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मौद्रिक नीति — RBI, MPC, रेपो दर एवं नीति उपकरण

Monetary Policy in India — RBI, MPC, Repo Rate and Policy Tools

14 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: अगस्त 2026· Economic Concepts and Indian Economy

परिचय

RAS प्रारंभिक परीक्षा के आर्थिक भाग में मौद्रिक नीति सबसे अधिक बार पूछा जाने वाला विषय है, क्योंकि यह "करेंट अफेयर्स" (हर द्विमासिक MPC बैठक में दरें बदलती हैं) और "स्थायी सैद्धांतिक ढाँचे" (कानूनी आधार, संस्थागत संरचना, उपकरणों की परिभाषा) — दोनों को एक साथ जोड़ता है। मौद्रिक नीति वह नीति है जिसके ज़रिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रा-आपूर्ति, ब्याज दर और साख की उपलब्धता को नियंत्रित करता है, ताकि मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिल सके। 2016 से पहले यह निर्णय अकेले RBI गवर्नर के विवेक पर आधारित था; अब यह एक बहु-सदस्यीय, कानूनी रूप से स्थापित समिति — मौद्रिक नीति समिति (MPC) — के हाथ में है, जो एक स्पष्ट मुद्रास्फीति-लक्ष्य ढाँचे के भीतर काम करती है।

मुख्य अवधारणाएँ

1. मौद्रिक नीति समिति (MPC) — कानूनी आधार एवं संरचना

MPC का गठन RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के अंतर्गत किया गया है। इसमें कुल 6 सदस्य होते हैं — RBI की ओर से तीन (गवर्नर जो अध्यक्ष होते हैं, मौद्रिक नीति प्रभारी डिप्टी गवर्नर, तथा एक RBI कार्यकारी निदेशक), और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन बाह्य विशेषज्ञ (4 वर्ष के कार्यकाल हेतु)। निर्णय साधारण बहुमत से होता है; बराबरी की स्थिति में गवर्नर के पास निर्णायक (दूसरा) मत होता है। MPC का मुद्रास्फीति-लक्ष्य 4% उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) है, जिसमें ±2% की सहनशील सीमा (यानी 2% से 6% के बीच) है, और यह समझौता 2021 से 2026 तक की 5-वर्षीय अवधि के लिए है। यदि लगातार 3 तिमाहियों तक मुद्रास्फीति इस सीमा से बाहर रहती है, तो इसे विफलता माना जाता है, और RBI को केंद्र सरकार को इसका औपचारिक कारण व सुधारात्मक कदम बताते हुए रिपोर्ट देनी होती है।

2. प्रमुख नीति दरें — दर-गलियारा (Rate Corridor)

MPC ब्याज दरों का एक पूरा "गलियारा" (corridor) तय करती है, जिसका केंद्र-बिंदु रेपो दर है:

  • रेपो दर (Repo Rate): वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालिक ऋण देता है — यह मौद्रिक नीति की सबसे प्रमुख दर (Policy Rate) है।
  • रिवर्स रेपो दर: वह दर जिस पर RBI बैंकों से पैसा उधार लेता है (जमा करता है) — यह LAF कॉरिडोर की पुरानी "मंज़िल" (Floor) थी, जिसे अप्रैल 2022 से SDF ने प्रतिस्थापित कर दिया।
  • SDF दर (Standing Deposit Facility): नई LAF मंज़िल (Repo − 25 आधार अंक)। इसकी विशेषता यह है कि यह बिना किसी प्रतिभूति (Uncollateralised) के काम करती है — बैंक बिना कोई G-Sec गिरवी रखे अपनी अतिरिक्त नकदी सीधे RBI के पास रख सकते हैं।
  • MSF दर (Marginal Standing Facility): LAF कॉरिडोर की "छत" (Ceiling), Repo + 25 आधार अंक पर। इसके अंतर्गत बैंक SLR-अतिरिक्त सरकारी प्रतिभूतियाँ गिरवी रखकर RBI से रातभर के लिए आपातकालीन ऋण ले सकते हैं।
  • बैंक दर (Bank Rate): धारा 49 के अंतर्गत RBI जिस दर पर बिलों की पुनर्खरीद/पुनर्कटौती करता है; व्यवहार में यह सदैव MSF दर के बराबर रखी जाती है और मुख्यतः CRR/SLR उल्लंघन पर दंड-दर के रूप में प्रयुक्त होती है।

ये चारों दरें मिलकर 50 आधार-अंकों का LAF कॉरिडोर बनाती हैं — SDF (फ़्लोर) से MSF (सीलिंग) तक — जिसके भीतर रेपो दर तैरती है।

