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राजकोषीय नीति: बजट, घाटे, FRBM, वित्त आयोग

Fiscal Policy — Budget, Deficit and Fiscal Federalism in India

⏱ 16 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: अगस्त 2026· Economic Concepts and Indian Economy

परिचय

राजकोषीय नीति और बजट, RAS प्रारंभिक परीक्षा के आर्थिक भाग में मौद्रिक नीति जितना ही भारी विषय है — फ़र्क़ यह है कि यहाँ संवैधानिक अनुच्छेद (112, 202, 280 आदि), घाटे के सूत्र, और हर साल बदलने वाले बजट व वित्त आयोग के आँकड़े एक साथ पूछे जाते हैं। राजकोषीय नीति सरकार की वह नीति है जिसके ज़रिए वह अपने राजस्व (कर) और व्यय के माध्यम से अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है — यह मौद्रिक नीति से भिन्न है, क्योंकि इसे RBI नहीं, वित्त मंत्रालय क्रियान्वित करता है, और इसका प्रभाव धीमा पर व्यापक (रोज़गार, वितरण) होता है, जबकि मौद्रिक नीति का प्रभाव तेज़ पर सीमित (मूल्य-स्थिरता) होता है।

मुख्य अवधारणाएँ

1. राजकोषीय नीति के घटक एवं प्रकार

राजकोषीय नीति के चार मुख्य घटक हैं — कराधान (प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष करों से राजस्व-संग्रह), सरकारी व्यय (विकास, कल्याण व सुरक्षा पर खर्च), निवेश/विनिवेश (सार्वजनिक उपक्रमों में निवेश या हिस्सेदारी बेचना), और ऋण प्रबंधन (घरेलू व विदेशी उधारी का प्रबंधन)। स्वभाव के आधार पर यह विस्तारवादी (व्यय बढ़ाना/कर घटाना — मंदी में वृद्धि बढ़ाने हेतु) या संकुचनकारी (व्यय घटाना/कर बढ़ाना — मुद्रास्फीति नियंत्रण हेतु) हो सकती है; तथा चक्र के संबंध में यह चक्रानुवर्ती (Pro-cyclical) (आर्थिक चक्र के साथ चलना, जो अस्थिरता बढ़ाता है) या प्रति-चक्रीय (Counter-cyclical) (चक्र के विपरीत चलना, जो अनुशंसित व अस्थिरता-न्यूनक है) हो सकती है।

2. बजट — संवैधानिक प्रावधान एवं दस्तावेज़

केंद्रीय बजट (वार्षिक वित्तीय विवरण) का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 112 है, जबकि राज्य बजट के लिए अनुच्छेद 202 लागू होता है। संबद्ध प्रावधानों में अनुच्छेद 110 (धन विधेयक), अनुच्छेद 113 (अनुदान माँगें) और अनुच्छेद 114 (विनियोग विधेयक) शामिल हैं। बजट के साथ प्रस्तुत मुख्य दस्तावेज़ों में वार्षिक वित्तीय विवरण (AFS), धन विधेयक (नए कर-प्रस्ताव, अनुच्छेद 110), विनियोग विधेयक (संचित निधि से निकासी का प्राधिकार), FRBM दस्तावेज़ (व्यापक आर्थिक ढाँचा, मध्यम अवधि राजकोषीय नीति व राजकोषीय नीति कार्यनीति विवरण) और व्याख्यात्मक ज्ञापन शामिल हैं। भारत के बजट-इतिहास के मील के पत्थर हैं — 1860 का पहला बजट (जेम्स विल्सन), 1947 का स्वतंत्र भारत का पहला बजट (आर.के. षण्मुखम चेट्टी), 1970-71 की पहली महिला बजट प्रस्तोता (इंदिरा गांधी), 1986-87 में शून्य-आधारित बजट की शुरुआत, 2005-06 में लिंग व परिणाम बजट की शुरुआत, 2017 में रेल बजट का आम बजट में विलय (अब बजट 1 फरवरी को प्रस्तुत होता है), और 2021-22 का पहला पेपरलेस (डिजिटल) बजट।

अनुच्छेदप्रावधान
110धन विधेयक
112केंद्रीय बजट (वार्षिक वित्तीय विवरण)
113अनुदान माँगें
114विनियोग विधेयक
202राज्य बजट
246केंद्र/राज्य/समवर्ती सूचियाँ
265कानून के बिना कोई कर नहीं
268-293केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
275वैधानिक/अनिवार्य अनुदान
280वित्त आयोग
282विवेकाधीन अनुदान

