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📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

संसद, विधानमंडल व स्थानीय निकाय | RAS Polity Notes

Parliament, Legislature & Local Bodies | RAS Polity Notes

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

भारतीय संविधान में "निकाय" शब्द का अर्थ वे संस्थाएं या संगठन हैं जो सरकारी कार्य को संचालित करते हैं। RPSC RAS परीक्षा में निकायों का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की मूल संरचना को समझने में सहायता करता है। संविधान के भाग V (संघ), भाग VI (राज्य), भाग IX (पंचायतें) और भाग IX-A (नगरपालिकाएं) में विभिन्न निकायों का विस्तृत वर्णन किया गया है।

RAS परीक्षा में निकायों से संबंधित प्रश्न सामान्य ज्ञान और राजस्थान विशेष खंड दोनों में पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों का उद्देश्य उम्मीदवारों की भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था और शासन प्रणाली की गहन समझ को परखना है। निकायों के संदर्भ में अक्सर पूछे जाने वाले विषय हैं - संसद, राज्य विधानमंडल, स्थानीय निकाय, न्यायालय आदि।

मुख्य अवधारणाएं

1. संसद (Parliament) - राष्ट्रीय निकाय

संसद भारत का सर्वोच्च विधायी निकाय है जो राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनता है। संविधान के अनुच्छेद 79 में संसद की स्थापना का प्रावधान है। लोकसभा में 543 सदस्य होते हैं जिनका कार्यकाल पाँच वर्ष होता है। राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं (वर्तमान संख्या 245) और यह स्थायी निकाय है जहाँ सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष होता है।

संसद के प्रमुख कार्य हैं - कानून निर्माण, बजट पास करना, कार्यपालिका पर नियंत्रण, संवैधानिक संशोधन और राष्ट्रीय नीतियों का निर्धारण। संसद के आम तौर पर वर्ष में तीन सत्र होते हैं -बजट सत्र (फरवरी), मानसून सत्र (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन सत्र (नवंबर-दिसंबर)।

2. राज्य विधानमंडल (State Legislature) - राज्य स्तरीय निकाय

भारत के प्रत्येक राज्य का अपना विधानमंडल होता है जो राज्य के कानून बनाता है। राजस्थान का विधानमंडल राज्यपाल और विधानसभा से मिलकर बनता है (राजस्थान में विधान परिषद नहीं है)। राजस्थान की विधानसभा में वर्तमान में 200 सदस्य हैं। विधानसभा के सदस्यों का कार्यकाल पाँच वर्ष होता है।

राज्य विधानमंडल के कार्य हैं - राज्य स्तर पर कानून निर्माण, राज्य बजट को मंजूरी देना, राज्य सरकार पर नियंत्रण और राष्ट्रीय महत्व के मामलों पर विचार करना।

बिंदुलोकसभाराज्यसभाराजस्थान विधानसभा
अनुच्छेद8180170
सदस्य संख्या543 निर्वाचितअधिकतम 250 (वर्तमान 245)200
कार्यकाल5 वर्षस्थायी सदन; सदस्य 6 वर्ष5 वर्ष
न्यूनतम आयु25 वर्ष30 वर्ष25 वर्ष

3. स्थानीय निकाय (Local Bodies) - जमीनी स्तर पर प्रशासन

स्थानीय निकाय संविधान के भाग IX (पंचायतें, अनुच्छेद 243-243O) और भाग IX-A (नगरपालिकाएं, अनुच्छेद 243P-243ZG) के अंतर्गत स्थापित किए जाते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं - नगरपालिका (शहरी क्षेत्र), नगर निगम (बड़े शहर) और पंचायत (ग्रामीण क्षेत्र)। 73वें (पंचायत) और 74वें (नगरपालिका) संवैधानिक संशोधन के माध्यम से इन्हें संवैधानिक दर्जा दिया गया है।

राजस्थान की पंचायती राज व्यवस्था त्रि-स्तरीय है: गाँव के स्तर पर ग्राम पंचायत, मध्यवर्ती (ब्लॉक) स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद। स्थानीय निकाय शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण, जल आपूर्ति और अन्य स्थानीय विकास कार्यों के लिए उत्तरदायी होते हैं।

राजस्थान की त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था
  1. ग्राम पंचायतगाँव स्तर; मुखिया सरपंच
  2. पंचायत समितिब्लॉक स्तर; प्रमुख प्रधान
  3. जिला परिषदजिला स्तर; प्रमुख जिला प्रमुख

