव प्रजातियों का अध्ययन करें
- भारतीय घास के मैदानों और उनकी संरक्षण स्थिति पर ध्यान केंद्रित करें
- प्राकृतिक घास के मैदानों और मानव गतिविधियों द्वारा बनाए गए चरागाहों के बीच अंतर समझें
- घास के मैदानों को मानव गतिविधियों से जोड़ें: कृषि, पशुधन पालन और संरक्षण चुनौतियां
- मानचित्र अभ्यास करें और प्रमुख घास के मैदान क्षेत्रों को वैश्विक और भारत में स्थित करें
- पर्यावरणीय समस्याओं की समीक्षा करें: मरुस्थलीकरण, अत्यधिक चराई और घास के मैदान का ह्रास
प्रत्येक घास के मैदान का नाम उसके मूल शब्द के आधार पर उसके महाद्वीप से जोड़ा जा सकता है। प्रेयरी एक फ्रेंच मूल का शब्द है जो उत्तरी अमेरिका के घास के मैदानों के लिए प्रयोग होता है। पम्पास दक्षिण अमेरिकी शब्द है जो अर्जेंटीना, ब्राजील और उरुग्वे के समतल घास के मैदानों के लिए प्रयोग होता है। स्टेप्पे मध्य एशिया और रूस के घास के मैदानों से जुड़ा शब्द है। सवाना को अफ्रीका के साथ याद रखना सबसे आसान है, क्योंकि अफ्रीकी सवाना सबसे विस्तृत हैं, हालांकि सवाना दक्षिण अमेरिका और एशिया के कुछ हिस्सों में भी पाए जाते हैं। वेल्ड एक अफ्रीकांस/डच शब्द है जिसका अर्थ "मैदान" है, जो दक्षिणी अफ्रीका के घास के मैदानों के लिए प्रयोग होता है। याद रखने का क्रम: प्रेयरी-उत्तरी अमेरिका, पम्पास-दक्षिण अमेरिका, स्टेप्पे-मध्य एशिया/रूस, सवाना-अफ्रीका (मुख्यतः), वेल्ड-दक्षिणी अफ्रीका।
सवाना एक उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय घास का मैदान है जिसमें बिखरे हुए पेड़ और झाड़ियां होती हैं, इसे तुलनात्मक रूप से अधिक वार्षिक वर्षा (500-1500 मिलीमीटर) मिलती है, और यह शेर, हाथी, जेब्रा और जिराफ जैसे प्रसिद्ध अफ्रीकी वन्यजीवन का समर्थन करता है। दूसरी ओर, प्रेयरी, स्टेप्पे और पम्पास समशीतोष्ण घास के मैदान हैं जो लगभग वृक्षरहित होते हैं। इनमें स्टेप्पे सबसे शुष्क है (250-500 मिलीमीटर वर्षा), प्रेयरी को 500-900 मिलीमीटर और पम्पास को 750-1200 मिलीमीटर वर्षा मिलती है। सरल पहचान: बिखरे पेड़ और शेर-जिराफ जैसा उष्णकटिबंधीय वन्यजीवन हो तो सवाना समझें; समशीतोष्ण जलवायु में लगभग वृक्षरहित घास का मैदान हो तो प्रेयरी, स्टेप्पे या पम्पास समझें।
प्रश्न 1. कौन सा घास का मैदान मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका में पाया जाता है और लंबी, पोषक तत्वों से भरपूर घास तथा गहरी उपजाऊ मिट्टी की विशेषता रखता है, जिसका सबसे विस्तृत उदाहरण महान मैदान (Great Plains) है?
✅ प्रेयरी। प्रेयरी उत्तरी अमेरिका के समशीतोष्ण घास के मैदान हैं जिनमें लंबी घास, आवधिक वनस्पति अग्नि और गहरी उपजाऊ मिट्टियां होती हैं, जो अब अधिकतर कृषि के लिए उपयोग की जाती हैं।
प्रश्न 2. जलवायु वर्गीकरण की दृष्टि से सवाना, प्रेयरी से किस प्रकार भिन्न है?
