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राष्ट्रीय · विज्ञान

भारत का पहला हरित मेथनॉल संयंत्र कांडला में, आक्रामक प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा से बनेगा ईंधन

1 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

कांडला का पायलट हरित मेथनॉल संयंत्र कच्छ की आक्रामक झाड़ी प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा को जहाज़ी ईंधन में बदलेगा।

क्या हुआ

भारत का पहला हरित मेथनॉल संयंत्र गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी में बन रहा है, जिसका मुख्य कच्चा माल प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा होगा। स्थानीय रूप से 'गांडो बावळ' कहलाने वाली मैक्सिको मूल की यह झाड़ी कच्छ के बन्नी घास के मैदानों में फैलकर देशी घासों को हटा रही है। Ankur Scientific जैवभार को सिनगैस में बदलेगी और Thermax सिनगैस से मेथनॉल बनाएगी; लक्ष्य जहाज़ों के स्वच्छ ईंधन के लिए प्रतिदिन लगभग पाँच टन उत्पादन है। लगभग 100 करोड़ रुपये का यह पायलट इंजीनियरिंग चरण में है और मार्च 2027 तक चालू होना है।

मुख्य तथ्य

  1. 1स्थान: दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, कांडला (गुजरात)
  2. 2कच्चा माल: प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा (गांडो बावळ), बन्नी में आक्रामक
  3. 3क्षमता लगभग 5 टन/दिन; लागत लगभग 100 करोड़ रुपये
  4. 4गैसीकरण: Ankur Scientific; मेथनॉल संश्लेषण: Thermax

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

प्रारंभिक परीक्षा में भारत के पहले हरित मेथनॉल संयंत्र का बंदरगाह, कच्चा माल या प्रोसोपिस से प्रभावित घास का मैदान पूछा जा सकता है।

स्थायी GK: प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा को उत्तर भारत में 'विलायती कीकर' और तमिलनाडु में 'वेलिकाथन' कहते हैं। कांडला संयंत्र हरित सागर दिशानिर्देश (2023) और मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 के तहत प्रौद्योगिकी प्रदर्शन इकाई है।

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