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अंतर्राष्ट्रीय · विज्ञान

पृथ्वी की गति का गुरुत्वाकर्षण नियंत्रण

11 फरवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

गुरुत्वाकर्षण — पृथ्वी पर सभी को बांधने वाला मूल बल; अभिकेंद्रीय बल के रूप में कक्षीय गति बनाए रखता है।

क्या हुआ

पृथ्वी की गति के 'गुरुत्वाकर्षण-नियंत्रण' की चर्चा हुई। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण-बल (न्यूटन का सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण नियम; आइंस्टीन का सापेक्षता सिद्धांत) के कारण एक दीर्घवृत्तीय कक्षा में परिक्रमा करती है, व अपनी धुरी पर घूमती है। चंद्रमा, सूर्य व अन्य ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण-प्रभाव पृथ्वी की गति में सूक्ष्म परिवर्तन (जैसे — अक्षीय झुकाव/प्रिसेशन, ज्वार-भाटा, मिलनकोविच चक्र — जो दीर्घकालिक जलवायु को प्रभावित करते हैं) लाते हैं। ऐसी खगोलीय यांत्रिकी (celestial mechanics) ऋतुओं, दिन-रात व दीर्घकालिक जलवायु-प्रवृत्तियों को समझने का आधार है। यह मूलभूत भौतिकी, खगोल-विज्ञान व पृथ्वी-विज्ञान से जुड़ा है। यह विज्ञान से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1पृथ्वी की गति का गुरुत्वाकर्षण-नियंत्रण।
  2. 2सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षा (गुरुत्वाकर्षण)।
  3. 3न्यूटन का नियम; आइंस्टीन की सापेक्षता।
  4. 4चंद्रमा/सूर्य — ज्वार-भाटा, प्रिसेशन।
  5. 5मिलनकोविच चक्र — दीर्घकालिक जलवायु।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

गुरुत्वाकर्षण, अभिकेंद्रीय बल व ग्रहीय गति विज्ञान में पूछे जाते हैं।

स्थायी GK: पृथ्वी की गति — गुरुत्वाकर्षण (न्यूटन/आइंस्टीन); दीर्घवृत्तीय कक्षा। चंद्रमा/सूर्य प्रभाव — ज्वार-भाटा, प्रिसेशन, मिलनकोविच चक्र (जलवायु)। खगोलीय यांत्रिकी।

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