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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

भारत में शराब निषेध पर संवैधानिक और कानूनी ढांचा

20 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

Article 47 और Entry 8 भारत में शराब विनियमन का संवैधानिक आधार प्रदान करते हैं।

क्या हुआ

अनुच्छेद 47 राज्य को जनता के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार के लिए निर्देश देता है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीली चीजों के सेवन पर निषेध लगाने की वकालत करता है। राज्य सूची की प्रविष्टि 8 शराब के उत्पादन, निर्माण, परिवहन और बिक्री पर राज्य विधानमंडल का एकमात्र अधिकार देती है। सर्वोच्च न्यायालय ने निरंतर माना है कि शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है। बिहार का अनुभव दिखाता है कि पूर्ण निषेध से महिलाओं के विरुद्ध हिंसा में कमी आई, लेकिन अवैध बाजार, तस्करी और राजस्व हानि की गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुईं।

मुख्य तथ्य

  1. 1अनुच्छेद 47 राज्य को मादक पदार्थों के निषेध पर कार्य करने का निर्देश देता है
  2. 2राज्य सूची की प्रविष्टि 8 शराब के सभी पहलुओं पर राज्य विधानमंडल को एकमात्र अधिकार देती है
  3. 3सर्वोच्च न्यायालय ने खोडय डिस्टिलरीज बनाम कर्नाटक (1994) में शराब व्यापार को मौलिक अधिकार से बाहर रखा
  4. 4बिहार का 2016 निषेध महिला हिंसा में कमी दिखाता है परंतु अवैध बाजार और राजस्व हानि लाता है

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

राज्य सूची की प्रविष्टि 8 के तहत शराब विनियमन में राज्य की संवैधानिक भूमिका और नीति निर्माण में संतुलन की आवश्यकता।

स्थायी GK: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची केंद्र, राज्य और समवर्ती सूचियों में विभाजित है।

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