राजकोषीय घाटा
1 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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राजकोषीय घाटा — कुल व्यय व कुल राजस्व (उधारी छोड़कर) का अंतर; 2025-26 लक्ष्य 4.4% GDP।
क्या हुआ
राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) की चर्चा हुई। राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय व कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) के बीच का अंतर है — यह दर्शाता है कि सरकार को कितना उधार लेना पड़ता है। इसे GDP के प्रतिशत के रूप में मापा जाता है। उच्च राजकोषीय घाटा ऋण-बोझ, ब्याज भुगतान व मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ाता है, जबकि नियंत्रित घाटा राजकोषीय स्थिरता दर्शाता है। राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 घाटे को कम करने के लक्ष्य तय करता है। यह बजट का एक प्रमुख संकेतक है।
मुख्य तथ्य
- 1राजकोषीय घाटा।
- 2कुल व्यय − कुल प्राप्तियाँ (उधार छोड़कर)।
- 3उधार की मात्रा दर्शाता है; GDP के % में।
- 4उच्च घाटा — ऋण-बोझ व मुद्रास्फीति दबाव।
- 5FRBM अधिनियम 2003 — घाटा कम करने के लक्ष्य।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
राजकोषीय घाटा, FRBM अधिनियम व राजस्व घाटा अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: राजकोषीय घाटा — कुल व्यय − कुल प्राप्तियाँ (उधार छोड़कर)। GDP के % में। राजस्व घाटा; प्राथमिक घाटा। FRBM अधिनियम 2003।