✅ सवाना एक उष्णकटिबंधीय/उपोष्णकटिबंधीय घास का मैदान है, जबकि प्रेयरी एक समशीतोष्ण घास का मैदान है। सवाना को प्रेयरी (500-900 मिलीमीटर) की तुलना में अधिक वर्षा (500-1500 मिलीमीटर) मिलती है और इसमें बिखरे हुए पेड़ होते हैं, जबकि प्रेयरी लगभग वृक्षरहित होती है।
प्रश्न 3. शेर, हाथी, जेब्रा और जिराफ जैसे वन्यजीवन का घर कौन सा घास का मैदान है?
✅ सवाना। उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय सवाना, विशेषकर अफ्रीका में, इस प्रसिद्ध वन्यजीवन के साथ-साथ गहरी जड़ों वाली घास और सूखा-प्रतिरोधी पेड़ों का भी समर्थन करते हैं जो मौसमी सूखे के अनुकूल हैं।
प्रश्न 4. अर्जेंटीना, ब्राजील और उरुग्वे में पाया जाने वाला कौन सा घास का मैदान समतल, वृक्षरहित भू-भाग और अत्यंत उपजाऊ मिट्टी के लिए जाना जाता है, जो पशुधन पालन और गेहूं की खेती के लिए उपयोग होता है?
✅ पम्पास। ये दक्षिण अमेरिकी समशीतोष्ण घास के मैदान वार्षिक 750-1200 मिलीमीटर वर्षा प्राप्त करते हैं और विश्व के सबसे कृषि-उत्पादक घास के मैदानों में से हैं।
प्रश्न 5. कौन सा घास का मैदान अर्ध-शुष्क है, जिसे वार्षिक केवल लगभग 250-500 मिलीमीटर वर्षा मिलती है, और जो मध्य एशिया तथा रूस में पाया जाता है, जो ऐतिहासिक रूप से खानाबदोश चराई के लिए महत्वपूर्ण रहा है?
✅ स्टेप्पे। स्टेप्पे यहां चर्चा किए गए प्रमुख घास के मैदान प्रकारों में सबसे शुष्क है, जिसमें छोटी घास और सूखा-प्रतिरोधी पौधों का प्रभुत्व है, और यूरेशियाई स्टेप्पे विश्व के सबसे बड़े निरंतर घास के मैदान पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है।
सारांश
घास के मैदान महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र हैं जो पृथ्वी की सतह के 26% को कवर करते हैं, और ये घास-प्रभुक्त वनस्पति और न्यूनतम पेड़ों की विशेषता रखते हैं। प्रमुख प्रकारों में सवाना (उष्णकटिबंधीय), स्टेप्पे (अर्ध-शुष्क समशीतोष्ण), प्रेयरीज़ (समशीतोष्ण उत्तरी अमेरिका), पम्पास (दक्षिण अमेरिकी समशीतोष्ण) और वेल्ड्स (उपोष्णकटिबंधीय अफ्रीका) शामिल हैं। ये पारिस्थितिक तंत्र विशाल जैव विविधता का समर्थन करते हैं, चरवाहा और कृषि गतिविधियों को बनाए रखते हैं, और कार्बन चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत के घास के मैदान, जिनमें काजीरंगा और हिमालयी घास के मैदान शामिल हैं, महत्वपूर्ण संरक्षण क्षेत्र हैं। RPSC RAS प्रीलिम्स सफलता के लिए घास के मैदान भूगोल, वितरण, विशेषताओं और संबंधित वनस्पति-जीव को समझना आवश्यक है।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •थार मरुस्थल विश्व का 9वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है; यह राजस्थान के पश्चिमी भाग में है।
- •चंबल नदी राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी है; यह यमुना में मिलती है।
- •भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून में केरल पहुंचता है; यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से आता है।
- •कर्क रेखा (23.5°N) राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से गुजरती है।
- •मकराना (नागौर) का सफेद संगमरमर ताजमहल में प्रयुक्त।