3. राजस्व बनाम पूँजी बजट

राजस्व बजट में सरकार की चालू (Recurring) प्राप्तियाँ (कर + गैर-कर राजस्व) और चालू व्यय (वेतन, पेंशन, सब्सिडी, ब्याज) शामिल होते हैं, जिनसे कोई परिसंपत्ति नहीं बनती। पूँजी बजट में दीर्घकालिक (Non-Recurring) प्राप्तियाँ (उधारी + विनिवेश + ऋण-वसूली) और पूँजीगत व्यय (परिसंपत्ति-निर्माण, ऋण-चुकौती) शामिल होते हैं, जिनसे सड़क, बंदरगाह जैसी परिसंपत्तियाँ बनती हैं।

4. सरकारी घाटे के प्रकार एवं सूत्र

घाटे को मापने के कई ढंग हैं, जिनके सूत्र परीक्षा में सीधे पूछे जाते हैं — राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ (दर्शाता है कि सरकार चालू खर्च के लिए भी उधार ले रही है); प्रभावी राजस्व घाटा (ERD) = राजस्व घाटा − पूँजीगत परिसंपत्ति-निर्माण हेतु राज्यों को दिया गया अनुदान (बजट 2011-12 में रंगराजन समिति की सिफारिश पर पेश); राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियाँ) — यह सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है और इसे 1997-98 से "बजट घाटे" (= कुल व्यय − कुल प्राप्तियाँ) के स्थान पर मानक माना जाता है; तथा प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान (पिछले ऋणों को छोड़कर चालू वित्त-प्रबंधन की स्थिति दर्शाता है)। ध्यान दें कि यदि प्राथमिक घाटा शून्य है, तो राजकोषीय घाटा पूर्णतः ब्याज भुगतान के बराबर होगा।

घाटों की शृंखला
  1. राजस्व घाटाराजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ
  2. प्रभावी राजस्व घाटाराजस्व घाटा − पूँजी-निर्माण हेतु अनुदान
  3. राजकोषीय घाटाकुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियाँ)
  4. प्राथमिक घाटाराजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान

5. घाटे की वित्त-व्यवस्था एवं सार्वजनिक ऋण

घाटे को पाटने के तरीकों में आंतरिक उधारी (G-Secs, T-Bills जारी करना), मुद्रण/मुद्रीकरण (RBI से उधार, वर्तमान में FRBM के तहत प्रतिबंधित), विदेशी सहायता व बाह्य उधारी (IMF, विश्व बैंक, ADB) शामिल हैं। जब सरकार अधिक उधार लेती है तो बाज़ार में ब्याज दरें बढ़ जाती हैं, जिससे निजी निवेश महँगा व सीमित हो जाता है — इसे क्राउडिंग-आउट प्रभाव (Crowding Out Effect) कहा जाता है, जो अत्यधिक राजकोषीय घाटे का एक बड़ा जोखिम है। सार्वजनिक ऋण को आंतरिक (G-Secs, T-Bills, बाज़ार उधारी, तथा केंद्र-राज्य नकदी-प्रवाह मिसमैच पाटने हेतु RBI से मिलने वाला Ways and Means Advances/WMA — जो 1997 में पुराने Ad-hoc T-Bills की जगह लाया गया; इसकी सीमा RBI सरकार से परामर्श कर हर छमाही तय करता है) और बाह्य (बहुपक्षीय, द्विपक्षीय, वाणिज्यिक उधारी, निर्यात साख एजेंसियाँ) में बाँटा जाता है। ऑफ-बजट उधारी — जैसे FCI, NHAI की सरकार-प्रायोजित उधारी — बैलेंस शीट या राजकोषीय घाटे में नहीं दिखती, इसलिए यह पारदर्शिता कम करती है, भले ही वास्तविक राजकोषीय भार बढ़ाती है।

