6 जनवरी 2026 · 6 January 2026
शहरी हरियाली में हरित विरोधाभास
Green Paradox in urban greening
शहरी हरियाली में 'हरित विरोधाभास' (Green Paradox) की चर्चा हुई। शहरी हरियाली (पेड़, पार्क, हरित-क्षेत्र) आमतौर पर वायु-शुद्धिकरण, छाया, तापमान-नियंत्रण ('अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव कम करना) व कल्याण के लिए लाभकारी मानी जाती है। 'हरित विरोधाभास' (इस संदर्भ में) यह विचार है कि अनियोजित/गलत प्रकार की हरियाली उल्टा नुकसान कर सकती है — जैसे विदेशी/आक्रामक प्रजातियों का रोपण (जो स्थानीय पारिस्थितिकी, जल व जैव विविधता को नुकसान पहुँचाए), अधिक पराग/एलर्जी, या कुछ पौधों द्वारा प्रदूषक/वाष्पशील यौगिक छोड़ना। इसका संदेश है — सही (देशी, उपयुक्त) प्रजातियों के साथ वैज्ञानिक, योजनाबद्ध शहरी-हरितीकरण। यह पर्यावरण, शहरी-नियोजन व जैव विविधता से जुड़ता है। यह पर्यावरण से जुड़ा है। (यहाँ 'ग्रीन पैराडॉक्स' का अर्थशास्त्रीय/जलवायु-नीति अर्थ — जीवाश्म-त्वरण — से भिन्न संदर्भ है।)
✨ RajAI— RAS Prelims Expert