परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
शहरी निकायों को भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से संवैधानिक दर्जा मिला। ये स्थानीय स्तर पर प्रशासन चलाने वाली महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन (RPSC) की RAS परीक्षा में शहरी निकाय एक महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यह स्थानीय प्रशासन, संवैधानिक ढांचे और राजस्थान की शासन व्यवस्था को समझने के लिए आवश्यक है।
RPSC RAS परीक्षा में इस विषय से प्रश्न पूछे जा सकते हैं। शहरी निकाय की कार्यप्रणाली, संरचना, शक्तियां और जिम्मेदारियां परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। राजस्थान में शहरी निकायों की विशेष भूमिका और कार्य प्रणाली को समझना अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य है।
मुख्य अवधारणाएं
शहरी निकाय की परिभाषा और प्रकार
शहरी निकाय (Urban Bodies) स्थानीय शासन की संस्थाएं हैं जो शहरी क्षेत्रों में रहने वाली जनता के कल्याण के लिए काम करती हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243Q के अनुसार, शहरी निकायों की मुख्य तीन श्रेणियां हैं:
1. नगर निगम (Municipal Corporation): यह सबसे बड़ी शहरी संस्था है, जो बड़े शहरों में कार्य करती है। नगर निगम के पास व्यापक शक्तियां और जिम्मेदारियां होती हैं। राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर आदि में नगर निगम हैं।
2. नगर पालिका (Municipality): यह मध्यम आकार के शहरों में काम करती है। नगर पालिका के पास नगर निगम से कम शक्तियां होती हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
3. नगर पंचायत (Nagar Panchayat): यह संक्रमणशील क्षेत्र (ग्रामीण से शहरी बनते क्षेत्र) में कार्य करती है। राजस्थान में निकायों के नाम नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका हैं, और इनका वर्गीकरण जनसंख्या के आधार पर होता है।
| निकाय | किस क्षेत्र के लिए (अनुच्छेद 243Q) |
|---|---|
| नगर निगम | बड़ा शहरी क्षेत्र |
| नगर पालिका / नगर परिषद | छोटा शहरी क्षेत्र |
| नगर पंचायत | संक्रमणशील क्षेत्र (ग्रामीण से शहरी बनता क्षेत्र) |
संवैधानिक आधार और 74वां संशोधन
भारतीय संविधान का 74वां संशोधन 1992 में पारित हुआ और 1 जून 1993 से लागू हुआ। इस संशोधन ने शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया। यह संशोधन निम्नलिखित प्रमुख बदलाव लाया:
- शहरी निकायों की संरचना और कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया गया (भाग IX-A, अनुच्छेद 243P से 243ZG)।
- शहरी निकायों का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया।
- महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटों का आरक्षण प्रदान किया गया।
- शहरी निकायों को राजस्व संग्रहण की शक्तियां दी गईं।
शहरी निकायों की संरचना
प्रत्येक शहरी निकाय में निर्वाचित प्रतिनिधियों की एक परिषद (बोर्ड) होती है, जिसके सदस्य वार्डों से चुने जाते हैं। सदस्य संख्या जनसंख्या के आधार पर राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के अनुसार तय होती है।
प्रत्येक शहरी निकाय का एक कार्यकारी प्रमुख (Executive Head) होता है जिसे आमतौर पर महापौर (Mayor) या सभापति कहा जाता है। निकाय का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
शहरी निकायों की शक्तियां और कार्य
संविधान की 12वीं अनुसूची (अनुच्छेद 243W) में शहरी निकायों के 18 कार्य दिए गए हैं। उनमें से प्रमुख कार्य:
जल आपूर्ति और सफाई: शहरों में स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना और गलियों की सफाई करना।
सड़कें और परिवहन: सड़कों का निर्माण, रखरखाव और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था करना।
स्वास्थ्य और सफाई: जनता के स्वास्थ्य की रक्षा, बीमारियों की रोकथाम और स्वच्छता सुनिश्चित करना।
नगर नियोजन: नगर नियोजन, भूमि उपयोग और भवन निर्माण का विनियमन तथा अग्निशमन सेवाएं।
सामाजिक कल्याण: निर्धन और असहाय व्यक्तियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू करना।
| क्रम | 12वीं अनुसूची के कार्य (अनुच्छेद 243W) |
|---|---|
| 1 | नगर नियोजन (टाउन प्लानिंग सहित) |
| 2 | भूमि उपयोग और भवन निर्माण का विनियमन |
| 3 | आर्थिक और सामाजिक विकास की योजना |
| 4 | सड़कें और पुल |
| 5 | घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक जल आपूर्ति |
| 6 | लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सफाई और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन |
| 7 | अग्निशमन सेवाएं |
| 8 | नगरीय वानिकी, पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी को बढ़ावा |
| 9 | कमजोर वर्गों (विकलांग व मानसिक रूप से मंद सहित) के हितों की रक्षा |
| 10 | झुग्गी-बस्ती सुधार और उन्नयन |
| 11 | शहरी गरीबी उन्मूलन |
| 12 | पार्क, उद्यान, खेल के मैदान जैसी सुविधाओं की व्यवस्था |
| 13 | सांस्कृतिक, शैक्षिक और सौंदर्यपरक पहलुओं को बढ़ावा |
| 14 | कब्रिस्तान, श्मशान और विद्युत शवदाह गृह |
| 15 | कांजी हाउस; पशु क्रूरता निवारण |
| 16 | जन्म-मृत्यु पंजीकरण सहित महत्वपूर्ण आंकड़े |
| 17 | सार्वजनिक सुविधाएं (सड़क बत्ती, पार्किंग, बस स्टॉप, सार्वजनिक शौचालय) |