6. FRBM अधिनियम, 2003 एवं NK सिंह समिति के लक्ष्य

राजकोषीय अनुशासन लागू करने हेतु बना वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003, राष्ट्रीय आपदा/सुरक्षा संकट जैसी स्थितियों के लिए "एस्केप क्लॉज़" के साथ आता है; इस छूट की सीमा 0.5% GDP तक रखने की सिफारिश NK सिंह समिति ने की, जो 2018 के संशोधन से लागू हुई। NK सिंह समिति (2017) ने सुझाव दिया था कि राजकोषीय घाटा 2020-21 से 2022-23 तक 3% GDP रहे, राजस्व घाटा 2022-23 तक घटाकर 0.8% GDP किया जाए, और केंद्र-राज्य का कुल सार्वजनिक ऋण 60% GDP (केंद्र 40%, राज्य 20%) तक सीमित रहे; नए 2025 लक्ष्य के अनुसार 2030-31 तक ऋण-GDP अनुपात 50%±1% रखा जाना है (2026-27 के बजट अनुमान में राजकोषीय घाटा 4.3% GDP रखा गया है)।

7. राजकोषीय संघवाद एवं वित्त आयोग

राजकोषीय संघवाद केंद्र व राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों व ज़िम्मेदारियों के विभाजन की व्यवस्था है, जिसके प्रमुख संवैधानिक आधार हैं — अनुच्छेद 265 (कानून के बिना कोई कर नहीं), अनुच्छेद 246 (केंद्र/राज्य/समवर्ती सूचियाँ), अनुच्छेद 268-293 (केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध), अनुच्छेद 280 (वित्त आयोग), अनुच्छेद 275 (वैधानिक/अनिवार्य अनुदान) और अनुच्छेद 282 (विवेकाधीन अनुदान)। GST लागू होने (101वाँ संविधान संशोधन, 2016) के बाद राजस्व-स्रोतों का बँटवारा बदल गया — केंद्र के पास आयकर, सीमा शुल्क, निगम कर, CGST व अंतर-राज्य IGST रहते हैं, जबकि राज्यों के पास SGST, राज्य उत्पाद शुल्क, स्टाम्प ड्यूटी व भू-राजस्व। अनुच्छेद 280 के अंतर्गत हर 5 वर्ष में राष्ट्रपति द्वारा वित्त आयोग गठित होता है (पहला वित्त आयोग: अध्यक्ष के.सी. नियोगी, 1952-57)। वर्तमान 16वाँ वित्त आयोग (अध्यक्ष: डॉ. अरविंद पनगड़िया, कार्यकाल 2026-31) ने राज्यों की ऊर्ध्वाधर हिस्सेदारी 41% पर बरकरार रखी है (15वें वित्त आयोग के समान), लेकिन क्षैतिज बँटवारे के मानदंडों में बदलाव किया है — "कर एवं राजकोषीय प्रयास" मानदंड (2.5%) पूरी तरह हटाकर एक नया "GDP योगदान" मानदंड (10%) जोड़ा गया है, जबकि आय-दूरी (42.5%), जनसंख्या-2011 (17.5%), जनसांख्यिकीय प्रदर्शन (10%), क्षेत्र (10%) व वन-पारिस्थितिकी (10%) अन्य मानदंड बने हुए हैं। 16वें वित्त आयोग ने 5 वर्षों के लिए कुल ₹9.47 लाख करोड़ के अनुदान की सिफारिश की है, जिसमें ग्रामीण व शहरी स्थानीय निकायों को क्रमशः ₹4.4 लाख करोड़ व ₹3.6 लाख करोड़ (मूल:निष्पादन अनुपात 80:20) शामिल है।

मानदंड (क्षैतिज बँटवारा)15वाँ वित्त आयोग16वाँ वित्त आयोग
आय-दूरी45%42.5%
जनसंख्या15% (2011)17.5% (2011)
जनसांख्यिकीय प्रदर्शन12.5%10%
क्षेत्र15%10%
वन एवं पारिस्थितिकी10%10%
कर एवं राजकोषीय प्रयास2.5%हटाया गया
GDP योगदान—10% (नया)
राज्यों की ऊर्ध्वाधर हिस्सेदारी41%41%