3. तरलता समायोजन सुविधा (LAF) एवं इसके घटक

LAF वह तंत्र है जिसके माध्यम से RBI रेपो व रिवर्स रेपो परिचालनों द्वारा बैंकिंग प्रणाली की दैनिक तरलता का प्रबंधन करता है। इसके चार मुख्य घटक हैं — रेपो (तरलता डालना; ओवरनाइट व टर्म दोनों प्रकार में उपलब्ध; RBI बैंकों को G-Secs के एवज़ में ऋण देता है), SDF (तरलता अवशोषित करना; ओवरनाइट; बैंक बिना प्रतिभूति के नकदी RBI के पास रखते हैं), टर्म रिवर्स रेपो (तरलता अवशोषित करना; 14-28 दिनों की निश्चित अवधि के लिए), और MSF (आपातकालीन तरलता डालना; ओवरनाइट; SLR से अतिरिक्त प्रतिभूतियाँ गिरवी रखकर)।

4. खुला बाज़ार परिचालन (OMO) एवं विशेष तंत्र

OMO के अंतर्गत RBI सरकारी प्रतिभूतियों की सीधी खरीद-बिक्री कर स्थायी तरलता में बदलाव करता है (Outright OMO), या निश्चित अवधि के लिए अस्थायी खरीद-बिक्री करता है (Repo OMO)। इसके अतिरिक्त दो विशेष तंत्र महत्वपूर्ण हैं — ऑपरेशन ट्विस्ट, जिसमें RBI एक साथ दीर्घकालिक G-Secs खरीदता है (दीर्घकालिक यील्ड घटाने हेतु) और अल्पकालिक G-Secs बेचता है, जिससे यील्ड-कर्व सपाट (Flatten) होकर दीर्घकालिक ब्याज दरें घटती हैं और निवेश सस्ता होता है; तथा बाज़ार स्थिरीकरण योजना (MSS), जिसके अंतर्गत सरकार RBI की ओर से T-Bills व दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी कर बाज़ार से अतिरिक्त तरलता (विशेषकर विदेशी पूँजी प्रवाह से उत्पन्न) खींच लेती है — MSS के अंतर्गत उगाही गई राशि एक अलग खाते में रखी जाती है, सरकारी खर्च में नहीं।

5. गुणात्मक (Qualitative) साख नियंत्रण उपाय

मात्रात्मक उपकरणों (दरों) के अलावा RBI कुछ चयनात्मक/गुणात्मक उपाय भी अपनाता है — मार्जिन आवश्यकता (ऋण के लिए संपार्श्विक में मार्जिन बढ़ाकर साख सीमित करना), उपभोक्ता साख विनियमन (टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं पर किस्त व अग्रिम भुगतान की शर्तें तय करना), चयनात्मक साख नियंत्रण (सट्टेबाज़ी-प्रवण विशेष क्षेत्रों में साख सीमित करना), नैतिक मनोबल (कानूनी बाध्यता के बिना बैंकों को समझा-बुझाकर नीति पालन कराना), प्रत्यक्ष कार्रवाई (नीति-उल्लंघन करने वाले बैंकों पर दंडात्मक कार्रवाई), साख राशनिंग (बैंकों/क्षेत्रों के लिए अधिकतम साख-सीमा तय करना), और प्रचार (आर्थिक आँकड़े व नीतिगत इरादे प्रकाशित कर बाज़ार को दिशा देना)। इन सबमें सबसे परीक्षा-प्रासंगिक है प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) — बैंकों को कृषि, MSME, शिक्षा, आवास, निर्यात साख, नवीकरणीय ऊर्जा, सामाजिक अवसंरचना व कमज़ोर वर्गों को अनिवार्य रूप से ऋण देने का प्रावधान।

6. मौद्रिक नीति का वर्गीकरण एवं MPC का रुख (Policy Stance)

व्यापक रूप से मौद्रिक नीति दो प्रकार की होती है — विस्तारवादी (Expansionary/Dovish), जो मंदी या कम वृद्धि की स्थिति में रेपो व CRR घटाकर सस्ता ऋण उपलब्ध कराती है; और संकुचनकारी (Contractionary/Hawkish), जो अधिक मुद्रास्फीति की स्थिति में रेपो व CRR बढ़ाकर माँग घटाती है। हर MPC बैठक के बाद घोषित "नीतिगत रुख" तीन में से एक होता है — Accommodative (उदार) यानी दरें घटाने की प्रवृत्ति (वृद्धि को प्राथमिकता), Neutral (तटस्थ) यानी न बढ़ाने न घटाने की प्रवृत्ति (स्थिति की निगरानी), और Hawkish (कठोर) यानी दरें बढ़ाने की प्रवृत्ति (मुद्रास्फीति नियंत्रण को प्राथमिकता)।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • MPC का कानूनी आधार: RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB; कुल 6 सदस्य (3 RBI + 3 सरकार-नामित बाह्य विशेषज्ञ, 4-वर्षीय कार्यकाल)।
  • मुद्रास्फीति लक्ष्य: 4% CPI, सहनशील सीमा ±2% (2% से 6%); अवधि 2021-2026; विफलता = लगातार 3 तिमाही सीमा से बाहर।
  • LAF कॉरिडोर 50 आधार-अंक का है: SDF (फ़्लोर) से MSF (सीलिंग) तक; बैंक दर सदैव MSF के बराबर रहती है।
  • SDF अप्रैल 2022 से लागू — फिक्स्ड रिवर्स रेपो का स्थान लिया; मुख्य अंतर: SDF अप्रतिभूत (Uncollateralised) है, फिक्स्ड रिवर्स रेपो प्रतिभूत था।
  • ऑपरेशन ट्विस्ट का उद्देश्य यील्ड-कर्व को सपाट करना है; MSS अतिरिक्त तरलता (विशेषकर विदेशी पूँजी प्रवाह से) अवशोषित करती है।
  • बैंक दर धारा 49 से जुड़ी है और CRR/SLR उल्लंघन पर दंड-दर के रूप में प्रयुक्त होती है।
  • MPC रुख तीन प्रकार का होता है: Accommodative (उदार), Neutral (तटस्थ), Hawkish (कठोर)।