4. न्यायपालिका (Judiciary) - संवैधानिक व्याख्या और न्याय प्रदान

भारतीय न्यायपालिका तीन स्तरों पर कार्य करती है - सर्वोच्च न्यायालय (राष्ट्रीय स्तर), उच्च न्यायालय (राज्य स्तर) और अधीनस्थ न्यायालय (जिला और तहसील स्तर)। सर्वोच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश होते हैं। संविधान के अनुच्छेद 124-147 में न्यायपालिका की व्यवस्था का विस्तृत वर्णन है।

न्यायपालिका के प्रमुख कार्य हैं - सामान्य कानूनी विवादों का निपटारा, संवैधानिक विवादों का निर्णय, मौलिक अधिकारों की रक्षा और कार्यपालिका तथा विधायिका पर नियंत्रण। न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की आधारशिला है।

5. कार्यपालिका (Executive) - कानून का क्रियान्वयन और प्रशासन

कार्यपालिका का कार्य संविधान और कानूनों को लागू करना है। राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल और विभिन्न सरकारी विभाग कार्यपालिका का गठन करते हैं। संविधान के अनुच्छेद 52-78 में संघ की कार्यपालिका (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद) का विवरण है।

राज्य स्तर पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल और विभिन्न सरकारी विभाग कार्यपालिका का गठन करते हैं। राजस्थान का प्रशासन राज्यपाल के नाम पर चलता है, परंतु वास्तविक शक्ति मुख्यमंत्री के पास होती है। कार्यपालिका के प्रमुख कार्य हैं - नीति निर्माण, कानूनों का क्रियान्वयन, वित्त प्रबंधन, सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य प्रशासकीय कार्य।

महत्वपूर्ण तथ्य

संसद की संरचना: लोकसभा में 131 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें से 84 अनुसूचित जातियों के लिए और 47 अनुसूचित जनजातियों के लिए हैं। लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (106वां संशोधन) से किया जा चुका है; यह परिसीमन के बाद लागू होगा।

विधायी प्रक्रिया: किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए तीन वाचन से गुजरना पड़ता है। पहला वाचन, दूसरा वाचन (जहाँ विस्तृत विचार-विमर्श होता है) और तीसरा वाचन जहाँ वोटिंग होती है।

पंचायती राज की संरचना: राजस्थान में ग्राम पंचायत का मुखिया सरपंच, पंचायत समिति का प्रधान और जिला परिषद का प्रमुख होता है।

न्यायालय की शक्तियाँ: सर्वोच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति है जिसमें बंदी प्रत्यक्षीकरण, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा, परमादेश और उत्प्रेषण शामिल हैं।

राजस्थान विशेष

राजस्थान राज्य में निकायों की संरचना में कुछ विशेष बातें हैं। राजस्थान विधानसभा 200 सदस्यों की है। राजस्थान में 41 जिले और 7 संभाग हैं (28 दिसंबर 2024 को 9 नए जिले और 3 नए संभाग रद्द किए गए)।

राजस्थान के स्थानीय निकाय बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य में जिला परिषदें, नगर निकाय और हजारों ग्राम पंचायतें हैं। राजस्थान की पंचायती राज व्यवस्था त्रि-स्तरीय है; राजस्थान देश का पहला राज्य है जहाँ पंचायती राज लागू हुआ (नागौर, 2 अक्टूबर 1959)।

राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थापना 1949 में हुई; इसकी प्रधान पीठ जोधपुर में है और जयपुर में खंडपीठ (1977) है। इसका अधिकार क्षेत्र केवल राजस्थान राज्य है। राजस्थान में जिला स्तर पर जिला न्यायालय, तहसील स्तर पर तहसील न्यायालय और लोक अदालतें स्थापित हैं।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा में निकायों से संबंधित प्रश्न सामान्य ज्ञान, राजनीति विज्ञान और राजस्थान विशेष खंडों में पूछे जाते हैं। RAS प्रारंभिक परीक्षा एक ही प्रश्नपत्र है: 150 प्रश्न, 200 अंक, 3 घंटे, गलत उत्तर पर एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन; यह परीक्षा केवल अर्हक (qualifying) है।

प्रश्नों के प्रकार हो सकते हैं - किसी निकाय के सदस्यों की संख्या, किसी निकाय का कार्यकाल, शक्तियाँ और कार्य, निकायों के बीच संबंध, संवैधानिक प्रावधान आदि। साक्षात्कार में भी निकायों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

मुख्य परीक्षा में निकायों पर विस्तृत निबंधात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं। उम्मीदवारों को निकायों की संरचना, कार्य, शक्तियों और सीमाओं के बारे में विस्तार से लिखना चाहिए।

