विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश
25 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम · सरकारी स्रोत से तथ्य मिलाए गए
याद रखें · एक पंक्ति में
FCRA संशोधन विधेयक 2026 (25 मार्च, लोकसभा) — विदेशी निधि से बनी संपत्तियों हेतु नामित प्राधिकरण; अधिकतम सज़ा 5 से 1 वर्ष।
क्या हुआ
यह विधेयक विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन हेतु 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश हुआ। जिन संस्थाओं का FCRA पंजीकरण रद्द, समर्पित या समाप्त हो जाए, उनकी विदेशी निधि और उससे बनी संपत्ति पहले अस्थायी रूप से एक 'नामित प्राधिकरण' के पास जाएगी; पंजीकरण बहाल होने पर लौटा दी जाएगी, अन्यथा सार्वजनिक प्रयोजन में लगेगी। पूजा-स्थल होने पर उसका धार्मिक स्वरूप बना रहेगा। संस्था के अपराध के लिए प्रमुख पदाधिकारी भी उत्तरदायी होंगे। अधिकतम कारावास पाँच वर्ष से घटाकर एक वर्ष किया गया है।
मुख्य तथ्य
- 1लोकसभा में प्रस्तुत: 25 मार्च 2026 (विधेयक संख्या 97)
- 2पंजीकरण खोने पर संपत्ति 'नामित प्राधिकरण' के पास
- 3प्रमुख पदाधिकारी संस्था के अपराध हेतु उत्तरदायी
- 4अधिकतम कारावास 5 वर्ष से घटकर 1 वर्ष
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
प्रश्न आ सकता है कि FCRA संशोधन विधेयक 2026 में 'नामित प्राधिकरण' की भूमिका क्या है या अधिकतम सज़ा में क्या बदलाव हुआ।
स्थायी GK: FCRA, 2010 का प्रशासन गृह मंत्रालय करता है; पंजीकरण पाँच वर्ष के लिए वैध होता है और विदेशी अंशदान पहले SBI की नई दिल्ली मुख्य शाखा के FCRA खाते में ही लेना होता है।