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राष्ट्रीय · कला-संस्कृति

भारत की जनजातीय चित्रकलाएं

19 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

जनजातीय चित्रकलाएं — प्राकृतिक रंगों व प्रतीकों से प्रकृति, अनुष्ठानों व दैनिक जीवन का चित्रण।

क्या हुआ

भारत की जनजातीय चित्रकला (tribal paintings) की चर्चा हुई। भारत की जनजातीय/लोक चित्रकलाएँ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत हैं, जो प्रकृति, देवी-देवताओं, अनुष्ठानों व दैनिक जीवन को चित्रित करती हैं। प्रमुख शैलियाँ — वार्ली (महाराष्ट्र; ज्यामितीय आकृतियाँ), गोंड (मध्य प्रदेश; बिंदु-रेखा), मधुबनी/मिथिला (बिहार), पिथौरा (गुजरात/MP-भील), सौरा (ओडिशा), भील (राजस्थान/MP)। राजस्थान की प्रमुख लोक/लघु शैलियाँ — फड़ चित्रकला (देवनारायण/पाबूजी की कथाएँ), मांडना (दीवार/फर्श अलंकरण) व मीनाकारी-मिनिएचर। ये GI-टैग, सांस्कृतिक संरक्षण व आजीविका से जुड़ी हैं। यह कला-संस्कृति व विरासत से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1भारत की जनजातीय/लोक चित्रकलाएँ।
  2. 2वार्ली, गोंड, मधुबनी, सौरा, भील शैलियाँ।
  3. 3प्रकृति, देवी-देवता, अनुष्ठान, दैनिक जीवन।
  4. 4राजस्थान — फड़, मांडना चित्रकला।
  5. 5GI-टैग; सांस्कृतिक संरक्षण व आजीविका।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

वारली, गोंड व भील चित्रकला कला-संस्कृति में पूछी जाती हैं।

स्थायी GK: जनजातीय चित्रकला — वार्ली (महाराष्ट्र), गोंड (MP), मधुबनी (बिहार), सौरा (ओडिशा), भील। राजस्थान — फड़, मांडना। GI-टैग; सांस्कृतिक विरासत।

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