स्मरण युक्तियां

संसद की संरचना याद रखने के लिए: "संसद = राष्ट्रपति + लोकसभा (543) + राज्यसभा (245)" - यह सूत्र याद रखें।

कार्यकाल याद रखने के लिए: लोकसभा - 5 वर्ष, राज्यसभा - 6 वर्ष (स्थायी), विधानसभा - 5 वर्ष।

पंचायती राज के तीन स्तर: "ग्राम पंचायत - पंचायत समिति - जिला परिषद" की संरचना को याद रखें।

न्यायालय के तीन स्तर: "सर्वोच्च - उच्च - अधीनस्थ" को स्मरण करें।

संवैधानिक संशोधन: 73वां संशोधन = पंचायती राज, 74वां संशोधन = नगरपालिका - यह जोड़ी याद रखें।

शक्तियों का विभाजन: विधायिका = कानून बनाना, कार्यपालिका = लागू करना, न्यायपालिका = व्याख्या करना।

मुख्य अनुच्छेद: अनुच्छेद 52 = राष्ट्रपति, अनुच्छेद 79 = संसद, अनुच्छेद 168 = राज्य विधानमंडल, भाग IX (अनुच्छेद 243) = पंचायत, भाग IX-A (अनुच्छेद 243P) = नगरपालिका।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
  • •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
  • •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
  • •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
  • •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
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इस टॉपिक से जुड़े पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

आधिकारिक प्रश्नपत्रों के असली प्रश्न, उत्तर सहित।

  1. RAS 2024

    लोकसभा अध्यक्ष की शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं ? नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनें : (I) अध्यक्ष संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है। (II) जब कोई धन विधेयक निचले सदन से ऊपरी सदन को भेजा जाता है, तो अध्यक्ष विधेयक पर यह प्रमाणपत्र अंकित करता है कि यह धन विधेयक है। (III) जब उसके हटाने का संकल्प विचाराधीन हो, तब अध्यक्ष न तो अध्यक्षता करेगा और न ही उसकी कार्यवाही में भाग लेगा। (IV) अध्यक्ष सदन में मतदान नहीं करता, सिवाय तब जब मतों की समानता हो। कूट :

    1. (A) केवल I और III
    2. (B) केवल I और II
    3. (C) केवल I, II और IV
    4. (D) केवल I, II और III

    उत्तर: (C) केवल I, II और IV

  2. RAS 2021

    अभिकथन (a) : नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का कर्तव्य केवल व्यय की वैधता सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि उसका औचित्य भी सुनिश्चित करना है। कारण (r) : उसे वित्तीय प्रशासन के क्षेत्र में संविधान और संसद की विधियों को बनाए रखना होता है।

    1. (A) (a) असत्य है किंतु (r) सत्य है
    2. (B) (a) और (r) दोनों सत्य हैं तथा (r), (a) की सही व्याख्या है
    3. (C) (a) सत्य है किंतु (r) असत्य है
    4. (D) (a) और (r) दोनों सत्य हैं किंतु (r), (a) की सही व्याख्या नहीं है

    उत्तर: (B) (a) और (r) दोनों सत्य हैं तथा (r), (a) की सही व्याख्या है

  3. RAS 2018

    “भारत के उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश की आयु ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी रीति से अवधारित की जाएगी, जैसा संसद विधि द्वारा उपबंधित करे”, यह किसके द्वारा अंतःस्थापित किया गया?

    1. (A) 15वां संविधान संशोधन
    2. (B) 16वां संविधान संशोधन
    3. (C) 17वां संविधान संशोधन
    4. (D) 18वां संविधान संशोधन

    उत्तर: (A) 15वां संविधान संशोधन

  4. RAS 2018

    भारत के राष्ट्रपति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 87 के अंतर्गत संसद को संबोधित करते हैं

    1. (A) संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में।
    2. (B) संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सम्मेलन में।
    3. (C) संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में।
    4. (D) एक साथ समवेत संसद के दोनों सदनों को।

    उत्तर: (D) एक साथ समवेत संसद के दोनों सदनों को।

  5. RAS 2018

    निम्नलिखित में से कौन-सी भारतीय संसद की वित्तीय समितियां हैं? (I) प्राक्कलन समिति (II) लोक लेखा समिति (III) सार्वजनिक उपक्रम समिति (IV) संसद सदस्यों के वेतन और भत्तों संबंधी संयुक्त समिति नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: कूट:

    1. (A) I, III और IV
    2. (B) I, II और IV
    3. (C) I, II और III
    4. (D) II, III और IV

    उत्तर: (C) I, II और III