परीक्षा टिप्स

  • रेपो, रिवर्स रेपो, SDF, MSF व बैंक दर के संख्यात्मक मान समय-समय पर बदलते हैं — इन्हें स्थायी तथ्य मानकर न रटें; इसके बजाय हर दर की दिशा और उद्देश्य समझें।
  • SDF और MSF को कभी न मिलाएँ — SDF तरलता अवशोषित करती है (फ़्लोर), MSF तरलता डालती है (सीलिंग)।
  • "रुख" (Stance) संबंधी प्रश्नों में Accommodative/Neutral/Hawkish के बीच का अंतर बार-बार पूछा जाता है — याद रखें कि रुख नीतिगत मंशा बताता है, जबकि वास्तविक दर-परिवर्तन अलग निर्णय है।
🧠 स्मरण ट्रिक — LAF कॉरिडोर

"SDF से MSF तक, 50 का फ़ासला रेपो के आसपास" — SDF (फ़्लोर, Repo−25) से MSF (सीलिंग, Repo+25) तक ठीक 50 आधार-अंकों का गलियारा है, और रेपो दर हमेशा इसके बीचोंबीच बैठती है। बैंक दर को MSF का "जुड़वाँ" समझें — दोनों हमेशा बराबर रहती हैं।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — SDF बनाम रिवर्स रेपो

दोनों में बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी RBI के पास रखते हैं, इसलिए इन्हें अक्सर मिलाया जाता है। अंतर है प्रतिभूति (Collateral) का: फिक्स्ड रिवर्स रेपो में बैंकों को बदले में G-Secs जमा करनी होती थीं (प्रतिभूत लेन-देन); SDF में ऐसी कोई ज़रूरत नहीं — यह पूर्णतः अप्रतिभूत (Uncollateralised) सुविधा है, जो अप्रैल 2022 से LAF की नई "फ़्लोर" बनी। त्वरित पहचान: "S" फॉर "Simple/Secured-नहीं" — SDF में कोई प्रतिभूति नहीं चाहिए।

📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. MPC का गठन RBI अधिनियम, 1934 की किस धारा के अंतर्गत हुआ है, और इसमें कितने सदस्य होते हैं?

✅ धारा 45ZB; कुल 6 सदस्य (3 RBI + 3 सरकार-नामित बाह्य विशेषज्ञ)।

Q2. LAF कॉरिडोर की फ़्लोर और सीलिंग दरें कौन-सी हैं?

✅ फ़्लोर = SDF दर (Repo−25bps); सीलिंग = MSF दर (Repo+25bps) — कुल गलियारा 50 आधार-अंकों का।

Q3. ऑपरेशन ट्विस्ट का उद्देश्य क्या है?

✅ यील्ड-कर्व को सपाट (Flatten) करना — RBI एक साथ दीर्घकालिक G-Secs खरीदता है और अल्पकालिक G-Secs बेचता है।

Q4. मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है और इसकी सहनशील सीमा कितनी है?

✅ लक्ष्य 4% CPI; सहनशील सीमा ±2% यानी 2% से 6% के बीच; अवधि 2021-2026।

Q5. MPC का कोई निर्णय बराबरी पर हो तो निर्णायक मत किसका होता है?

✅ RBI गवर्नर का, जो MPC के अध्यक्ष भी होते हैं।

सारांश

मौद्रिक नीति RBI का वह उपकरण-समूह है जिससे वह मूल्य-स्थिरता व वृद्धि के बीच संतुलन बनाता है — इसका निर्णय अब कानूनी रूप से स्थापित 6-सदस्यीय MPC (धारा 45ZB) करती है, जिसका लक्ष्य 4% CPI ±2% है। इसके केंद्र में रेपो दर है, जो SDF (फ़्लोर) और MSF (सीलिंग) के 50-आधार-अंक कॉरिडोर के भीतर काम करती है, और जिसे LAF, OMO (Operation Twist, MSS) व गुणात्मक उपायों (PSL, मार्जिन, मनोबल) का सहारा मिलता है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए हर उपकरण की दिशा-तर्क, SDF-MSF-रिवर्स रेपो का अंतर, और नीतिगत रुख की तीन श्रेणियाँ याद रखना सर्वाधिक फलदायी है।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
  • भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
  • भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
  • GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।
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