| 18 | बूचड़खानों और चमड़ा शोधन (टेनरी) का विनियमन |
राजस्व संग्रहण और वित्तीय स्वायत्तता
शहरी निकायों को अपने कार्यों को चलाने के लिए विभिन्न स्रोतों से राजस्व प्राप्त होता है। ये राजस्व स्रोत निम्नलिखित हैं:
संपत्ति कर (Property Tax): यह शहरी निकायों का मुख्य राजस्व स्रोत है। संपत्ति के मालिकों से लगाया जाता है।
चुंगी (Octroi): शहर में माल के प्रवेश पर लगने वाला कर; अनेक राज्यों में अब समाप्त कर दिया गया है।
लाइसेंस और परमिट शुल्क: व्यावसायिक गतिविधियों के लिए लाइसेंस और परमिट के लिए शुल्क।
सरकारी अनुदान: केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाला अनुदान।
महत्वपूर्ण तथ्य
संविधान संशोधन: 74वां संशोधन अधिनियम, 1992 ने शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया। यह 1 जून, 1993 को लागू हुआ।
कार्यकाल: शहरी निकायों का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया है।
महिला आरक्षण: शहरी निकायों में कुल सीटों का न्यूनतम 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित है।
अनुसूचित जातियां और जनजातियां: शहरी निकायों में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है।
राज्य चुनाव आयोग: शहरी निकायों के चुनावों का संचालन राज्य चुनाव आयोग द्वारा किया जाता है।
नगर निगम की अवधि: असामान्य परिस्थितियों में नगर निगम को भंग किया जा सकता है, लेकिन 6 महीने के भीतर नए चुनाव आयोजित किए जाने चाहिए।
राजस्थान विशेष
राजस्थान में शहरी निकायों की संख्या: राजस्थान में विभिन्न प्रकार के शहरी निकाय हैं। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के तहत शहरी निकायों को विनियमित किया जाता है।
प्रमुख नगर निगम: जयपुर नगर निगम राजस्थान का सबसे बड़ा शहरी निकाय है। अजमेर, जोधपुर, कोटा, और उदयपुर में भी नगर निगम हैं।
राजस्थान शहरी विकास नीति: राजस्थान सरकार ने विभिन्न नीतियां बनाई हैं जो शहरी निकायों के माध्यम से लागू की जाती हैं।
स्मार्ट सिटी मिशन: राजस्थान से जयपुर, उदयपुर, कोटा और अजमेर स्मार्ट सिटी मिशन (2015 में शुरू) के अंतर्गत चयनित हुए।
जल प्रबंधन: राजस्थान एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है, इसलिए शहरी निकायों के लिए जल प्रबंधन एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
ठेका कर्मचारी (Contractual Staff): राजस्थान के शहरी निकायों में ठेका कर्मचारियों को नियुक्त किया जाता है, जिन्हें अलग-अलग लाभ दिए जाते हैं।
परीक्षा पैटर्न
RPSC RAS परीक्षा में शहरी निकाय के प्रश्न निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं:
1. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions): संविधान के अनुच्छेद, संशोधन, शहरी निकायों की संरचना आदि पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
2. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions): शहरी निकायों की शक्तियों, कार्यों और जिम्मेदारियों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
3. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions): 74वां संशोधन का महत्व, राजस्थान में शहरी निकायों की भूमिका आदि पर विस्तृत प्रश्न पूछे जाते हैं।
4. तुलनात्मक प्रश्न: ग्रामीण और शहरी निकायों में अंतर, विभिन्न प्रकार के शहरी निकायों में अंतर आदि पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
महत्वपूर्ण टिप्पणी: RPSC परीक्षा में राजस्थान-केंद्रित प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण हैं। राजस्थान के शहरी निकायों की विशेषताओं और कार्यप्रणाली को विशेष ध्यान देना चाहिए।
स्मरण युक्तियां
1. 74वां संशोधन: 74वां संशोधन अधिनियम, 1992 को "शहरी निकाय संशोधन" के नाम से याद रखें। भाग IX-A (अनुच्छेद 243P-243ZG) और 12वीं अनुसूची इसी से जुड़े हैं; यह 1 जून, 1993 को लागू हुआ।
2. तीन प्रकार के शहरी निकाय: नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत को "बड़े, मध्यम, छोटे" के रूप में याद रखें।
3. 5-33 नियम: 5 वर्ष की कार्यावधि और 33% महिला आरक्षण को याद रखें।
4. मुख्य कार्य: जल आपूर्ति, लोक स्वास्थ्य व सफाई, सड़कें, नगर नियोजन और अग्निशमन को याद रखें (12वीं अनुसूची के 18 कार्य)।
5. राजस्व स्रोत: संपत्ति कर, लाइसेंस शुल्क और सरकारी अनुदान को याद रखें।
6. राजस्थान की विशेषता: जयपुर नगर निगम, अजमेर, जोधपुर आदि प्रमुख शहरी निकायों को याद रखें।
7. केस स्टडी: राजस्थान के किसी एक शहरी निकाय (जैसे जयपुर नगर निगम) का विस्तृत अध्ययन करें।
8. समसामयिक घटनाएं: शहरी निकायों से संबंधित समसामयिक मुद्दों को समाचार पत्रों में पढ़ें और याद रखें।
निष्कर्ष: शहरी निकाय भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला हैं। RPSC RAS परीक्षा की तैयारी के दौरान इस विषय को गहराई से पढ़ना चाहिए, विशेष रूप से राजस्थान के संदर्भ में। 74वां संशोधन, शहरी निकायों की संरचना, शक्तियां और कार्य को समझना अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक है।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
- •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
- •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
- •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
- •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।