भारतीय संघवाद पर दबाव
21 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
भारत 'अर्ध-संघीय'; अंतर-राज्य परिषद अनुच्छेद 263; बोम्मई वाद (1994)।
क्या हुआ
भारतीय संघवाद पर बढ़ते तनाव की चर्चा हुई। भारत का संविधान अनुच्छेद 1 में भारत को 'राज्यों का संघ' कहता है और शक्तियों को संघ, राज्य व समवर्ती सूचियों में बाँटता है। तनाव के क्षेत्र — राज्यपाल की भूमिका, केंद्रीय एजेंसियों का प्रयोग, GST के बाद राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता, परिसीमन व 'एक राष्ट्र एक चुनाव', तथा केंद्रीय योजनाओं में राज्यों का हिस्सा। सहकारी व प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग व अंतर-राज्य परिषद जैसे मंच महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य तथ्य
- 1भारतीय संघवाद पर तनाव की चर्चा।
- 2अनुच्छेद 1 — 'राज्यों का संघ'; सातवीं अनुसूची की तीन सूचियाँ।
- 3मुद्दे — राज्यपाल, केंद्रीय एजेंसियाँ, GST के बाद वित्तीय स्वायत्तता।
- 4परिसीमन व 'एक राष्ट्र एक चुनाव'।
- 5मंच — GST परिषद, वित्त आयोग, अंतर-राज्य परिषद।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
संघवाद, अनुच्छेद 263/280 व प्रमुख वाद राजव्यवस्था में अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: अनुच्छेद 1 — 'राज्यों का संघ'। सातवीं अनुसूची — संघ, राज्य, समवर्ती सूची। वित्त आयोग (अनुच्छेद 280); GST परिषद (अनुच्छेद 279A); अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263)।