12 मार्च 2026 · 12 March 2026अर्थव्यवस्था⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण
US-इज़राइल-ईरान संघर्ष का भारत पर भू-आर्थिक प्रभाव
Geoeconomic fallout of the US-Israel-Iran conflict on India
संघर्ष से तेल कीमतों में उछाल, हॉरमुज़ जलसंधि व्यवधान, मुद्रास्फीति व चालू खाता घाटा (CAD) दबाव।
मुख्य तथ्य
- •US-इज़राइल-ईरान संघर्ष का भारत पर भू-आर्थिक प्रभाव।
- •तेल कीमतें बढ़ना (भारत ~85% आयात)।
- •होर्मुज/लाल सागर व्यवधान — माल-भाड़ा/बीमा।
- •खाड़ी प्रवासी (~90 लाख) व प्रेषण पर जोखिम।
- •IMEC/चाबहार प्रभावित; रणनीतिक स्वायत्तता।
अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष के भू-आर्थिक (geoeconomic) प्रभाव की भारत पर चर्चा हुई। पश्चिम एशिया में संघर्ष भारत को कई प्रकार से प्रभावित करता है — कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि (भारत ~85% तेल आयात करता है), होर्मुज जलडमरूमध्य व लाल सागर मार्गों में व्यवधान से माल-भाड़ा व बीमा लागत बढ़ना, रुपये पर दबाव, मुद्रास्फीति, व खाड़ी में बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय (~90 लाख) व प्रेषण (remittances) पर जोखिम। IMEC व चाबहार जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाएँ भी प्रभावित होती हैं। भारत रणनीतिक स्वायत्तता, ऊर्जा विविधीकरण व कूटनीतिक संतुलन से इन जोखिमों का प्रबंधन करता है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
हॉरमुज़ जलसंधि, तेल आयात व ऊर्जा सुरक्षा अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
भारत — ~85% तेल आयात; खाड़ी में ~90 लाख प्रवासी। होर्मुज जलडमरूमध्य; लाल सागर। IMEC; चाबहार। रणनीतिक स्वायत्तता।
✨ RajAI— RAS Prelims Expert