होमो इरेक्टस जीवाश्म से नए सुराग, डेनिसोवन जीनोम के 14 साल बाद भी नया जीनोम नहीं
8 जून 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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जून 2026 में वैज्ञानिकों ने एक होमो इरेक्टस जीवाश्म का अध्ययन कर नए सुराग तलाशे, ऐसे समय जब किसी नए विलुप्त मानव-पूर्वज जीनोम की खोज को 14 साल हो चुके हैं।
क्या हुआ
वैज्ञानिकों ने एक होमो इरेक्टस जीवाश्म का अध्ययन किया, ताकि ऐसे सुराग मिल सकें जिन्हें पहले केवल आनुवंशिक विश्लेषण से हासिल करना असंभव माना जाता था। यह शोध ऐसे समय हुआ है जब अच्छी तरह अध्ययन किए जा चुके निएंडरथल और डेनिसोवन के अलावा विलुप्त मानव संबंधियों को लेकर सवाल बने हुए हैं, क्योंकि डेनिसोवन जीनोम पहली बार प्रकाशित हुए 14 साल हो चुके हैं और तब से कोई नया विलुप्त मानव-पूर्वज जीनोम सामने नहीं आया है। यह अंतर बहुत पुराने जीवाश्मों, खासकर गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों के जीवाश्मों से उपयोगी आनुवंशिक सामग्री निकालने की तकनीकी कठिनाई को रेखांकित करता है, जहां DNA तेजी से नष्ट होता है। ऐसे जीवाश्मों से मिलने वाले निष्कर्ष वैज्ञानिकों को मानव विकास और विभिन्न विलुप्त मानव-पूर्वज समूहों के बीच संबंधों की व्यापक कहानी जोड़ने में मदद करते हैं।
मुख्य तथ्य
- 1वैज्ञानिकों ने एक होमो इरेक्टस जीवाश्म का अध्ययन किया
- 2डेनिसोवन जीनोम प्रकाशित हुए 14 साल हो चुके
- 3तब से कोई नया विलुप्त मानव-पूर्वज जीनोम नहीं मिला
- 4गर्म जलवायु वाले जीवाश्मों से DNA निकालना विशेष रूप से कठिन
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
मानव विकास, जीवाश्म विज्ञान और आनुवंशिकी से जुड़ा यह विषय RAS प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के विज्ञान खंड के लिए प्रासंगिक है।
स्थायी GK: डेनिसोवन की पहचान साइबेरिया की डेनिसोवा गुफा में मिली एक उंगली की हड्डी से हुई थी, जिसका जीनोम 2010 में प्रकाशित हुआ था।