महत्वपूर्ण तथ्य

  • अनुच्छेद 112 — केंद्रीय बजट; अनुच्छेद 202 — राज्य बजट; अनुच्छेद 110 — धन विधेयक; अनुच्छेद 280 — वित्त आयोग।
  • राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियाँ); प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान।
  • 1997-98 से "बजट घाटा" के स्थान पर "राजकोषीय घाटा" मानक संकेतक है; ERD की शुरुआत बजट 2011-12 में रंगराजन समिति की सिफारिश पर हुई।
  • WMA 1997 में पुराने Ad-hoc T-Bills की जगह आया; अवधि 90 दिन; सीमा RBI हर छमाही तय करता है।
  • FRBM अधिनियम 2003; एस्केप क्लॉज़ में 0.5% GDP तक की छूट-सीमा NK सिंह समिति (2017) की सिफारिश से 2018 के संशोधन में आई; NK सिंह समिति लक्ष्य — राजकोषीय घाटा 3% GDP, राजस्व घाटा 0.8% GDP (2022-23 तक), ऋण-GDP 60% (केंद्र 40% + राज्य 20%) तक।
  • 101वाँ संविधान संशोधन (2016) — GST लागू; "एक देश एक कर" — CGST (केंद्र), SGST (राज्य), IGST (अंतर-राज्य)।
  • 16वाँ वित्त आयोग — अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगड़िया; कार्यकाल 2026-31; राज्यों की हिस्सेदारी 41% (अपरिवर्तित); नया मानदंड — GDP योगदान (10%); हटाया गया मानदंड — कर व राजकोषीय प्रयास (2.5%)।

परीक्षा टिप्स

  • घाटों के सभी सूत्र (बजट, राजस्व, प्रभावी राजस्व, राजकोषीय, प्राथमिक) को एक-दूसरे से जोड़कर याद करें — हर अगला घाटा पिछले से किसी एक मद को घटाकर/जोड़कर बनता है।
  • 16वें वित्त आयोग के नए व हटाए गए मानदंड (GDP योगदान बनाम कर व राजकोषीय प्रयास) परीक्षा में अत्यंत लोकप्रिय हैं — दोनों को याद रखें।
  • राजस्व बजट (कोई परिसंपत्ति नहीं) बनाम पूँजी बजट (परिसंपत्ति बनती है) — यह भेद बार-बार पूछा जाता है।
🧠 स्मरण ट्रिक — घाटों की शृंखला

"राजस्व से राजकोषीय, राजकोषीय से प्राथमिक — हर बार कुछ घटाओ": राजस्व घाटे में से अनुदान घटाओ तो ERD मिलता है; कुल व्यय में से प्राप्तियाँ घटाओ तो राजकोषीय घाटा मिलता है; राजकोषीय घाटे में से ब्याज घटाओ तो प्राथमिक घाटा मिलता है।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — राजकोषीय घाटा बनाम राजस्व घाटा

दोनों "घाटा" शब्द से जुड़े हैं, इसलिए भ्रम होता है। राजस्व घाटा केवल चालू (Recurring) मद से जुड़ा है — यह बताता है कि सरकार अपने दैनिक खर्च (वेतन, ब्याज, सब्सिडी) के लिए भी पर्याप्त राजस्व नहीं जुटा पा रही। राजकोषीय घाटा कहीं व्यापक है — यह बताता है कि सरकार को अपने कुल व्यय (चालू + पूँजीगत) को पूरा करने के लिए कुल कितना उधार लेना पड़ रहा है। इसलिए राजकोषीय घाटा हमेशा राजस्व घाटे से बड़ा (या बराबर) होता है।

📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. केंद्रीय बजट का संवैधानिक आधार कौन-सा अनुच्छेद है?

✅ अनुच्छेद 112 (वार्षिक वित्तीय विवरण)।

Q2. राजकोषीय घाटे का सूत्र क्या है?

✅ कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियाँ)।

Q3. FRBM अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ, और इसका एस्केप क्लॉज़ क्या अनुमति देता है?

✅ 2003; राष्ट्रीय आपदा/सुरक्षा संकट में राजकोषीय घाटा लक्ष्य से विचलन की छूट (2018 के संशोधन के बाद अधिकतम 0.5% GDP)।

Q4. 16वें वित्त आयोग ने कौन-सा नया मानदंड जोड़ा और कौन-सा हटाया?

✅ जोड़ा — GDP योगदान (10%); हटाया — कर एवं राजकोषीय प्रयास (2.5%)।

Q5. GST किस संविधान संशोधन के तहत लागू हुआ?

