कोप्पल का अर्ध-शुष्क परिदृश्य प्रमुख वन्यजीव आश्रय के रूप में उभरा, अध्ययन ने 'बंजर भूमि' वर्गीकरण पर पुनर्विचार का आग्रह किया
15 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
क्या हुआ
कर्नाटक के उत्तरी जिले कोप्पल पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक अध्ययन में पाया गया है कि भारत की आधिकारिक भूमि वर्गीकरण प्रणाली में 'बंजर भूमि' कही जाने वाली जगहें वास्तव में महत्वपूर्ण वन्यजीव आश्रय स्थल हैं। यह क्षेत्र अर्ध-शुष्क दक्कन पठार का हिस्सा है। अध्ययन में धारीदार लकड़बग्घा, भालू, काला हिरण और भारतीय भेड़िये जैसी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है जो इन खुले, गैर-वन पारिस्थितिकी तंत्रों में फल-फूल रही हैं। शोधकर्ताओं का तर्क है कि भारत की संरक्षण नीति लंबे समय से घने वन आवासों की ओर पक्षपाती रही है और घास के मैदानों, झाड़ीदार भूमि तथा चट्टानी क्षेत्रों जैसे 'ओपन नेचुरल इकोसिस्टम' (ONEs) की उपेक्षा की गई है। कम-तीव्रता वाली वर्षा-आधारित खेती और पारंपरिक पशुचारण खतरा नहीं बल्कि जैव विविधता के सहयोगी रहे हैं। अध्ययन में NRSC और भूमि उपयोग सांख्यिकी विभाग द्वारा उपयोग किए जाने वाले 'बंजर भूमि' वर्गीकरण पर पुनर्विचार की मांग की गई है। यह वर्गीकरण करोड़ों हेक्टेयर भूमि को सौर पार्क, वृक्षारोपण और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए असुरक्षित बनाता है। यह अध्ययन राजस्थान के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है जहाँ विशाल अर्ध-शुष्क क्षेत्र हैं।