✅ 101वाँ संविधान संशोधन, 2016।

सारांश

राजकोषीय नीति कराधान, व्यय, विनिवेश व ऋण-प्रबंधन के माध्यम से अर्थव्यवस्था को दिशा देती है, और इसका संवैधानिक ढाँचा अनुच्छेद 112, 202, 280 आदि से बँधा है। घाटे की चार परतें — राजस्व, प्रभावी राजस्व, राजकोषीय व प्राथमिक — एक-दूसरे से घटाव-जोड़ के ज़रिए जुड़ी हैं, और इनके वित्तपोषण में आंतरिक/बाह्य उधारी व WMA जैसे उपकरण काम आते हैं, जिन्हें FRBM अधिनियम व NK सिंह समिति के लक्ष्य अनुशासित करते हैं। राजकोषीय संघवाद के तहत हर 5 वर्ष में गठित वित्त आयोग (वर्तमान: 16वाँ, अध्यक्ष अरविंद पनगड़िया) केंद्र-राज्य संसाधन-बँटवारे के मानदंड तय करता है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए घाटों के सूत्र, संवैधानिक अनुच्छेद और नवीनतम वित्त आयोग के आँकड़े सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
  • •भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
  • •RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
  • •भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
  • •GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।
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राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) का अर्थ है:

2

15वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी कितनी प्रतिशत अनुशंसित की?

3

वित्त आयोग का गठन संविधान के किस अनुच्छेद के तहत होता है?

4

यूनियन बजट कब पेश किया जाता है:

5

राजकोषीय घाटे का मतलब है:

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इस टॉपिक से जुड़े पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

आधिकारिक प्रश्नपत्रों के असली प्रश्न, उत्तर सहित।

  1. RAS 2023

    निम्नलिखित में से कौन राजकोषीय नीति का उपकरण नहीं है?

    1. (A) सार्वजनिक व्यय
    2. (B) ब्याज दर
    3. (C) घाटे की वित्त व्यवस्था (हीनार्थ प्रबंधन)
    4. (D) कराधान

    उत्तर: (B) ब्याज दर

  2. RAS 2015

    सूची-I की मदों को सूची-II की मदों से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए : सूची-I (विशेषज्ञता) (a) कराधान (b) कृषि (c) मौद्रिक सुधार (d) भारतीय आर्थिक सुधार (e) राजकोषीय नीति सूची-II (नाम) (I) एम. गोविंद राव (II) सी. रंगराजन (III) अरविंद पनगढ़िया (IV) अशोक गुलाटी (V) पार्थसारथी शोम

    1. (A) a-II, b-IV, c-I, d-III, e-V
    2. (B) a-I, b-IV, c-III, d-II, e-V
    3. (C) a-V, b-IV, c-II, d-III, e-I
    4. (D) a-V, b-IV, c-III, d-II, e-I

    उत्तर: (C) a-V, b-IV, c-II, d-III, e-I

  3. RAS 2023

    निम्नलिखित में से कौन-सा व्यंजक सकल राजकोषीय घाटे का सूत्र दर्शाता है?

    1. (A) सकल राजकोषीय घाटा = प्राथमिक घाटा + विदेश से शुद्ध उधार
    2. (B) सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ
    3. (C) सकल राजकोषीय घाटा = राजस्व घाटा + पूंजीगत व्यय
    4. (D) सकल राजकोषीय घाटा = देश में शुद्ध उधार + RBI से उधार + विदेश से उधार

    उत्तर: (D) सकल राजकोषीय घाटा = देश में शुद्ध उधार + RBI से उधार + विदेश से उधार

  4. RAS 2013

    भारत की व्यापार नीति (2009-14) का लक्ष्य है — - (A) 2020 तक वैश्विक व्यापार में देश की हिस्सेदारी दोगुनी करना। - (B) निर्यात में प्रति वर्ष 25 प्रतिशत की वृद्धि प्राप्त करना। - (C) 2014 तक वस्तुओं एवं सेवाओं के भारतीय निर्यात को दोगुना करना। सही कथन चुनिए:

    1. (A) (A) और (B)
    2. (B) (B) और (C)
    3. (C) (A) और (C)
    4. (D) (A), (B) और (C)

    उत्तर: (D) (A), (B) और (C)

  5. RAS 2013

    भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता का कारण है — - (A) विदेशी निधियों का अंतर्वाह और बहिर्वाह - (B) विदेशी पूँजी बाजारों में उतार-चढ़ाव - (C) मौद्रिक नीति में परिवर्तन उपर्युक्त में से कौन-से कारण सही हैं?

    1. (A) (A) और (B)
    2. (B) (A) और (C)
    3. (C) (A), (B) और (C)
    4. (D) (B) और (C)

    उत्तर: (C) (A), (B) और (C)

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